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Hike Fellowship : पुणे के NCL, IISER, SPU और NCCS के रिसर्च स्कॉलर्स का संयुक्त विरोध प्रदर्शन

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पुणे, 19 जनवरी। कम फेलोशिप पर बीते चार वर्षों से शोध कार्य कर रहे देश भर के रिसर्च स्कॉलर अब सड़कों पर आंदोलित हैं। फेलोशिप में वृद्धि की मांग पर सैकडों रिसर्च स्कॉलर्स ने पैदल मार्च निकाल सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया। इस मामले में पुणे के NCL से पीएचडी कर रहे रिसर्च स्कॉलर रवि रंजन ने बताया कि, 18 जनवरी को NCL के रिसर्च स्कॉलर्स ने दिल्ली में 16 जनवरी को हुई रिसर्च स्कॉलर्स की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए आंदोलन किया। यह आंदोलन का तीसरा दिन था।

उन्होंने बताया कि, इस दौरान रिसर्च स्कॉलर्स ने NCL के डायरेक्टर अश्विनी कुमार नागिया को ज्ञापन सौंपा, जिसके बाद डायरेक्टर नागिया ने आश्वासन और सहानुभूति जताते हुए उन्होंने रिसर्च स्कॉलर्स की मांग को महज आधे घंटे के भीतर ही संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया। बता दें कि इससे पहले सैंकड़ो रिसर्च स्कॉलर्स ने बीती 16 जनवरी को राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत पुणे विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन किया था।

यह बात भी ध्यान देने वाली है कि, देश भर के रिसर्च स्कॉलर्स की फेलोशिप में पिछले चार वर्षों से वृद्धि नहीं की गई है। जबकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘जय अनुसंधान’ का नारा बुलंद कर भारत को विश्वगुरू बनाने की बात कह रहे हैं। देश भर के रिसर्च स्कॉलर्स अब इस आंदोलन के जरिए सरकार से फेलोशिप बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

इससे पहले रिसर्च स्कॉलर्स की राष्ट्रीय प्रतिनिधियों की टीम केन्द्रीय मानव संसाधन और विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और अन्य अधिकारियों को इस मामले में ज्ञापन दे चुके हैं लेकिन तय समय सीमा से भी कई दिन बीत जाने के बाद जब फेलोशिप नहीं बढ़ी तो रिसर्च स्कॉलर्स ने 16 जनवरी को राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ दिया।

अब रिसर्च स्कॉलर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। आज यानी 19 जनवरी को इस आंदोलन का चौथा दिन है। जहां देश भर के संस्थानों और विश्वविद्यालयों के कैंपस में हर दिन रिसर्च स्कॉलर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में IISER पुणें कैंपस में रिसर्च स्कॉलर्स कैंडल मार्च विरोध प्रदर्शन करेंगे।

रिसर्च फेलो की प्रमुख मांग-
1) जेआरएफ, एसआरएफ, पीएचडी कर रहे लोगों की फेलोशिप की रकम 20 फीसदी प्रतिवर्ष के हिसाब से 80 फीसदी बढ़ाई जाए। क्योंकि यह हर चार वर्ष में एक बार बढ़ती है।

2) फेलोशिप के तहत मिलने वाली यह रकम हर महीने समय पर आए, क्योंकि अब तक यह रकम कभी तीन महीने, छह महीने या कभी 8 महीने गुजर जाने के बाद मिलती है।

3) सरकार वेतन आयोग के तहत ऐसी गाइडलाइन बनाए जिससे यह तय हो कि फेलोशिप के तहत करने वाले रिसर्चर्स को हर महीने समय पर फेलोशिप की रकम मिले।