Hike fellowship : rsesearch scholars protest at mhrd demands Hike fellowship delhi police misbehavs, prime minister says jai anusandhan, but MHRD minister prakash javadekar and secretory subramanyam has no time for research scholars, a medical research scholar from aiims new delhi protest at mhrd demands hike in fellowship (pic : komal badodekar)

Hike Fellowship : MHRD पर हुए आंदोलन की ये तस्वीरें बताती हैं कि PM मोदी का नारा ‘जय अनुसंधान’ एक जुमला है!

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कोमल बड़ोदेकर | नई दिल्ली

एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषण में ‘जय-अनुसंधान’ का नारा देते हुए अनुसंधान की उपलब्धियां गिनाते हैं। वहीं दूसरी ओर अनुसंधान के छात्र अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतरते हैं। सरकार कैसे इन शोधार्थियों और उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण और बुनियादी जरूरतों को दरकिनार करते हुए विश्वगुरू बनने का सपना देख सकती है।

मामला फेलोशिप में वृद्धि की मांग का है। जहां बीते 7 महीनों से सरकारी दफ्तरों और मंत्रालयों के चक्कर काटने के बाद भी जब देश भर के रिसर्च स्कॉलर्स को सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा तो डेडलाइन के बाद छात्र शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करने दिल्ली पहुंचे।

MHRD नई दिल्ली पर हुए शोधार्थियों के आंदोलन के दौरान एक पोस्टर शोध के जरिये भारत के भविष्य को संवारने की बात को बखूभी दर्शाता है। (Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)

बता दें कि, पीएम मोदी 3 जनवरी को जालंधर में आयोजित 106वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस में ‘भविष्य का भारत: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी’ विषय पर संबोधन देते हुए अनुसंधान की खासियत बताई और जय अनुसंधान का नारा दिया, लेकिन 16 जनवरी को अनुसंधान के छात्रों के साथ पुलिस की बदसलूकी और सरकार चुप्पी बताती है कि जय अनुसंधान एक जुमला मात्र है।

एक अन्य पोस्टर : रात दिन एक करके मेहनत करते हैं हम, इतना सा फेलोशिप देके मजाक क्यूं करते हो।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
इस पोस्टर के जरिए समझा जा सकता है कि UGC, MHRD, DST और CSIR जैसी संस्थाएं मजा लूट रही है, जबकी शोधार्थी कम फेलोशिप में बैलों की तरह काम कर रहे हैं।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
इस बीच वाले पोस्टर से समझिये कि चार सालों में महंगाई तेजी से बढ़ी है लेकिन फेलोशिप समान है।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
शोध की यह छात्रा एक पोस्टर लिए खड़ी है, जिसमें बताया जा रहा है कि हमारे देश की ग्रोथ कैसी है। 3,000 करोड़ रुपये की मूर्ति बनाई गई लेकिन शोधार्थियों की हालत बदतर है।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
एक अन्य तस्वीर और पोस्टर, MHRD शर्म करो।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
क्या फेलोशिप में वृद्धि एक जुमला मात्र है?
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
अपने हक की लड़ाई के दौरान आंदोलित और गुस्सा जाहिर करता एक रिसर्च स्कॉलर।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
जितनी बड़ी डिग्री, उतनी कम कीमत।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
बेहतर जिंदगी की उम्मीद में पोस्टर के साथ रिसर्च स्कॉलर्स।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
रिसर्च स्कॉलर्स के लिए राष्ट्रव्यापी काला दिवस।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
इस ग्रुप की एक आवाज, एक नारा, फेलोशिप में बढ़ोत्तरी हो 80 प्रतिशत।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
अपनी मांगो को लेकर सड़क पर धरना प्रदर्शन और गुस्सा जाहिर करते शोधार्थी।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
अपनी आवाज़ की गूंज से MHRD और सो रही सरकार को जगाने की कोशिश।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
इस पोस्टर के मुताबिक, क्या सारा पैसा सिर्फ मूर्ति निर्माण के लिए है, शोधार्थियों के लिए कुछ नहीं।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
देश का सबसे बेहतर दिमाग लेब की जगह सड़कों पर हैं। विज्ञान हमारा पेशन है और पैसा जरूरत।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
आश्वासन से पेट नहीं भरता, पैसों के बिना चूल्हा नहीं जलता।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
मजबूती के साथ फेलोशिप में वृद्धि मांग करते हुए एक शोध छात्रा।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
हम रोज काम करने वाले कामगार मज़दूर नहीं, शोधार्थि हैं।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
देश के शोधार्थी जब एक साथ प्रदर्शन करने सड़क पर उतरे तो उन्हें कंट्रोल करने में पुलिस के पसीने छूट गए।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
आंदोलन और शोधार्थियों की एकजुटता की एक अन्य तस्वीर।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
आप हमें फेलोशिप में हाइक दें हम आपको नोबेल प्राइज देंगे।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
शोध छात्र का यह अपमान नहीं सहेगा हिन्दुस्तान।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
आंदोलन स्थल पर खड़ी ये वाटर केनन वेन बताती है कि, आंदोलन को खत्म करने के लिए वाटर केनन का इस्तेमाल भी कर सकती थी पुलिस।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
देश के सबसे ‘बेस्ट माइंड’ खदेड़ने के लिए सरकार ने तैनात करवाई भारी संख्या में पुलिस।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया नारा – जय जवान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान। इसके बावजूद अनुसंधान छात्र सड़कों पर उतरे हैं।
(Hike Fellowship : Protests at MHRD new delhi by Research scholars (Pic : Komal Badodekar)

इन तस्वीरों से शायद आपको समझ आ गया होगा कि सरकार का नारा जय अनुसंधान फिलहाल साकार रूप लेता नहीं दिख रहा है। अनुसंधान के छात्रों को फेलोशिप में वृद्धि सहित अपनी अन्य मांगों के लिए हर बार की तरह इस बार भी सड़कों पर उतरना पड़ा है।

रिसर्च फेलो की प्रमुख मांग-
1) जेआरएफ, एसआरएफ, पीएचडी कर रहे लोगों की फेलोशिप की रकम 20 फीसदी प्रतिवर्ष के हिसाब से 80 फीसदी बढ़ाई जाए। क्योंकि यह हर चार वर्ष में एक बार बढ़ती है।

2) फेलोशिप के तहत मिलने वाली यह रकम हर महीने समय पर आए, क्योंकि अब तक यह रकम कभी तीन महीने, छह महीने या कभी 8 महीने गुजर जाने के बाद मिलती है।

3) सरकार वेतन आयोग के तहत ऐसी गाइडलाइन बनाए जिससे यह तय हो कि फेलोशिप के तहत करने वाले रिसर्चर्स को हर महीने समय पर फेलोशिप की रकम मिले।