Hike Fellowship : IIT मद्रास की PhD रिसर्च स्कॉलर ने लगाई फांसी!

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चेन्नई, 2 जनवरी। बीते कुछ सालों से कम फेलोशिप के चलते अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही आईआईटी मद्रास की रिसर्च स्कॉलर रंजना कुमार ने कैंपस स्थित होटल में कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। झारखंड की रहने वाली रंजना IIT मद्रास से धातु विज्ञान डिपार्टमेंट से पीएचडी कर रही थी।

घटना मंगलवार 1 जनवरी की है। हांलाकि पुलिस जांच में फांसी लगाने के कारण अब तक सामने नहीं आए हैं न ही छात्रा के रूम से कोई सुसाइड नोट मिला है। लेकिन करीबी दबी आवाज में इस बात को कह रहे हैं कि छात्रा रंजना पिछले कई दिनों से आर्थिक तंगी से जूझ रही थी और उसकी फेलोशिप भी समय पर नहीं आ रही थी।

बता दें कि देश के प्रीमियर संस्थानों में से एक IIT मद्रास में बीते कुछ सालों में सुसाइड के कई मामले सामने आ चुके हैं। बीते साल सितंबर महीने में IIT मद्रास से पढ़ाई कर रहे 23 वर्षीय केरल के रहने वाले शहुल कोरनाथ ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

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बता दें कि पिछले कई महीनों से रिसर्च स्कॉलर, सरकार से फेलोशिप में वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार का उदासीन रवैया ही देखने को मिला है। नए साल में IIT मद्रास की रिसर्च स्कॉलर की कथित तौर पर आत्महत्या शोधार्थियों की फेलोशिप की मांग को कितना तेज करता है और इस पर सरकार का क्या रुख होगा, यह देखना होगा।

बता दें कि बीते दिनों IIT के दिल्ली, मद्रास, खड़गपुर और IIT रुढ़की सहित अन्य कैंपस, IISER कोलकाता, ACTREC, IISER पुणे, बीएचयू, AIIMS नई दिल्ली सहित देश भर के तमाम संस्थानों में रिसर्च स्कॉलर्स ने मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज करवाया था।

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रिसर्च फेलो की प्रमुख मांग-
1) जेआरएफ, एसआरएफ, पीएचडी कर रहे लोगों की फेलोशिप की रकम 20 फीसदी प्रतिवर्ष के हिसाब से 80 फीसदी बढ़ाई जाए। क्योंकि यह हर चार वर्ष में एक बार बढ़ती है।

2) फेलोशिप के तहत मिलने वाली यह रकम हर महीने समय पर आए, क्योंकि अब तक यह रकम कभी तीन महीने, छह महीने या कभी 8 महीने गुजर जाने के बाद मिलती है।

3) सरकार वेतन आयोग के तहत ऐसी गाइडलाइन बनाए जिससे यह तय हो कि फेलोशिप के तहत करने वाले रिसर्चर्स को हर महीने समय पर फेलोशिप की रकम मिले।

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