Thu. Nov 14th, 2019

groundreport.in

News That Matters..

Hockey World Cup : जब भारत ने पाकिस्तान से 1971 का बदला 1975 में पूरा किया था

1 min read

indian hockey team world cup 2018

नई दिल्ली । आयुष ओझा

ओडिशा के भुवनेश्वर में हॉकी विश्व कप का 14 वाँ संस्करण खेला जा रहा है। इस हॉकी विश्व कप को लेकर सभी टीमों ने कमर कस ली है, लेकिन क्या आपको पता है हॉकी विश्व कप के इतिहास के बारे में आखिर कब से खेला जा रहा है हॉकी विश्व कप?

भारत ने साल 1975 में पहली और एकमात्र बार विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था, भारत की जीत बहुत खास थी क्योंकि उस समय भारत ने फाइनल मुकाबले में चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था। हॉकी विश्व कप के इतिहास में पाकिस्तान सबसे सफल टीम है, पाकिस्तान की टीम ने सर्वाधिक 4 बार इस खिताब को हासिल किया है।

पहले ये हर २ साल में खेला जाता था लेकिन वक़्त के साथ इसमें बदलाव हुआ और फिर ये हर 4 साल में खेला जाने लगा। इस कड़ी में आज हम आपको हॉकी विश्व कप के अब तक हुए संस्करणों के विजेताओं और इसमें भारत के सफर के विषय में कुछ रोचक किस्से बता रहे हैं…

पाकिस्तान ने जीता 1971 विश्व कप
हॉकी विश्व कप की शुरुआत 1971 में स्पेन के बार्सिलोना में हुई थी। इस विश्व कप में 10 टीमों ने हिस्सा लिया। इन 10 टीमों ने कुल 30 मुकाबले खेले थे जिसमें 66 गोल दागे गये थे। इस विश्व कप में पाकिस्तान के तनवीर दार ने सर्वाधिक 8 गोल अपने नाम किए। 1971 विश्व कप के फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान और स्पेन के बीच भिड़त हुई। जिसमें पाकिस्तान ने स्पेन को 1-0 से मात दी। वहीं इस टूर्नामेंट में भारत तीसरे स्थान पर रहा।

1971 विश्व कप में भारत का सफर
इस विश्व कप में भारतीय हॉकी टीम का सफर सेमीफाइनल तक पहुंचा जहां पर भारत का मुकाबला पाकिस्तान के साथ था। दोनों टीमों के बीच खेले गए इस मैच में भारत को पाकिस्तान के हाथों शिकस्त खानी पड़ी। पाकिस्तान ने भारत को इस मैच में 2-1 से मात दी थी।

1971 विश्व कप में भारत का तीसरे स्थान के लिए केन्या से मुकाबला था जिसमें भारत ने केन्या को 2-1 से हराया। भारत के कुलवंत सिंह और राजविंद्र ने गोल दागे और टीम को जीत दिलाई। इसके साथ ही भारत ने 1971 विश्व कप में ब्रांज मेडल के साथ अपना अभियान खत्म किया।

1973 विश्व कप का इतिहास
1973 में हॉकी का दूसरा विश्व कप खेला गया। इस बार नीदरलैंड ने हॉकी विश्व कप की मेजबानी की। इस विश्व कप में 12 टीमों ने हिस्सा लिया। 1973 विश्व कप में 42 मैच खेले गए जिसमें 124 गोल दागे गए। 1973 हॉकी विश्व कप में नीदरलैंड की टीम ने भारत को फाइनल में मात देकर खिताब अपने नाम किया। इस विश्व कप में ताईस क्रूज़ ने सर्वाधिक 11 गोल किए।

1973 विश्व कप में भारत
1973 विश्व कप में भारत के प्रदर्शन की बात की जाए तो भारत ने ग्रुप स्टेज मुकाबले में सभी टीमों को पटकनी दी। इसके बाद एक बार फिर भारत पाकिस्तान आमने सामने थे लेकिन इस बार सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने अपना बदला लेते हुए पाकिस्तान को 1-0 से हराया और फाइनल में एंट्री की। फाइनल में भारत का सामना मेजबान नीदरलैंड के साथ था और इस मैच में भारत को हार का मुंह देखना पड़ा जिसके चलते नीदरलैंड को 1973 विश्व कप हासिल हुआ।

