हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम

इस्तांबुल के ऐतिहासिक हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम के दोबारा मस्जिद बनने की कहानी

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने इस्तांबुल के ऐतिहासिक हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम को दोबारा मस्जिद में बदलने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस्तांबुल के ऐतिहासिक हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम को दोबारा मस्जिद में बदलने के फैसले के बाद दुनियाभर में इसको लेकर बहस शुरू होती दिख रही है। ख़ासकर योरोप में इस फैसले के बाद नाराज़गी देखी जा रही है।

900 साल तक चर्च, 500 साल मस्जिद, 86 साल म्यूज़ियम रहने वाली ये ख़ूबसूरत इमारत ‘हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम’ एक बार फिर से मस्जिद में तब्दील कर दी गई है। हालांकि, इससे पूर्व तुर्की की एक अदालत ने इस इमारत को म्यूज़ियम से मस्जिद में बदलने के फैसले की अढ़चन को समाप्त कर दिया था। 1934 के फैसले को रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि हागिया सोफिया की इमारत अब म्यूज़ियम की शक्ल में नही रहेगी।

तुर्की के इस्ताबुंल शहर में बनी यह इमारत इतनी भव और ख़ूबसूरत है कि दुनियाभर से लोग इसे देखने और इस इमारत के दिलचस्प क़िस्से सुनने जाया करते हैं। 1500 साल पुरानी इस इमारत को लेकर एक बार फिर बहस शुरू होती दिख रही है।

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तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन ने चुनाव में वादा किया था कि अगर वो फिर से जीतकर पहुंचे तो हागिया सोफ़िया को वापस मस्जिद में तब्दील कर देंगे। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा और कई दिनों की ज़िरह के बाद अदालत ने इसे मस्जिद में तब्दील करने का फ़ैसला सुना दिया। अदालत के फैसले के बाद दुनियाभर में इसको लेकर बहस शुरू हो गई है।

क्या है हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम का इतिहास?

बात अगर इस ख़ूबसूरत और आलीशान इमारत के इतिहास की की जाए तो ये विश्व विरासत मूल रूप से मस्जिद बनने से पहले दुनिया के सबसे बड़े चर्चों में से एक चर्च हुआ करती थी। 1930 के दशक में इसको एक म्यूज़ियम में तब्दील कर पैयर्टन स्थल की तरह उपयोग किया जाने लगा। यह इमारत संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक मामलों की संस्था यूनेस्को के विश्व धरोहरों की सूची में आती है।

लगभग डेढ़ हज़ार साल पुराने चर्च को पहले मस्जिद, फिर म्यूज़ियम बनाया गया, अब फिर मस्जिद बनाने का फ़ैसला लिया गया है। 900 साल चर्च, 500 साल मस्जिद, 86 साल म्यूज़ियम और फिर से एक बार मस्जिद।

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इस इमारत की तामीर छठी सदी में बाइजेंटाइन सम्राट जस्टिनियन के आदेश से 532 में एक भव्य चर्च के निर्माण का काम शुरू हुआ। चर्च पांच साल में बनकर 537 में पूरा हुआ। उसके बाद से ईसाई के प्रमुख स्थलों में से हागिया सोफ़िया एक केंद्र रहा।

सम्राट जस्टिनियन ने सन 532 में एक भव्य चर्च के निर्माण का आदेश दिया था, उन दिनों इस्तांबूल को क़ुस्तुनतुनिया के नाम से जाना जाता था, यह बाइज़ेन्टाइन साम्राज्य की राजधानी थी जिसे पूरब का रोमन साम्राज्य भी कहा जाता था। यह चर्च पाँच साल में बनकर 537 में पूरा हुआ, यह ऑर्थोडॉक्स इसाइयत को मानने वालों का अहम केंद्र रहा।

