“अपनी समस्या बताएंगे तो फुटपाथ पर भी सोना दुर्भर हो जाएगा”

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अविनीश मिश्रा, अनमोल गुप्ता |ग्राउंड रिपोर्ट

बारिश के बाद अचानक से दिल्ली की ठंड बढ़ गई है। यह ठंड दिल्ली की एक आबादी के लिए कहर बनकर आई है। 118 सालों में दूसरी बार दिल्ली में दिसंबर सबसे ठंडा महीना रहा। दिल्ली के लगभग 45 हजार फुटपाथों पर सोने वाले लोगों के लिए यह ठंड एक आपदा बनकर आई है। ठंड में ठिठुर कर फुटपाथ पर सोने वाले ऐसे ही लोगों की आंखों देखी रिपोर्ट की है हमारे संवाददाता अविनीश मिश्रा और अनमोल गुप्ता ने…

स्थान– ओखला एनसआईसी मेट्रो पुल

समय– रात 12.03 मिनट

तापमान– 6 डिग्री सेल्सियस

ओखला दिल्ली का इंडस्ट्रियल एरिया है। यहां पर देश के हजारों मज़दूर पलायन कर मज़दूरी करने आते हैं। इनमें से अधिकतर बिहार और उत्तर प्रदेश से होते हैं ‌, जो न्यूनतम मज़दूरी पर ही काम करते हैं।

ओखला एनएसआईसी मेट्रो पुल

ओखला एनएसआइसी मेट्रो के बाह्गामी पुल से बाहर निकलते ही फुटपाथ का बड़ा क्षेत्र शुरू होता है, जिसका अधिकांश भाग पुल से ढका है। हम यहां रात के लगभग 12 बजे पहुंचे। कोहरे के कारण ठंड और ज्यादा लग रही है। हम लोगों के गाड़ी से उतरते ही कुछ कुत्ते भौंकने लगते हैं। 

कुत्तों की आवाज़ सुनकर फुटपाथ पर सोए कुछ लोग अचानक से उठ जाते हैं। उन लोगो को हम जैसे ही मीडिया और पत्रकार के रूप में पहचान बताते हैं, वैसे ही सबलोग एकसाथ बात करने से मना कर देते हैं।

कुछ लोग अपना कंबल ओढ़कर सोने लगते हैं, तो कुछ लोग हमें वहां से जाने के लिए कह देते हैं। थोड़ी झिझक के बाद एक शख्स बताते हैं, देखिए हम लोग को यहां चैन से रहना है। आप लोग अपने मतलब के लिए छाप देंगे, लेकिन फिर हमारा जीना यहां दुर्भर हो जाएगा।

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उनकी परेशानी और स्थिति को देखने के बाद हम लोगों ने वहां से निकलने का निर्णय किया।

स्थान– एम्स

समय– रात 1.48 मिनट

तापमान– 5.8 डिग्री सेल्सियस

फुटपाथ पर सोने वाले लोगों पर रिपोर्ट करने वाले पत्रकारों के लिए एम्स सबसे आसान जगह है। यहां फुटपाथ पर सोने वाले अधिकतर लोग अपने परिजन का इलाज कराने वाले रहते हैं, जिनमें अधिकतर गरीब और मध्यमवर्गीय लोग रहते हैं। 

एम्स नई दिल्ली

यहां पर हमने फुटपाथ पर कई सोने वालों से बातचीत की। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से आए सुमंत डेका ने हमें बताया-

“हम अपने चाची का ऑपरेशन कराने आए हैं। यहां हम तीन लोग आए थे, एम्स में दो लोग से ज्यादा रहने नहीं दिया जाता, इसलिए मैं यहां सो रहा हूं।”

सुमंत डेका

एम्स के बाहर सोने वाले अधिकतर लोगों की समस्या अस्थाई है। अगर सरकार इनके रहने का उचित प्रबंध कर दें तो ये ठंड से बच सकते हैं। 

स्थान – सराय काले खां

समय– रात के 3.24 मिनट

तापमान– 5.8 डिग्री सेल्सियस

रात के साढ़े तीन बजने वाले थे। हाइवे से तेज रफ्तार में बड़ी-बड़ी गाड़ियां गुजर रही थी। तभी हम लोगों की नज़र फुटपाथ पर सोए कुछ लोगों पर पड़ी। कुछ लोग फुटपाथ पर सेब और फलों के खाली कोंट पर गमछा डाले सो रहे थे। 

सराय काले खां

उसी फुटपाथ के थोड़ा आगे एक शख्स आग जला कर बैठा हुआ था। थोड़ी बातचीत के बाद उसने बताया कि उन लोगों की सुरक्षा करने के लिए सप्ताहिक पारी लगी होती है। हमलोग भी वहां आग के पास हाथ सेंकने के लिए बैठ गए। 

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बातचीत के आगे के क्रम में बिहार के किशनगंज से आए फजलुल्ला हसन ने बताया कि यहां पर मैं 7-8 साल से रह रहा हूं। परिवार बिहार में ही रहता है। यहां पर हमाली (मजदूरी) का काम करता हूं। अधिकतर मजदूर यहां यही करते हैं। 

वे रात-भर क्यों जगते हैं और सोने के लिए शेल्टर होम में क्यों नहीं जाते हैं? हमारे इस सवाल पर फजलुल्ला कहते हैं, “शेल्टर होम में पहले एक बार गया था, लेकिन कई तरह की समस्या है, इसलिए हमलोग नहीं जाते हैं। यहीं पर हम लोग रहते हैं और सभी लोग अपने पारी(प्रत्येक व्यक्ति सप्ताह में एक रात जागकर) लगा लिए हैं, जिससे सुरक्षा भी रहे।”

यहां से बातचीत कर हम लोग आगे बढ़ गए। 

दिल्ली सरकार आंकड़े को लेकर कन्फ्यूज़

दिल्ली के बेघरों को हिफाजत करने का जिम्मा दिल्ली सरकार की है, लेकिन सरकार इस पर निदान ढूंढने के बजाय आंकड़ों की चालबाजी करने में ज्यादा दिलचस्पी रखती है। 

2011 के जनगणना के अनुसार, दिल्ली में तकरीबन 46 हजार लोग फुटपाथ पर सोते हैं, जबकि दिल्ली आश्रय बोर्ड(डूसिब) की रिपोर्ट इस आंकड़े को नहीं मानती है। डूसिब की वेबसाइट पर 2014 के एक आंकड़े को मानें तो दिल्ली में सिर्फ 16 हज़ार बेघर रहते हैं। लेकिन कई समाजिक संगठन से लेकर इस पर काम कर रहे स्वयं सहायता संगठन डूसिब के इस आंकड़े को फर्जी करार देते हैं। 

स्थाई निदान के बजाय नेताओं का कंबल वितरण 

21 दिसंबर को लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिडला फुटपाथ पर सो रहे लोगों को कंबल वितरण करने पहुंचे थे। बिडला द्वारा इस संबंध में कई ट्वीट भी किए हैं। 

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ओम बिरला कंबल वितरण करते हुए (फाईल)

बिडला के आलावा भी कई छोटे और बड़े नेता फुटपाथ पर सो रहे लोगों को कंबल बांटते हैं, लेकिन कोई भी नेता इसके स्थाई निदान की पहल नहीं करता है। 

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