उच्च शिक्षा से जुड़े यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं और वे यूनिवर्सिटी बंद करने की वकालत करते हैं

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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

हिंदुस्तान टाईम्स की एक रिपोर्ट में भारत में उच्च शिक्षा की दुर्दशा के आंकड़े सामने आए हैं। इसके अनुसार देश की एक बड़ी आबादी आज़ादी के 70 साल बाद भी उच्च शिक्षा और अच्छी शिक्षा से बहुत दूर खड़ी है। हाल ही में जेएनयू में जब सस्ती शिक्षा के आंदोलन हुआ तो कई विद्वानों और सरकार के मंत्रियों ने जेएनयू को कुछ समय के लिए बंद करने तक की वकालत कर दी ये वो लोग हैं जिनके खुद के बच्चे प्राईवेट कॉलेजों में तगड़ी फीस देकर पढ़ाई करते हैं और गरीबों के बच्चों को ये पढ़ाई से वंचित रखना चाहते हैं। हम आपको बताते हैं यह रिपोर्ट क्या कहती है।

1.एनएसओ के आंकड़ों के मुताबिक 15 वर्ष से अधिक आयु के केवल 10.6 फीसदी लोगों ने सफलतापूर्वक स्नातक की डिग्री पूरी की है। ग्रामीण भारत में यह केवल 5.7 प्रतिशत है।

2.सामाजिक रुप से पिछड़े वर्गों में स्नातक और उच्चतर डिग्रीधारकों की संख्या तुलनात्मक रुप में बहित कम है। मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति के हिंदूओं की तुलना में और खराब है। इस खाई के भरने में अभी और समय लग सकता है।

3.लैंगिक आधार पर भी उच्च शिक्षा ग्रहण करने में काफी अंतर दिखाई पड़ता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं द्वारा उच्च शिक्षा पाने के आंकड़े निराशाजनक बने हुए हैं।

4.आर्थिक रुप से पिछड़े वर्ग द्वारा शिक्षा ग्रहण करना भी चुनौती बना हुआ है। महंगी होती शिक्षा और रोज़गार की कमी की वजह से उच्च शिक्षा पाने में लोगों की दिलचस्पी कम हुई है। देश के 67 फीसदी श्रमिकों की वार्षिक आय 1 लाख 20 हजार से कम है जबकि उच्च शिक्षा पर औसत खर्च 10 हज़ार से लेकर 72 हज़ार सालाना बैठता है। ऐसे में देश की बड़ी आबादी उच्च शिक्षा से दूर हो रही है।

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5.एनएसओ की रिपोर्ट बताती है कि 3 से 35 वर्ष की आयु में 15 फीसदी पुरुषों ने और 14 प्रतिशत महिलाओं ने आर्थिक तंगहाली की वजह से किसी भी शैक्षणिक संस्थान में दाखिला नहीं लिया। ऐसे में किसी भी विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी के समय गरीब तबके के बारे में क्यों नही सोचा जाता।

6.अगर हम श्रमिकों को संख्या के आधार पर देखें तो 62 फीसदी श्रमिक स्नातक डिग्री धारक हैं यानि बिना स्नातक डिग्री लिए नौकरी पाना देश में आसान नहीं है।

7.शिक्षितों में बेरोज़गारों की संख्या अधिक है। यह एक चिंता का विषय है क्योंकि इससे शिक्षा के प्रति आकर्षण कम होता है। लोगों ने नौकरी करने से बेहतर कम पढ़कर स्वरोजगार की तरफ ज़्यादा रुख किया है।

8. गुणवत्ता वाली शिक्षा ही बेहतर रोज़गार के अवसर पैदा करती है लेकिन इसके लिए लोगों को बड़े शहरों में स्थित यूनिवर्सिटी का रुख करना पड़ता है। अगर वहां भी शिक्षा महंगी हो जाएगी तो देश का युवा कहां जाएगा।

9.उच्च शिक्षा की सुविधा देश के 10 प्रतिशत जिलों में ही ज्यादा केंद्रित हो गया है। इन्ही जिलों में देश भर के 30 प्रतिशत कॉलेज स्थित हैं। इनमें से अधिकांश पश्चिम और दक्षिण भारत में है। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि देश में उच्च शिक्षा के ढांचे पर सरकार काम क्यों नही करती।

900
विश्वविद्यालय हैं देश में
39930
से ज्यादा कॉलेज हैं
10720
एकल शिक्षा संस्थान हैं
380
निजी विश्वविद्यालय हैं
390
यूनिवर्सिटी ग्रामीण क्षेत्र में
10
महिला विश्वविद्यालय हैं
सेंट्रल ओपन यूनिवर्सिटी
10
स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी
140
तकनीकी यूनिवर्सिटी
50
मेडिकल यूनिवर्सिटी

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