उस्मानिया सल्तनत बनी और क़ुस्तुनतुनिया बना इस्तांबुल

इरतुर्गल गाज़ी के बाद जब उसके बेटे ने उस्मानिया सल्तनत का परचम फैलाकर सल्तनत खड़ी की, तब 1453 में इस शहर का नाम क़ुस्तुनतुनिया हुआ करता था। बाद में इस्तांबुल शहर का नाम दिया गया,जिसे इस समय दुनियां इस्तांबुल के नाम से जानती है। 1453 के समय इस शहर पर क़ब्ज़ा किया गया तो इस आलीशान चर्च को एक मस्जिद में तब्दील कर दिया गया।

तुर्की के शहर इस्तांबुल में बनी इस ख़ूबसूरत इमारत को ग्रीक शैली के स्थापत्य कला से बनी बेमिसाल इमारत माना गया है। इस्तांबुल में स्थित इस आलीशान इमारत ने दुनिया भर अपना जलवा बनाए रखा है।इस्लामी वास्तुकारों ने ईसायत की ज़्यादातर निशानियों को तोड़ दिया या फिर उनके ऊपर प्लास्टर की परत चढ़ा दी। पहले यह सिर्फ़ एक गुंबद वाली इमारत थी लेकिन इस्लामी शैली की छह मीनारें भी इसके बाहर खड़ी कर दी गईं।

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जब उस्मानिया सल्तनत को प्रथम विश्व युद्ध में भयानक हार मिली और सल्तनत का भी ख़ात्मा हो गया तब मुस्तफ़ा कमाल पाशा तुर्की के प्रमुख बने तो उन्होंने देश को धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किया और उनकी हुकूमत ने 1934 में इस मस्जिद को एक म्यूज़ियम में बदलने का फैसला लिया।

तुर्की में इस इमारत को लेकर लंबे समय से राजनीति होती रही है। लंबे समय से इस्लामीवादी राजनीतिक पार्टियां इसे मस्जिद बनाने की ज़िद करते रहे हैं। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन ने चुनाव में वादा किया था कि अगर वो फिर से जीतकर पहुंचे तो हागिया सोफ़िया को वापस मस्जिद में तब्दील कर देंगे। अब उन्होंने अपने इस वायदे को पूरा कर दिखाया है।

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन के आदेश के बाद इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ भी आना शुरू हो गई हैं।ग्रीस ने इस फ़ैसले का भारी विरोध किया है। ग्रीस की सांस्कृतिक मामलों की मंत्री ने इसे ‘धार्मिक भावनाएँ भड़काकर राजनीतिक लाभ लेने की राजनीति’ क़रार दिया है।अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि इस इमारत की स्थिति में बदलाव ठीक नहीं होगा क्योंकि ‘यह अलग-अलग धार्मिक आस्थाओं के बीच एक पुल का काम करता रहा है।

सोफिया का मस्जिद में तब्दील होना अल-अक्सा की मुक्ति का संकेत है : एर्दोगान

राष्ट्रपति रेसेप तईप केएर्दोगान ने कहा है कि सोफिया के दरवाजे स्थानीय लोगों और विदेशियों, मुसलमानों और गैर-मुस्लिमों के लिए खुले रहेंगे। एर्दोगान ने राज्य परिषद के निर्णय के बाद राष्ट्र को संबोधित किया।उन्होंने कहा कि मुसलमानों की विरासत, सोफिया, अपनी नई स्थिति के साथ अपने अस्तित्व को जारी रखेगी और सभी को गले लगाएगी

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तुर्की न्यायपालिका के फैसले का सम्मान करने के लिए सभी को आमंत्रित करते हुए, एर्दोगान ने कहा कि अपनी विचारधारा से विचलित होने वाले किसी भी बयान या नज़रिया को हमारी संप्रभुता का उल्लंघन माना जाएगा।

उन्होंने कहा कि 24 साल बाद शुक्रवार, 24 जुलाई, 2020, 86 साल बाद इबादत के लिए आया सोफिया को खोलने की योजना है। उन्होंने अपने भाषण के अंत में यह कहकर निष्कर्ष निकाला कि हागिया सोफिया के पुनर्जन्म ने अल-अक्सा मस्जिद की मुक्ति का संकेत है।

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