Home » उनके नाम खत, जो हागिया सोफिया को मस्जिद में बदले जाने पर सेक्युलरिज्म के खिलाफ उग्र हैं

उनके नाम खत, जो हागिया सोफिया को मस्जिद में बदले जाने पर सेक्युलरिज्म के खिलाफ उग्र हैं

हागिया सोफिया मस्ज़िद
Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

तुर्की में जब से हागिया सोफिया म्यूजियम को मस्जिद में बदला गया है देश का सावरकरवादी धड़ा सेक्युलर विचारों और भारतीय मुसलमानों के खिलाफ उग्र है। क्योंकि कुछ भारतीय मुसलमानों ने तुर्क राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के ‘साहस’ की तारीफ कर दी। कुछ को अर्दोआन में खलीफा दिखने लगा, जैसे हमारे प्रधानमंत्री में उनके चाहने वालों को भगवान विष्णु का अवतार दिखता है।

Priyanshu | Opinion

सावरकरवादी कह रहे हैं कि भारत में लोकतंत्र और सेक्युलरिज्म उनके कारण है क्योंकि सऊदी, कतर, कुवैत, ईरान, इराक, सीरिया, बहरीन जहां भी मुसलमानों की संख्या दूसरों से अधिक है, वहां लोकतंत्र नहीं, सेक्युलरिज्म नहीं, बोलने की आजादी नहीं, अदालतें शरिया कानून से चलती हैं।

पिछला खत हागिया सोफिया को मस्जिद में बदलने पर, अर्दोआन को बधाई देने वालों के नाम था, यह खत सावरकरवादियों के लिए है।

उनके नाम खत, जो हागिया सोफिया को मस्जिद में बदले जाने पर खुश हैं

डियर फ्रेंड, राम-राम। माफ करना, मेरे ‘राम’ आप वाले ‘जय श्री राम’ से अलग हैं। आपने राम नाम को जितना कलंकित किया है उतना कलंकित ‘ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी’ वाली चौपाई ने भी नहीं किया होगा। खैर ये बताइए, आपको जब भी भारतीय मुसलमानों को नीचा दिखाना होता है सऊदी को बीच में क्यों ले आते हैं।

और अगर लाते भी हैं तो सऊदी और दूसरी मुस्लिम कंट्रियों की तुलना सेक्युलर भारत से क्यों करने लगते हैं। उसी सेक्युलरिज्म से तुलना जिसे आप पश्चिम से आयातित मानते हैं, वही सेक्युलरिज्म जिसे आप उखाड़ फेंकना चाहते हैं, वही सेक्युलरिज्म जिसे मानने वालों की आप शेखुलर और सिकुलर कहकर दिन-रात खिल्ली उड़ाते हैं।

READ:  Syed Isaaq, a librarian who is waiting for his library

सऊदी के अपराधों से तुलना करनी है तो सेक्युलर भारत से मत कीजिए। आडवाणी जी की रथयात्रा से कीजिए, बाबरी विध्वंस से कीजिए, गुजरात राइट्स से कीजिए, अखलाक और पहलू खान की हत्या से कीजिए, सीएए-एनआरसी से कीजिए, कपिल मिश्रा के नारों से कीजिए। एक भारत ये भी तो है, आपके सपनों का भारत, आपका कम्युनल भारत।

इस्तांबुल के ऐतिहासिक हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम के दोबारा मस्जिद बनने की कहानी

आखिर क्यों नहीं करते अपनी उपलब्धियों से तुलना, क्योंकि आपकी निगाह में इब्ने सऊद (सऊदी के संस्थापक) का देश बर्बर है, लेकिन उतना ही बर्बर देश बनाने की तमन्ना आपके दिल में भी है लेकिन उसे स्वीकार करने का आप में साहस नहीं। आपको उन समर्थकों के छिटकने का डर है जिनसे आपने कोई अलग ही यूटोपिया बनाने का वादा किया है।

लोकतांत्रिक-सेक्युलर भारत न आपकी उपलब्धि है और न आप इसके संरक्षक हैं। आपको जहां भी मौका मिला है, आपने इसे शर्मसार ही किया है, इसकी जड़ों पर मट्ठा डाला, खोखला किया है।

संविधान को आपने माना ही कब, आप तो आजादी के पहले दिन से मनुस्मृति लिए घूम रहे हैं। यह बात दूसरी तरफ के रूढ़िवादियों पर जितनी लागू होती, उतनी ही आप पर होती है। एक धार्मिक व्यक्ति के रूप में अगर आपका बर्ताव दूसरे धर्म के व्यक्ति या धर्म को न मानने वालों में भय पैदा करता है, तो यकीन मानिए आप गलत रास्ते पर हैं।

READ:  High risk of climate change: 33 countries, including India in list

दोस्त, आपकी और रेचेप तैय्यप अर्दोआन की सोच एक जैसी है।

( यह लेखक के निजी विचार हैं। लेखक भारतीय जन संचार संस्थान नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं एवं समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार लिखते रहते हैं।)

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।