Gunjan Saxena the kargil girl

गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल

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कोरोना संक्रमण के चलते सिनेमाघर पूरे देश के बंद हैं। जिससे फ़िल्म जगत को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी के साथ कई फ़िल्मों की रिलीज को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसी ही मुश्किल का सामना शरण शर्मा द्वारा निर्देशित और धर्मा प्रोडक्शंस और ज़ी स्टूडियो के तहत निर्मित आगामी भारतीय हिंदी बायोपिक फिल्म गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल,की रिलीज को लेकर भी कई कयास लगाए जा रहे हैं।

इस फिल्म के ओटीटी पर रिलीज होने की बात शुरू हो चुकी है लेकिन करण जौहर ने एक ट्वीट करके मीडिया से अनुरोध किया था कि किसी भी फिल्म को लेकर अनुमान न लगाए जाएं।इस फिल्म में भारतीय वायु सेना के पायलट गुंजन सक्सेना, पहली महिला और भारतीय महिला एयरफ़ोर्स पायलट की मुख्य भूमिका में जान्हवी कपूर हैं।

कारगिल युद्ध के दौरान गुंजन सक्सेना ने युद्ध क्षेत्र में निडर होकर चीता हेलीकॉप्टर उड़ाया। इस दौरान वह द्रास और बटालिक की ऊंची पहाड़ियों से उठाकर वापस सुरक्षित स्थान पर लेकर आईं।गुंजन को उनकी वीरता, साहस और देशप्रेम के लिए शौर्य पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।गुंजन सक्सेना आईएएफ(IAF) की पहली महिला पायलट है।

युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सैनिक लगातार रॉकेट लॉन्चर और गोलियों से हमला कर रहे थे।गुंजन के एयरक्राफ्ट पर मिसाइल भी दागी गई लेकिन निशाना चूक गया और गुंजन बाल-बाल बचीं। बिना किसी हथियार के गुंजन ने पाकिस्तानी सैनिकों का मुकाबला किया और कई जवानों को वहां से सुरक्षित निकाला।

जब गुंजन हंसराज कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रही थी तब उन्होंने दिल्ली का सफदरगंज फ्लाइंग क्लब ज्वाइन कर लिया था। उस समय उनके पिता और भाई दोनों ही भारतीय सेना में कार्यरत थे।

इसी दौरान उन्‍हें पता चला कि IAF में पहली बार महिला पायलटों की भर्ती की जा रही है। फिर उन्होंने SSB परीक्षा पास की और भारयीय वायुसेना में बतौर पायलट शामिल हो गईं।उस वक्‍त सुरक्षा बलों में पुरुष अधिकारियों का वर्चस्व था और भारतीय वायुसेना में महिला अधिकारियों को पुरुषों के बराबर उड़ान भरने का मौका नहीं दिया जाता था।बेशक उस समय महिला अधिकारियों को लड़ाकू जेट उड़ाने की अनुमति नहीं थी, लेकिन उनके बैच की महिलाओं ने भारतीय वायुसेना में पहली बार विमान उड़ाकर इतिहास तो रच ही दिया था। हालांकि उस वक्‍त भारतीय वायुसेना में महिला पायलटों के लिए आरक्षण था।

लेकिन तब यह साफ नहीं था कि वे उड़ान भरने के लिए मानसिक और शारीरिक तनाव और युद्धों का सामना कैसे करेंगी। इन युवतियों को अपनी क्षमता साबित करने के लिए एक मौका चाहिए था जो उन्हें 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान मिला। युद्ध के दौरान जब भारतीय सेना को पायलट की जरूरत पड़ी, तब गुंजन और श्री विद्या को युद्ध क्षेत्र में भेजा गया। उन्होंने अपने मिशन को पूरा करने के लिए कई बार लाइन ऑफ कंट्रोल के बिल्कुल नजदीक से भी उड़ान भरी जिससे पाकिस्तानी सैनिकों की पोजिशन का पता लगाया जा सके।

कौन हैं गुंजन सक्सेना?

गुंजन सक्सेना आईएएफ की पहली महिला पायलट है।
44 साल की गुंजन अब रिटायर हो चुकी हैं।
उन्हें कारगिल गर्ल के नाम से जाना जाता है।

गुंजन ने यह साबित किया कि वह देश की सच्‍ची सैनिक हैं, उन्‍होंने दुनिया को यह भी दिखा दिया कि महिलाएं क्‍या कर सकती हैं। अब भारतीय वायुसेना में महिला पायलट भी फाइटर प्‍लेन उड़ा सकती हैं और इसका श्रेय कहीं न कहीं गुंजन सक्‍सेना जैसी हिम्‍मती IAF पायलटों को जाता है।

गुंजन सक्सेना जैसी ही देश की बेटियों से भारत का गर्व बढ़ता है।

Written by Kanishtha Singh, a Mass Communication student at Makhanlal Chaturvedi University(MCU), Bhopal. Interested in covering women, political and international issues.

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