किसान आंदोलन पर NDA में दरार, अब इस नेता ने दिखाई मोदी को आंख

कौन हैं हनुमान बेनीवाल
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किसान आंदोलन पर मोदी सरकार अलग-थलग पड़ती दिखाई दे रही है। तीन नए कृषि कानूनों का विरोध देश भर में तेज़ होता जा रहा है। पंजाब और हरियाणा में आंदोलन का सबसे ज़्यादा असर है इसके चलते पंजाब में अकाली दल भाजपा से पहले ही नाता तोड़ चुकी है। अब एनडीए (NDA) के एक और सहयोगी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने ऐलान किया है कि किसान आंदोलन के समर्थन में 26 दिसंबर को उनकी पार्टी दो लाख किसानों को लेकर राजस्थान से दिल्ली मार्च करेगी। बेनीवाल ने यह भी कहा कि उसी दिन यह भी फैसला लिया जाएगा कि अब NDA में रहना है या नहीं।

कौन हैं हनुमान बेनीवाल?

हनुमान बेनीवाल राजस्थान के नागौर से सांसद हैं और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हैं जो की केंद्र में एनडीए की सहयोगी पार्टी है। वो जानेमाने जाट नेता हैं। राजस्थान के नागोर और बारमेर क्षेत्र में उनका अच्छा खासा दबदबा है। जाट समुदाय में खासकर युवाओं का उन्हें अच्छा खासा सपोर्ट है। शनिवार को हनुमान बेनीवाल ने तीनों कृषि कानूनों का विरोध करते हुए संसद की स्टैंडिंग कमेटी से इस्तीफा दे दिया। अब उन्होंने ऐलान किया है कि वो इन कानूनों का खुल कर विरोध करेंगे। जल्द ही बेनीवाल 2 लाख किसानों को लेकर दिल्ली कूच करने वाले हैं।

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हनुमान बेनीवाल ने कहा कि दिल्ली में बैठी सरकार किसान आंदोलन को दबाना चाहती है। अपनी पार्टी से बातचीत के बाद हमने तय किया है 26 दिसंबर को हम शाहजहांपुर बॉर्डर से होते हुए दिल्ली की ओर 2 लाख जवान और किसान के साथ कूच करेंगे। हम केंद्र सरकार के किसानों को खत्म करने की नीति को सफल नहीं होने देंगे।

टूटता एनडीए

किसान आंदोलन की वजह से अब एनडीए में भी फूट पड़ती जा रही है। पंजाब में अकाली दल पहले ही एनडीए का साथ किसान आंदोलन की वजह से छोड़ चुकी है। हरियाणा में भी दुष्यंत चौटाला पर किसानों का दबाव बढ़ता जा रहा है। दुष्यंत के सहयोग से ही हरियाणा की खट्टर सरकार को बहुमत है। अगर वो भी एनडीए छोड़ने का फैसला लेते हैं तो राज्य में सरकार गिरने की संभावना बन सकती है। हाल ही में बीजेपी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे बीरेंद्र सिंह भी किसान आंदोलन के समर्थन में उतर आए हैं।

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किसान आंदोलन पर आगे क्या?

किसान आंदोलन बहुत तेज़ी से पूरे देश में फैल रहा है। जैसे-जैसे किसानों को नए कानूनों की सच्चाई पता चल रही हैं वे आंदोलन के लिए आगे आ रहे हैं। विरोध के स्वर अब देश के हर राज्य में सुनाई देने लगे हैं। मध्यप्रदेश, राज्स्थान, छत्तीसगड़, पंजाब, यूपी, हरियाणा, हिमाचाल के किसान आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। दिल्ली में किसानों का हुजूम बढ़ता ही जा रहा है। कई किलोमीटर तक किसान ही किसान दिखाई दे रहे हैं। यह किसान लंबे समय तक आंदोलन जारी ऱखने की तैयारी के साथ दिल्ली आए हैं।

सरकार ने किसानों के साथ बातचीत बंद कर दी है। सरकार किसी हाल में अपने कानून वापस लेने को तैयार नहीं है ऐसे में अब केवल सुप्रीम कोर्ट ही आगे की दिशा तय कर सकता है।

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