1975 विश्व कप में पहली बार भारत ने जीता खिताब
हॉकी विश्व कप का तीसरा सत्र मलेशिया में हुआ। 1975 विश्व कप में 12 टीमों ने हिस्सा लिया और इस विश्व कप में कुल 42 मैच खेले गये वहीं इन 42 मैचों में कुल 175 गोल दागे गये। 1975 विश्व कप का खिताब पहली बार भारत ने अपने नाम किया। भारत ने पाकिस्तान को मात देकर विश्व कप पर कब्जा जमाया। वहीं वेस्ट जर्मनी ने मलेशिया को 4-0 से मात देकर ब्रांज मेडल पर कब्जा जमाया। इस विश्व कप में ताईस क्रूज़, मनजूर-अल-हसन और स्टीफन ओटूलाकोवस्की ने सर्वाधिक गोल किए।

1975 विश्व कप में भारत का पूरा सफर
1973 विश्व कप में हार के बाद भारत को निराशा मिली लेकिन 1975 के फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को मात देकर पूरे भारत में खुशी की लहर दौड़ा दी। इस विश्व कप में भारत की कमान अर्जीतपाल सिंह को हाथों में थी। फाइनल में भारत का सामना पाकिस्तान की टीम के साथ था। मैच के 17वें मिनट में पाकिस्तान के जाहिद ने गोल दागकर बढ़त बना ली।

हालांकि पाकिस्तान की ये बढ़त ज्यादा देर तक नहीं रही और भारत ने गोल करके मैच में वापसी कर ली। भारत के लिए पहला गोल सुर्जीत सिंह रंधावा ने किया। वहीं मैच के 51वें मिनट में भारत के स्टार स्ट्राइकर अशोक कुमार ने गोल दागकर भारत को पहला वर्ल्ड कप का खिताब दिलवाया।

1978 का हॉकी विश्व कप इतिहास
हॉकी विश्व कप के चौथे संस्करण अर्जेंटीना के ब्यूनोश एरिस में खेला गया। इस बार विश्व कप में 14 टीमों ने हिस्सा लिया। इस बार पाकिस्तान ने नीदरलैंड को मात देकर दूसरी बार विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। वहीं तीसरे स्थान के लिए ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट जर्मनी के बीच मुकाबला खेला गया जिसमें ऑस्ट्रेलिया की टीम ने जर्मनी को 4-3 से हराया।

1978 विश्व कप में भारत का सफर
वर्ल्ड कप के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ था जब भारतीय हॉकी टीम पहले ही दौर में टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी।

1982 विश्व कप
1982 वर्ल्ड कप की मेजबानी भारत ने की और इसका आयोजन मुंबई में किया गया। 1982 विश्व कप में 12 टीमों ने हिस्सा लिया। इस टूर्नामेंट में कुल 42 मैच खेले गये और इन मैचों में कुल 216 गोल दागे गये। इस टूर्नामेंट में कमिलउल्लाह खान ने सर्वाधिक 12 गोल किये। पाकिस्तान ने फाइनल में वेस्ट जर्मनी को हराकर दूसरी बार खिताब अपने नाम किया। वहीं ऑस्ट्रेलिया की टीम तीसरे पायदान पर रही।

1982 विश्व कप में भारत का सफर
1980 ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर भारतीय हॉकी टीम जीत के हौसले के साथ 1982 वर्ल्ड कप में उतरी थी। हालांक टीम के लिए ये विश्व कप भी अच्छा नहीं रहा। इस विश्व कप में भारत को पांचवे स्थान से संतुष्टि करनी पड़ी।

1986 विश्व कप का इतिहास
1986 का विश्व कप की मेजबानी लंदन ने की। इस विश्व कप में 12 टीमों ने हिस्सा लिया। 1986 का हॉकी वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया की टीम ने अपने नाम किया। वहीं इंग्लैंड को दूसरे और वेस्ट जर्मनी को तीसरे स्थान से संतुष्टि करनी पड़ी।  इस विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के लिजेंट रीच कार्लस्वोर्थ ने सर्वाधिक गोल किए। वहीं भारत के मोहम्मद शाहिद को ‘मैन ऑफ द टूर्नामेंट’ के खिताब से नवाजा गया।

1986 विश्व कप में भारत का सफर
इस विश्व कप में भारत की टीम ऑस्ट्रिलया, वेस्ट जर्मनी, पौलेंड, स्पेन और कनाडा के साथ ग्रुप बी का हिस्सा थी। इस टूर्नामेंट में भारत को अपने पहले तीन मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा। भारत का पहला मैच पौलेंड के साथ था जिसमें पौलेंड की टीम ने भारत को 0-1 से हराया वहीं भारत का दूसरा मैच स्पने के साथ था जिसमें स्पने की टीम ने भारत को 2-1 से हराया।

