संसद भवन का इतिहास

संसद भवन: जानिए उस इमारत का इतिहास जहां दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र सांस लेता है

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आज प्रधानमंत्री मोदी ने नई संसद की नींव रखी। मौजूदा संसद भवन का निर्माण सन 1921-27 की बीच हुआ था, इस हिसाब से इसे बने 93 साल हो चुके हैं। संसद भवन का डिजाइन उस दौर के मशहूर ब्रिटिश वास्तुविद एडविन लुटियन ने बनाया था। अंग्रेज़ों ने इसे बनाने में 83 लाख रुपए खर्च किए थे। नए संसद भवन को बनाने में कुल 900 करोड़ का खर्च अनुमानित है।

कैसे बनी भारत की संसद?

1911 में दिल्ली को भारत की राजधानी बनाया गया। मगर अंग्रेजों को लगा कि दिल्ली ‘राजधानी लायक’ नहीं है। ऐसे में ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियन को दिल्ली की नई शक्ल बनाने का जिम्मा दिया गया। लुटियन दुनियाभर में कई इमारतों को शक्ल दे चुके थे। उनकी सोच भारतीयों के प्रति काफी नकारात्मक थी।लेकिन उनकी बनाई गई इमारतों में भारत की संस्कृति की झलक ज़रुर दिखाई देती है। लुटियन के डिज़ाईन की यही खासियत थी कि वह स्थानीय कला और संस्कृति को अपने अंदर समेट लेती थी। दिल्ली को बनाने में लुटियन ने 20 साल लगाए, उन्होने इसे बनाने में शिद्दत से काम किया। बनने के महज़ 17 साल बाद अंग्रेजों के हाथ से चली गई और आज़ादी के बाद दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र इन्हीं लुटियन इमारतों में बनकर तैयार हुआ और आज तक इन इमारतों की ही तरह भारत के लोकतंत्र की नींव भी मज़बूत बनी हुई है।

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बात की जाए भारतीय संसद की तो यह दुनिया की खूबसूरत इमारतों में से एक है। गोलाकार आवृत्ति में निर्मित संसद भवन का व्यास 170.69 मीटर का है तथा इसकी परिधि आधा किलोमीटर से अधिक (536.33 मीटर) है जो करीब छह एकड़ (24281.16 वर्ग मीटर)भू-भाग पर स्थित है। दो अर्धवृत्ताकार भवन केंद्रीय हाल को खूबसूरत गुंबदों से घेरे हुए हैं। भवन के पहले तल का गलियारा 144 मजबूत खंभों पर टिका है। प्रत्येक खंभे की लम्बाई 27 फीट (8.23 मीटर) है। बाहरी दीवार ज्यामितीय ढंग से बनी है तथा इसके बीच में मुगलकालीन जालियां लगी हैं।

संसद भवन ने आज़ादी के बाद से अब तक भारत को बनाने में अहम योगदान दिया है। भारत में इसे लोकतंत्र का मंदिर कहा गया जहां हर दिन संविधान की पूजा की जाती है। इसी संसद भवन में हमारे चुने हुए प्रतिनिधियों ने तमाम कानून बनाए, हर भारतीय के विकास के लिए नए सुधार किए। संसद भवन पर आतंकियों ने हमला भी किया लेकिन वे भारतीय लोकतंत्र को हिलाने में कामयाब नहीं हो सके।

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पीएम मोदी ने नई संसद का भूमिपूजन करते हुए कहा कि हमारे वर्तमान संसद भवन ने आजादी के आंदोलन और फिर स्वतंत्र भारत को गढ़ने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। आजाद भारत की पहली सरकार का गठन भी यहीं हुआ और पहली संसद भी यहीं बैठी।

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