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Hike Fellowship : Research Scholars से समझिये क्यों बढ़ना चाहिये फेलोशिप, देखें VIDEO

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नई दिल्ली, 18 जनवरी। पिछले चार वर्षों से फेलोशिप नहीं बढ़ने से नाराज देशभर के रिसर्च स्कॉलर्स अपना शोधकार्य छोड़ लैब से बाहर निकल सड़कों पर आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और हड़ताल करने को मजबूर हैं। रिसर्च स्कॉलर्स का कहना है कि बीते चार साल में महंगाई का स्तर कई गुना बढ़ा है लेकिन हमारी फेलोशिप की रकम में एक रुपये की भी बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।

16 जनवरी को MHRD पर हुए आंदोलन के दौरान एक रिसर्च स्कॉलर ने ग्राउंड रिपोर्ट से बात चीत में कहा कि, सीनियर रिसर्च फेलो को 36,000 रुपये मिलते हैं। इतने में हमे अपना शोध कार्य भी देखना, खुद के निजी खर्चे, और परिवार जरूरतों को भी पूरा करना है। इतने रुपये में ये सब कर पाना संभव नहीं है, जबकि केन्द्र सरकार सरकारी कर्माचारियों के 7वां वेतन आयोग लाई और उसे लागू भी कर दिया लेकिन हम लोग की स्थिति जस की तस है।
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उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में नई सरकार आएगी नया बजट आएगा इस पूरी प्रोसेस में एक साल से भी ज्यादा का वक्त लग जाएगा। हम पहले ही 6 महीनों से भी ज्यादा समय से इंतजार कर रहे हैं। फेलोशिप करीब 7 महीने पहले ही बढ़ जानी थी लेकिन अब तक सिर्फ आश्वसान ही मिल रहे हैं।

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वहीं एक अन्य शोधार्थी ने कहा कि, सरकार एक ऐसा नियम लेकर आए जिससे केन्द्रीय कर्मचारियों की तरह हर साल हमारी भी फेलोशिप बढ़े। फिलहाल हमे जो फेलोशिप मिल रही है वह भी समय से नहीं आती। कभी 3 महीने तो कभी 6 महीने की देरी से फेलोशिप आती है।

बता दें कि, 16 जनवरी को फेलोशिप की मांग करने देश भर के शोधार्थी नई दिल्ली स्थित मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सामने धरना प्रदर्शन करने पहुंचे थे। जहां पुलिस ने इनके साथ बदसलूकी कर इन्हें जेल में डाल दिया था, जिसके बाद रिसर्च स्कॉलर्स ने इसे अनुसंधान के लिए काला दिवस बताया था।

रिसर्च फेलो की प्रमुख मांग-
1) जेआरएफ, एसआरएफ, पीएचडी कर रहे लोगों की फेलोशिप की रकम 20 फीसदी प्रतिवर्ष के हिसाब से 80 फीसदी बढ़ाई जाए। क्योंकि यह हर चार वर्ष में एक बार बढ़ती है।

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2) फेलोशिप के तहत मिलने वाली यह रकम हर महीने समय पर आए, क्योंकि अब तक यह रकम कभी तीन महीने, छह महीने या कभी 8 महीने गुजर जाने के बाद मिलती है।

3) सरकार वेतन आयोग के तहत ऐसी गाइडलाइन बनाए जिससे यह तय हो कि फेलोशिप के तहत करने वाले रिसर्चर्स को हर महीने समय पर फेलोशिप की रकम मिले।

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