तीसरे मैच में भारत को ऑस्ट्रेलिया को खिलाफ 6-0 से कारारी शिकस्त खानी पड़ी। वहीं भारत को इस टूर्नामेंट में पहली जीत कनाडा के खिलाफ मिली भारत ने कनाडा को 2-0 से मात दी वहीं जर्मनी के खिलाफ भारत को ड्रॉ से संतुष्टि करनी पड़ी।

इस विश्व कप में भी भारत को अपने ग्रुप में पांचवे स्थान से संतोष करना पड़ा। वहीं टूर्नामेंट की बात की जाए तो 11वें और 12वें स्थान के लिए भारत पाकिस्तान के बीच खेले गये मैच में पाकिस्तान ने भारत को 3-2 से हराया और 11वें स्थान पर रहा और भारत इस टूर्नामेंट में 12वें स्थान पर रहा।

1990 विश्व कप का इतिहास
1990 विश्वकप की मेजबानी पाकिस्तान के लाहौर में की गई। इस टूर्नामेंट में भी 12 टीमों ने हिस्सा लिया। जिनके बीच 42 मैच खेले गये और इन मैचों में 147 गोल दागे गये। हौलेंड के फ्लोरिश जैन बोवेलैंडर और स्पेन के लगनासीओ ने सर्वाधिक 9-9 गोल किये। इस विश्व कप में नीदरलैंड ने पाकिस्तान को मात देकर खिताब अपने नाम किया वहीं ऑस्ट्रलिया की टीम तीसरे स्थान पर रही।

1990 विश्व कप में भारत का सफर
1990 विश्व कप में भारत का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा और भारत को ग्रुप स्टेज पर केवल एक मैच में जीत हासिल हुई और इंडिया को 10वें स्थान से संतोष करना पड़ा।

1994 विश्व कप का इतिहास
1994 विश्व कप की मेजबानी ऑस्ट्रलिया ने की और इस विश्व कप में 12 टीमों ने हिस्सा लिया। इस विश्व कप में 129 गोल किए गये। इस विश्व कप में टाको वेन डेन ने सर्वाधिक 11 गोल दागे वहीं पाकिस्तान के शाहबाज अहमद को मैन ऑफ द टूर्नामेंट के खिताब से नवाजा गया। 1994 विश्व कप में पाकिस्तान को जीत दिलवाने में शाहबाज अहमद का बहुत बड़ा योगदान रहा। वहीं विश्व कप की मेजबानी करने वाली ऑस्ट्रेलिया को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।

1998 विश्व कप का इतिहास
1998 विश्व की मेजबानी डच में की गई। 1998 विश्व कप का खिताब 1973 विश्वकप जीतने वाली नीदरलैंड ने अपने नाम किया। 1998 विश्व कप में 12 टीमों ने हिस्सा लिया और इस विश्व कप में 209 गोल किये गये। ऑस्ट्रेलिया के मिड फिल्डर जय स्टैकी ने इस विश्व कप में सर्वाधिक 11 गोल किये। वहीं जर्मनी के ओलिवर डोमेके को बेस्ट प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के खिताब से नवाजा गया।

1998 विश्व कप में भारत
1998 विश्व कप में भारतीय हॉकी टीम ने निराशाजनक प्रदर्शन किया। भारत ने 9वें स्थान के साथ अपना अभियान खत्म किया।

2002 में विश्व कप का इतिहास
1975 के बाद मलेशिया ने एक बार फिर हॉकी विश्व कप की मेजबानी की। इस बार विश्व कप में 16 टीमों ने हिस्सा लिया। 2002 में जर्मनी ने पहली बार विश्व कप का खिताब हासिल किया। जर्मनी की टीम ने फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को फाइनल में 2-1 से हराकर जीत खिताब हासिल किया।

वहीं दक्षिण अफ्रीका की टीम को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। विश्व कप के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब 300 गोल किए गये हो। अर्जेंटीना के जॉर्ज लॉंबी और पाकिस्तान के पेनल्टी एक्सपर्ट शोहेल अब्बास ने इस विश्व कप में 10 गोल अपने नाम किए।

2002 विश्व कप में भारत का सफर
इस विश्व कप में भारत की टीम को छठे स्थान से संतोष करना पड़ा। भारत के साथ इस ग्रुप में क्यूबा, पौलेंड, जापान, इंग्लैंड, मलेशिया, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया की टीम थी। इस विश्व कप में भारत की टीम ने क्यूबा और पौलेंड की टीम को मात दी वहीं जापान के खिलाफ भारत ने 2-2 से ड्रॉ खेला।

वहीं इंडिया को अपने बारी मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा। वहीं स्पने की टीम को भारत ने 3-0 से हराया। हालांकि 9वें और 10वें स्थान के लिए हुए मुकाबले में भारत को न्यूजीलैंड ने 2-1 से हराया। इसके साथ ही एक बार फिर भारत का विश्व कप में निराशाजनक प्रदर्शन जारी रहा।

