मध्य प्रदेश का ‘उड़ता ग्वालियर’, नाबालिग से लेकर बुजुर्ग सब नशे के काले कारोबार में डूबे हैं

Madhya Pradesh Gwalior drug indulges in black business from minor to elderly drug addicts
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नशा एक ऐसी बीमारी है जो युवा पीढ़ी को लगातार अपनी चपेट में लेकर उसे कई तरह से बीमार कर रहा है। शराब, सिगरेट, तंबाकू के अलावा कई नशीले पदार्थों का सेवन कर युवा वर्ग का एक बड़ा हिस्सा नशे का शिकार हो रहा है। आज के समय में फुटपाथ और रेलवे प्लेटफार्म पर रहने वाले बच्चे भी नशे की चपेट में आ चुके हैं। यही वजह है कि इन मादक पदार्थों की जरूरत को पूरा करने के लिए वे कुछ भी भी करने को तैयार हो जाते हैं। पुलिस भी इन तमाम नशीले पदार्थों की सप्लाई करने वाले आकाओं के खिलाफ मुहिम चलाती है। कई आरोपियों को भी पकड़ा भी गया है। बावजूद इसके साल दर साल इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है।

Suyash Bhatt | Bhopal

26 जून को हमने अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के दिन रूप में मनाया था। कई जगहों पर नशा मुक्ति के खिलाफ जागरुकता अभियान चलाए गए, लेकिन क्या आज समाज में इस तरफ कुछ बदलाव आया है। ये अहम सवाल है। नशे के कई ऐसे सौदागर ऐसे भी हैं, जो मासूम और युवाओं को नशे की लत डालकर सड़कों पर भिक्षावृत्ति का काम भी करवाते हैं। जब ये बच्चे नशे के आदि हो जाते हैं तो मादक पदार्थो न मिलने की सूरत में व्‍हाइटनर, नेल पॉलिश, पेट्रोल की गंध, ब्रेड के साथ विक्स और बाम का सेवन कर रहे हैं। जो बेहद खतरनाक होता हैं।

बात अगर ग्वालियर की जाए तो पुलिस ने जिले भर में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की है,जहां नाबालिग से लेकर बुजुर्ग नशे के इस काले कारोबार में लिप्त पाए गए हैं। साल 2017 ,2018 और 2019 में नशे संबंधी अपराधों की संख्या बढ़ी तो, उसके साथ अवैध मादक पदार्थ की जब्ती भी ज्यादा हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस कदर समाज में मादक पदार्थों का काला कारोबार अपनी जड़ें पसार रहा है।

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एक नजर इन आकंडों पर
ग्वालियर जिले की बात की जाए तो 1 जनवरी 2019 से 31 दिसंबर 2019 तक की अवधि में 71 मामलों में 92 आरोपियों को को पकड़ा गया है। जिनके कब्जे से करीब 19 किलो 700 ग्राम पोस्ता डोडा चूरा, 70 किलो 494 ग्राम गांजा और 3 किलो 668 ग्राम अवैध मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। जिनकी अनुमानित कीमत करीब तीन करोड़ 54 लाख रूपए है।

1 जनवरी 2018 से 31 सितंबर 2018 में कुल 40 मामले दर्ज किए गए थे। जिनमें 45 आरोपियों को पकड़ते हुए उनके कब्जे से 2 किलो 500 ग्राम पोस्त डोडा चूरा, 12 किलो 781 ग्राम गांजा , 1 किलो 803 ग्राम स्मैक के साथ 13 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की गई। जिनकी मार्केट वेल्यू करीब 63 लाख 76 हजार रुपये थी।

साल 2017 की बात की जाए तो 1 जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2017 में 64 मामले दर्ज करते हुए 74 आरोपी पकड़े गए। जिनसे 2 किलो पोस्ता डोडा चूरा, 79 किलो 640 ग्राम गांजा, 798 ग्राम स्मैक और 16 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की गई। जिसकी बाजार कीमत करीब 25 लाख 36 हजार रुपये थी।

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि स्थितियां कितनी गंभीर हैं। नशे के बढ़ते दायरे के चलते आज समाज कई समस्याएं पैदा हो रही हैं। लोगों के स्वास्थ्य पर इसका बहुत ही खराब असर पड़ रहा है। जिसके चलते कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां आम होती जा रही हैं। इसके अलावा मानसिक तनाव, आर्थिक समस्या, दुर्घटनाएं और घरेलू हिंसा जैसे अपराधों को भी बढ़ावा मिल रहा है।इस बारे में एएसपी पंकड पांडेय का कहना है कि नशा मुक्ति के लिए महज एक दिन काफी नहीं है। इसके लिए घर परिवार समाज के सभी लोगों को सामने आना बेहद जरूरी है। ताकि अपने आस-पास के लोगों को नशे की इस काली परछाई से बचाकर एक अच्छे समाज की कल्पना की जा सके।

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गौरतलब है कि मादक पदार्थों से समाज को सुरक्षित रखना हर वर्ग की नैतिक जिम्मेदारी है। क्योंकि जब हमारा कोई अपना या आसपास का इसकी चपेट में आता तो उसका असर उस व्यक्ति के परिवार समेत पूरे समाज पर पड़ता है। नशे की तलब उसे जुर्म की दहलीज पर पहुंचा देती है। ऐसे में प्रशासन के साथ समाज के हर एक शख्स को अपनी जिम्मेदारी निभाना जरूरी है।

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