अमेरिका चुनाव 2020: महिला, भारतीयता और भविष्य विजेता का आईना

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संयुक्त राज्य अमेरिका में साल 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के वक्त मीडिया ने हिलेरी क्लिंटन के अलावा एक और अमेरिकी महिला राजनेता की कवरेज पर ध्यान केंद्रित किया था; हिमा एबडिन, हिलेरी क्लिंटन के अभियान की निदेशक। भारतीय मूल की मुस्लिम महिला एबदीन पर “मुस्लिम ब्रदरहुड” समूह से संबद्धता का आरोप लगा था। हिमा एबडिन के पिता सैयद ज़ैनुल आबेदीन ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रों सहित महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं का दौर देखा था। उन्होंने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का अंत और भारत पाकिस्तान का विभाजन भी देखा। मुसलमानों के अस्तित्व की चिन्ता करते हुए सैयद ज़ैनुल अबेदिन ने “इस्लामिक ग्रुप” में भाग लेने का फैसला किया था जिसकी स्थापना और नेतृत्व अबुल आला मौदूदी ने की था।

Gargi Chaturvedi | Opinion

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह समूह मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड के समान है, लेकिन यह भारतीय उप-महाद्वीप में स्थित था। 2016 के अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव के समय जहां डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार में मुस्लिम प्रवासियों के रोके जाने की बात कही वहीं बहुत से पत्रकार और राजनीतिक पंडित हिमा एबडिन के हिलेरी क्लिंटन की भविष्य की कैबिनेट में शामिल होने की बात से आश्वस्त नज़र आए। डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद बहुत से रणनीतिज्ञ और विशेषज्ञों ने हिलेरी क्लिंटन की हार का ज़िम्मेदार हिमा एबडिन को बताया, क्योंकि अमरिका में उस समय मुसलमानों के प्रति विश्वास का अभाव था और एबडिन क्लिंटन की खास थीं। हिलेरी क्लिंटन का मिडिल ईस्ट के प्रति नरम रैवया भी अमरीका के वोटर्स को पसन्द नहीं आया। बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों ने डोनाल्ड ट्रंप के लिए लॉबिंग और वोट किया, जिसके पीछे ट्रंप का हिन्दुओं के प्रति एक झुकाव और लगाव मुख्य भूमिका में रहा।

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साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उप-राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार भारतीय मूल की सीनेटर कमला हैरिस चर्चा में है। यदि जो बिडेन डोनाल्ड ट्रम्प को 59 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हरा देते है तो कमला हैरिस उपराष्ट्रपति होगी। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है क चार साल बाद वह खुद अमेरिकी राष्ट्रपति के पद के लिए दौड़ेंगी। यदि कमला हैरिस जीतती है तो वह न केवल पहली महिला होगी ,बल्कि व्हाइट हाउस में पहली भारतीय मूल की अमेरिकी भी होगी। पर कमला हैरिस का नजरिया भारत के लिए कुछ उदार नहीं है।

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कमला हैरिस के मुताबिक कश्मीर भारतीय कब्जे में है, 200 मिलियन भारत के मुस्लिम हाशिए पर हैं और एक विवादास्पद नागरिकता अभियान चल रहा है जहा मुस्लिम प्रवासियों को बाहर करने वाला कानून आने वाला है। कमला हैरिस भारत के वर्ष 2019 के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिका में हुए राष्ट्रपति ट्रंप के साझा प्रोग्राम हाउडी मोदी से भी नदारद थी जिसकी काफी आलोचना हुई थी प्रवासी भारतीयों द्वारा। लगभग 3.9 मिलियन भारतीय-अमेरिकी, दोनों रिपब्लिकन और अनिश्चित मतदाता मानते हैं कि कमला हैरिस के पास इस बात की समझ का अभाव है कि वह किस चीज़ के लिए खड़ी हैं और खुद को भारतीय मूल की महिला से ज़्यादा अफ्रीकन मूल के होने का गर्व करती हैं।

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कमला हैरिस अमेरिका के डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच के संबंध की आवश्यकता को भी स्वीकार नहीं करती। अमेरिकी राजनीति के दृश्य में कमला हैरिस की सफलता उनके पितृसत्तात्मक वंश पर जोर देने पर निर्भर करती है, जो कि एफ्रो-अमेरिकन और लेफ्ट-लिबरल समाज के साथ अच्छी तरह से मेल बनाने में विश्वास रखती है। अमेरिका के जाति-ग्रस्त समाज में डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए एक लिबरल और अफ्रो-अमेरिकन की प्राथमिकता ही उसके अस्तित्व और जीत का आधार है। कमला खुद को एक क्रिस्चियन बैपटिस्ट के रूप में देखती हैं जिसका प्रमाण है की जब यौन अपराधों के आरोपी ईसाई पादरियों पर मुकदमा चलाने की बात होती हैं तब हैरिस कोई उत्साह नहीं दिखाती।

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कमला हैरिस खुद को एक ब्लैक मानती है। उनकी बहन माया ट्विटर पोस्ट पर जब हैरिस को ओकटाउन की एक छोटी लड़की बताती है जो पहली अश्वेत महिला होते हुए भी एक प्रमुख पार्टी की उप राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार घोषित हो गई उसमे हैरिस के भारतीय मूल का कोई उल्लेख नहीं था। भारतीय सरकारों ने डेमोक्रेटिक प्रशासन के साथ काम करना अधिक जटिल और पेचीदा पाया है। डेमोक्रेट्स रिपब्लिकन की तुलना में अधिक कठिन हैं जो कुछ हद तक सिर्फ एक तरफा लेन-देन में यकीन रखते हैं।

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भारतीय प्रवासियों और हिन्दुस्तान के लोगो को कमला हैरिस के बारे में यह जान लेना चाहिए कि कमला हैरिस या उनकी भारतीय-हिंदू जड़ों को वो बहुत पहले छोड़ दी थी जब उन्होंने रंग और मौके की राजनीति में उतरने का फैसला किया था। कमला हैरिस एक राजनेता हैं और उनके भारतीय मूल के होने का दीवानापन चुनाव पर असर ना डाले इसके लिए भारतीय अमेरिकन वोटर्स को सतर्क रहना होगा। निश्चित ही वो एक ऐसी उप राष्ट्रपति नहीं चाहेंगे जो भारतीय संस्कारों के तहत मूर्ति पूजा करने वाले किसी इंसान को ‘डेविल ( शैतना ) वर्शिपर ‘कहती हो।

लेखक स्वतंत्र पत्रकार और राजनीतिक विष्लेशक हैं। वे नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान की पूर्व छात्रा हैं एवं सम-सामयिक मुद्दों पर लेखनी के माध्यम से समय-समय पर अपने विचार प्रकट करती रहती हैं।

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