Himachal Forest Fires: वन्य जीवों के खाने-पीने के लिए नहीं बचा कुछ

भीषण गर्मी की वजह से देश भर के कई राज्यों में जंगल आग की चपेट में आ गए हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान जंगलों में रह रहे वन्य प्राणियों को हो रहा है। उनके लिए खाने और पीने के संसाधन इस आग में नष्ट हो गए हैं। ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग में हमने देखा था कि कैसे कोआला और कंगारुओं को बचाने के लिए लोग आगे आ रहे थे। लेकिन (Himachal Forest Fires) हिमाचल के जंगलों में लग रही आग के बाद कोई भी इन वन्य प्राणियों के बारे में नहीं सोच रहा है।

हिमाचल प्रदेश का हाल हर साल यही होता है, लेकिन इस बार स्थिति बहुत बुरी है। एक दिन में औसतन 24 जंगलों में आग लग रही है। पिछले एख महीने में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 87 वर्ग किलोमीटर हिस्से में आग लगी है।

Himachal Forest Fires की बड़ी बातें-

हीट वेव के कारण इस वर्ष मार्च महीने में ही कई राज्यों में तापमान औसत से 5 डिग्री अधिक दर्ज किया गया।

  • हिमाचल में हर दिन 24 जंगल में आग की खबर आ रही है।
  • अकेले अप्रैल महीने में 645 फॉरेस्ट फायर के मामले सामने आए।
  • भीषण गर्मी के कारण तापमान बढ़ रहा है जो इस आग का सबब बन रहा है.
  • 645 मामलों में धर्मशाला सर्कल में 165 जगह से आग की खबर आई।
  • रामपुर सर्कल में 116
  • शिमला सर्कल से 89
  • मंडी से 83
  • चंबा से 63
  • 4976.63 hectares एरिया आग से प्रभावित हुआ जिसमें
  • 4006.91 hectares नैचुरल एरीया और
  • 927.72 hectares का plantations एरिया आग से तबाह हुआ।
  • ज्यादातर आग चीड़ और पाईन फोरेस्ट में लग रही है।
  • हिमाचल के टोटल फोरेस्ट कवर में 15 प्रतिशत हिस्सा चीड़ पाईन फोरेस्ट का ही है।
  • कुछ दिनों पहले तारा देवी फोरेस्ट में आग लगी जो दो से तीन दिन तक काबू में नहीं आई।
  • जिन जंगलों में आग लगी वहां वन्य प्राणियों के लिए खाने और पीने का कुछ नहीं बचा है।
  • अधिकारियों के मुताबिक इस वर्ष आग दो हफ्ते पहले ही शुरु हो गई क्योंकि तापमान बहुत अधिक हो गया है।
  • 9000 से अधिक फॉरेस्ट वॉलंटियर आग बुझाने के काम में लगे हुए हैं।
  • साथ ही आईटीबीपी और सेना की भी मदद ली जा रही है।
  • सैटेलाईट से जंगलों पर नज़र रखी जा रही है।
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ऐसे ही बढ़ता रहा तापमान तो क्या नष्ट हो जाएंगे आने वाले समय में सारे जंगल?

बताया जाता है कि हिमाचल के जिन जंगलों में आग लग रही हैं वहां ज्यादातर चीड़ पाईन के पेड़ हैं। पाईन नीडल हाईली इंफ्लेमेबल होती है। सरकार द्वारा राज्य में पाईन पॉलिसी भी बनाई गई है जो उद्यमियों को पाईन नीडल हटाने के काम में सब्सिडी प्रदान करती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि निचले इलाकों में लगे पाईन फोरेस्ट को ब्रॉड लीफ ट्री से रिप्लेस करना होगा। पाईन नीडल ज़मीन पर गिर जाता है जो काफी ज्वलन शील होता है इससे जंगल में आग तेज़ी से भड़क जाती है। गांव के लोग जंगलों से पाईन हटाने के काम में आगे भी आ रहे हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अनुसार 2018 में 2,469 फोरेस्ट फायर हुई जिसमें 25,300 हेक्टेयर जंगल जल गया। 2012-13 में 1,798 मामलों में 20,773 हेक्टेयर जंगल बर्बाद हुआ। और इस वर्ष भी स्थित बेहद ज्यादा खराब है।

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