2006 विश्व का इतिहास
2006 विश्व कप की मेजबानी जर्मनी ने की और इस विश्व कप में एक बार फिर 12 टीमों ने हिस्सा लिया।इस विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के बीच टक्कर हुई जिसमें जर्मनी ने ऑस्ट्रेलिया को 4-3 से हराया और विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया की टीम को एक बार फिर दूसरी बार दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा वहीं स्पने की टीम ने कोरिया को मात देकर तीसरे स्थान पर कब्जा किया। इस विश्व कप में 174 गोल हुए। डच के पेनल्टी एक्सपर्ट तायकै तायैकेमा ने सर्वाधिक 11 गोल किये। वहीं ऑस्ट्रेलिया के जैमी को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के खिताब से नवाजा गया।

2006 विश्व कप में भारत
2006 विश्व कप में भी भारत का फॉर्म कुछ खास नहीं रहा और भारत को ग्रुप स्टेज मुकाबले में एक मैच में जीत हासिल नहीं हुई। वहीं टूर्नामेंट के आखिरी मैच में भारत ने आखिरी मैच में दक्षिण अफ्रीका को हराया और इस जीत के साथ अपना अभियान खत्म किया।

2010 विश्व कप का इतिहास
2010 में भारत ने दूसरी बार विश्व कप की मेजबानी की इस बार भारत के दिल्ली में मेजबानी की गई। इस विश्व कप में 12 टीमों ने हिस्सा लिया और 38 मैच खेले गये। दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडिम में ये सभी मुकाबले खेले गये और इस टूर्नामेंट में 199 गोल दागे गए।

ऑस्ट्रेलिया की टीम ने दूसरी बार विश्व का खिताब अपने नाम किया। फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया ने जर्मनी को 2-1 से हराया और खिताब पर कब्जा किया। ऑस्ट्रेलिया के लूक ड्योनर और हॉलेंड के तायके तायैकेमा इस विश्व कप के 8 गोल करने वाले टॉप स्कोरर रहे।

2010 विश्व कप में भारत का सफर
2010 विश्व कप में माना जा रहा था कि भारतीय हॉकी टीम अपने घर में अच्छा प्रदर्शन करेगी और खिताब जीतने में कामयाब रहेगी लेकिन इस बार भी नाकामयाबी ही हासिल हुई। भारत ने यहां आठवें स्थान पर अपना अभियान समाप्त किया था।

2014 विश्व कप का इतिहास
2014 विश्व कप के 13वें संस्करण की मेजबानी नीदरलैंड ने की। ऑस्ट्रेलिया ने तीसरी बार ये खिताब अपने नाम किया। विश्व कप की मेजबानी करने वाले नीदरलैंड को दूसरे स्थान पर रहना पड़ा और रियो ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता अर्जेंटीना ने तीसरा स्थान हासिल किया। इस विश्व कप में 12 टीमों ने हिस्सा लिया और 38 मैच खेले गये जिसमें 162 दागे गये। अर्जेंटीना के ड्रेग फिलिकर गोनज़ालो पिल्लेट ने सर्वाधिक 10 गोल दागे। वहीं ऑस्ट्रेलिया के मार्क नोवल्स को मैन ऑफ द टूर्नामेंट के खिताब से नवाजा गया।

2014 विश्व कप में भारत
भारत को इस विश्व कप में तीन मैचों में हार का सामना करना पड़ा। भारत ने इस विश्व कप में मलेशिया की टीम को 3-2 से हराया और स्पेन के खिलाफ भारत को 1-1 से खेले गए ड्रॉ से संतोष करना पड़ा। हालांकि इसके भारत को बेल्जियम के खिलाफ 3-2, इंग्लैंड से 2-1 और ऑस्ट्रेलिया से 4-0 से शिकस्त खानी पड़ी। टूर्नामेंट में 9वें स्थान के लिए खेले गये मैच में भारत ने दक्षिण कोरिया को 3-0 से हराया।

2018 विश्व कप
2018 हॉकी विश्व कप की मेजबानी इस भारत कर रहा है। इसका आयोजन ओडिसा की राजधानी भुवेश्वर में किया गया है। इस विश्व कप में कुल 16 टीमें मैदान में हैं। 28 नवंबर से शुरू हुआ हॉकी विश्व कप 2018 टूर्नामेंट का निर्णायक और फाइनल मुकाबला 16 दिसंबर को खेला जाएगा।

Copyright © All rights reserved. Newsphere by AF themes.