Home » Holi 2019 : दो छोटे बच्चों की इन बातों को सुनकर याद आया आज होली है…

Holi 2019 : दो छोटे बच्चों की इन बातों को सुनकर याद आया आज होली है…

happy holi 2019 : feature story on holi holika dahan
Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

नन्दिनी राजौरिया –

“मुझे तो नीला कलर ही पसंद है…मुझे वही चाहिए।”
“अरे पीला ले ले। आमिर खान कहता है-‘दूर से ही फोकस मारेगा। “पानी वाले गुब्बारे बहुत सारे लेना।”
“अरे मैं तो भूल ही गया…छोटी के लिए पिचकारी भी तो लेनी है। जल्दी घर चल… माँ गुझिया भी तो बना रही हैं…. घर पहुंच कर भोग भी तो लगाना है।”

दो छोटे बच्चों की इन बातों को सुनकर मुझे याद आया कि होली आने वाली है। मोबाइल कैलेंडर देखा तो पता चला कि सिर्फ दो दिन बाद ही होली है। अफ़सोस! जहां हफ़्तों पहले से हल्ला-गुल्ला शुरू हो जाता था, होली कब है, यह जानने के लिए गब्बर सिंह के डॉयलाग की नकल होने लगती थी। वहीं आज आस-पास इतना सन्नाटा!! कोई तैयार ही नहीं है होली खेलने को!

अगर वे बच्चे रंगों का जिक्र न कर रहे होते तो शायद मुझे भी इस त्योहार का पता भी नहीं चलता। हाँ, इतना ज़रूर होता कि छुट्टी मिल जाती और सोशल मीडिया पर कुछ स्टेटस डाल दिए जाते यह जताने को कि होली है। लेकिन… इस होली को महसूस करने के लिए रंगों की जो मौजें जरूरी हैं, शायद उनका लुत्फ नहीं उठा पाती।

READ:  LNCT Bhopal: एलएनसिटी यूनिवर्सिटी में नेशनल फिजियोथैरेपी कॉन्फ्रेंस, 400 से ज्यादा स्टूडेंट हुए शामिल

प्रिंट और सोशल मीडिया में ये ‘नसीहतें’ जरूर दी जाती हैं कि पानी की बार्बादी रोकने के लिए अबीर-गुलाल की होली खेलें। लेकिन जब मैंने इन बच्चों को पानी के गुब्बारे के साथ खेलते देखा तो लगा कि क्या हुआ अगर इतना-सा पानी खर्च हो भी गया तो! त्योहार तो हमारी भावना से जुड़े हुए होते हैं और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का सबका अपना तरीका होता है। जैसा कि इन बच्चों का था।

अब त्योहार मात्र अवकाश बन कर रह गये हैं। ऐसे अवकाश-दिवस जब आदमी अपनी थकान मिटाता है, अपनी बोरियत-भरी लाइफ को रिलैक्स देता है और इंजॉय करता है! शुक्र है कि बड़ों में न सही, कम से कम बच्चों में तो त्योहार आज भी जिंदा है।

लेकिन बच्चों, होली का मतलब सिर्फ रंग लगाना और पानी बहाना नहीं होता। इसका मतलब है आपसी प्रेम और एकता। इस भाव को व्यक्त करने के लिए रंग लगाना जरूरी है तो बेशक रंगों से होली खेलें। लेकिन ध्यान रहे किसी पर भी जबरन रंग न लगाएं।

READ:  Gurugram residents started singing bhajans to counter namaz in open

पानी का इस्तेमाल तो करें, लेकिन बेजा इस्तेमाल बिलकुल न करें। अपनी जरूरत के हिसाब से पानी लें और खूब खेलें, क्योंकि आप जैसे बच्चों को देखकर ही तो होली, होली जैसी लगती है। इस किताबों की दुनिया में अपने बचपन को मत खोने दें।

होली के दिन अपनी पिचकारी से इस ब्लैक एंड व्हाइट दुनिया को रंगीन बना दो और अपनी खिलखिलाती हंसी से आस-पास का माहौल महका दो। रंगों का यह त्योहार रंगीन तो बना रहना ही चाहिए न!

Tags: