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गुजरात दंगा : सरदारपुरा में 33 लोगों को ज़िंदा जलाने के मामले में दोषी क़रार 14 लोगों को मिली ज़मानत

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गुजरात 2002 के गोधरा दंगों के बाद सरदारपुरा नरसंहार मामले में आजीवान कारावास की सजा पाने वाले 17 लोगों में से 14 लोगों सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। ये लोग सरदारपुरा में 33 लोगों को जिंदा जलाने के मामले में दोषी करार दिए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल ने इस मामले में 76 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जून 2009 में 73 के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। हत्याकांड के 10 साल बाद 2012 में 31 लोगों को दोषी ठहराए जाने वाले विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2002 के दंगों के मामले को साबित करने के लिए अभियोजन की सफलता को दुर्लभ उदाहरणों में से एक बताया था।

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हालांकि, चार साल बाद गुजरात हाईकोर्ट ने 31 में से 14 दोषियों को बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि अभियोजन पक्ष सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दो-गवाहों के परीक्षण में विफल रहा। इसके अनुसार, दंगा मामले में एक अभियुक्त के खिलाफ कम से कम दो गवाहों को अदालत द्वारा उसे दोषी ठहराने के लिए गवाही देनी चाहिए थी। हालांकि, इस आधार पर हाईकोर्ट ने 17 दोषियों की सजा को बरकरार रखा था।

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बार एंड बेंच के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रिहा किए गए 14 दोषियों को समाज सेवा करने के लिए कहा है। हालांकि, अदालत ने उन्हें गुजरात से बाहर रहने का आदेश दिया है सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और सूर्यकांत की पीठ ने इन 14 दोषियों को दो समूहों में विभाजित कर एक को मध्य प्रदेश के इंदौर और दूसरे को वहां से 500 किमी दूर जबलपुर भेजा जाएगा।

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