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मोदी सरकार ने छात्रों को फिर थमाया ‘लॉलीपॉप’, 21 दिसंबर को हजारों रिसर्च फेलो का ‘हल्ला बोल’

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नई दिल्ली, 18 दिसंबर। देशभर के हजारों रिसर्च फेलो अपनी फेलोशिप की रकम नहीं बढ़ाई जाने से नाराज़ है। JNU, DU, HCU जैसे चोटी के विश्वविद्यालयों के अलावा IISER, IIT, AIIMS, IIM जैसे देश भर के तमाम संस्थानों के हजारों छात्र 21 दिसंबर को अपने-अपने संस्थानों के बाहर धरना प्रदर्शन के लिए तैयारी कर चुके हैं। 

हांलाकि डिपार्टमेंट ऑफ साइंस टेक्नोलॉजी के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने एक बयान जारी कर कहा है कि वे सरकार पर भरोसा रखें और इस तरह का कोई भी गलत कदम उठाने से बचें। उन्होंने कहा कि, सरकार फेलोशिप बढ़ाने की प्रकिया में काम कर रही है जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

1/3 I am happy to share that the process to be followed for the Fellowship hike is fully on track and nearing its end. @ResearchSchola6 @HikeFellowship @IndiaDST @PrinSciAdvGoI— Ashutosh Sharma (@Ashutos61) December 16, 2018

वहीं छात्र अब सरकार के इस तरह के ‘लॉलीपॉप’ रूपी आश्वसान को पूरी तरह समझ चुके हैं। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि सरकार बीते कई महीने से सिर्फ कोरा आश्वासन ही दे रही है लेकिन हमें अब तक इसके कोई परिणाम देखने को नहीं मिले हैं।

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इस पूरे मामले में रिसर्च फेलो की ओर से All India Research Fellow Society के अध्यक्ष और पीएचडी कर रहे लाल चंद ने कहा कि, हम बीते कई महीनों से रिसर्च फेलो देश भर के तमाम रिसर्चस की फेलोशिप बढ़ाने के लिए सरकारी तंत्र में फंसे हुए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तमाम आला अधिकारियों और मंत्रियों से भी मिल चुके हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।    

बता दें कि नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट/NET), ग्रेजुएट एप्टीट्यूट टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट/GATE) सहित कई अन्य परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले युवाओं को यूजीसी सहित कई अन्य एजुकेशन फंडिग एजेंसी से मिलने वाली फेलोशिप बीते चार वर्षों से नहीं बढ़ी है। बीते चार सालों में महंगाई का स्तर भले ही कई गुना बढ़ गया हो लेकिन ये रिसर्चर आज भी पुराने मानदेय और भत्ते पर अपना गुजारा कर रहे हैं।

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फेलोशिप के तहत मिलने वाली राशि और भत्ता सहित अपनी तमाम मांगों को लेकर देशभर के कई रिसर्च फेलो लैब और इंस्टिट्यूट से निकल सड़कों पर उतर आंदोलन करने के लिए मजबूर हैं। हांलाकि यह पहला मौका नहीं है जब देश भर के लाखोंं जूरनियर रिसर्च फेलो और सीनियर रिसर्च फेलो मानदेय बढ़ाने के लिए इस तरह अपनी आवाज बुलंद कर रहे हो।

इससे पहले फेलोशिप के तहत मिलने वाली राशि और भत्ता बढ़ाने के लिए साल 2014 में भी कुछ इसी तरह हजारों रिसर्च फेलो ने आंदोलन कर सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया था। शायद यही कारण है कि सरकार अब तक ऐसी कोई पॉलिसी नहीं ला पाई है जिससे बिना आंदोलन के ही इन रिसर्चर्स की आवाज सुनी जाए।

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