JNU के छात्रों पर जानलेवा हमला, आयशी घोष गंभीर रूप से घायल

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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को यूनिवर्सिटी में कुछ नकाबपोश लोगों ने छात्रों और शिक्षकों पर जानलेवा हमला कर दिया। सोशल मीडिया पर जेएनयू छात्रों ने दावा किया कि गुंडों का एक झुंड कैंपस के अंदर छात्रों और शिक्षकों पर हमला कर दिया। तस्वीर में साफ़ देखा जा सकता है कि एक गुंडा हाथ में हथौड़ा लेकर हमला करता दिखाई दे रहा है।

केंद्रीय गृहमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बीते 26 दिसंबर को दिल्ली में एक सभा में बोतले हुए कहा था कि, “दिल्ली में अशांति के लिए जिम्मेदार टुकड़े-टुकड़े गैंग को दंड देने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता को इन्हें दंड देना चाहिए”।

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जेएनयू के एक छात्र जो कैम्पस में उस वक्त मौजूद थे। उन्होने फ़ोन पर हमे बताया कि, “क़रीब 50 गुंडे कैंपस में घुसे और बाहर निकले वाले सभी दरवाज़ों को बंद करके तोड़फोड़ करने लगे। उन्होंने कारों में तोड़फोड़ की और लोगों पर हमले भी किए। छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष पर भी ‘मास्क पहने गुंडों द्वारा घातक हमला किया गया और शिक्षकों पर भी हमला किया गया। बाहर से आए गुंडों ने बीयर की बोतलों से भी हमला कर छात्रों को मारा”।

तस्वीर में साफ़ देखा जा सकता है कि मुहं छिपाए ये गुंडा हाथ में हथौड़ा लिय है

इस ट्विटर हैंडल से लिखा गया है, ‘पुलिस जेएनयू में एबीवीपी को छात्रों पर हमला करने में सहायता कर रही है। हमें सहायता चाहिए । जेएनयू के उत्तरी गेट पर पुलिस छात्रों से कह रही है कि वे भारत माता की जय के नारे लगाएँ।’

जेएनयू के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने लिखा, ‘एबीवीपी के हमलावर कोयना होस्टल में घुस गए। यह पूरी तरह महिला होस्टल है। छात्राएँ और मेस की कर्मचारी सभी डरे-सहमे से हैं। गुंडे दरवाज़े को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।’

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जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आयशी घोष का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उनके माथे से खून बहता दिख रहा है, उनका कहना है कि कुछ मास्क पहने लोगों ने उन्हें बेरहमी से मारा है। साध ही अन्य घायल छात्रों और  शिक्षकों के घायल होने की ख़बर आ रही है।

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जेएन के एक छात्र ने बताया कि, “जेएनयू के हॉस्टल्स अभी सबसे असुरक्षित जगह हैं। स्टूडेंट्स ने खुद को अंदर से बंद कर लिया है। कई सारे छात्र लाइब्रेरी और सेंटर्स के रीडिंग रूम में हैं और वो अपनी सुरक्षा को देखते हुए बाहर नहीं निकलना चाह रहे। ऐसे में एडमिनिस्ट्रेशन को उनकी सुरक्षा की चिंता कम है और इस नियम की चिंता ज़्यादा कि रविवार को लाइब्रेरी 8 बजे ही बंद हो जाती है। सेक्योरिटी गार्ड्स उन्हें जबरदस्ती बाहर निकाल रहे हैं और बाहर का माहौल बहुत ही ज़्यादा खौफनाक है। स्थिति बहुत ही ज़्यादा खराब है अंदर”।