गठबंधन या ठगबंधन

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान होना बहुत ज़रूरी है, लेकिन जबसे भारत में गठबंधन राजनीति का जन्म हुआ तबसे जनता के आदेश के साथ राजनीतिक दलों ने सत्ता के लालच में छलावा किया है। महाराष्ट्र की राजनीति भी उसी मोड़ पर आकर खड़ी हो चुकी है। जनता ने चुनाव पूर्व बने भाजपा-शिवसेना गठबंधन को पूर्ण बहुमत दिया लेकिन निजी स्वार्थ, निजी हित और महत्वकांशा के कारण यह गठबंधन टूटने की कगार पर आ गया।  गठबंधन का यही धर्म रहा है कि पार्टियां थोड़ा थोड़ा एडजस्ट और कोम्प्रोमाईज़ करके जनता को एक मजबूत सरकार दें। लेकिन यहां न भाजपा झुकने को तैयार है न शिवसेना, जनता बिन सरकार ठगी सी नज़र आ रही है।

शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस

जनता के लिहाज़ से देखा जाए तो चुनाव बाद होने वाले गठबंधन बेहतर होते हैं चुनाव के पहले हुए गठबंधन से, क्योंकि यहां जनता उम्मीदवार को देखकर वोट करती है, गठबंधन में व्यक्ति न चाहते हुए भी गठबंधन के उम्मीदवार को वोट करके आता है ताकि उसके पसंद की सरकार बनें। ऐसे में अगर बाद में गठबंधन का साथी निकलकर विरोधियों के पाले में चला जाए तो ठगा तो वोटर ही जाता है।

बेमेलों का मेल

ऐसा नहीं है कि शिवसेना कुछ नया कर रही है। भाजपा, कांग्रेस, और अन्य क्षेत्रीय दलों ने भी अपनी विरोधी विचारधाराओं के साथ मिलकर सरकारें बनाई हैं। कश्मीर में भाजपा पीडीपी का गठबंधन भी विपरीत विचारों का मेल था। उत्तरप्रदेश में सपा बसपा का साथ आना भी दो किनारों के मिलने जैसा था। कभी कांग्रेस के विचारों से असहमत होकर अलग पार्टी बनाने वाले शरद पवार आज कांग्रेस के साथ खड़े हैं। लेकिन एनसीपी और कांग्रेस के बीच मतभेद विचारधारा का नहीं रहा। यह देखना दिलचस्प होगा कि सेक्युलर विचारधारा वाले ये दो साथी महाराष्ट्र में धुर दक्षिणपंथी विचारों वाली शिवसेना को अपना बड़ा भाई बनाकर कैसे चल पाएंगे।

ALSO READ:  बीजेपी के खिलाफ आवाज मंहगी पड़ेगी, राज ठाकरे ईडी के रडार पर !

शिवसेना का इतना बड़ा कदम केवल महाराष्ट्र में खुद को अपने दम पर खड़ा करने की एक कोशिश है। भाजपा के साथ रहकर शिवसेना का कभी बड़ा भाई बनना मुश्किल था। कहते हैं भाजपा अपनी छाया में कभी किसी दूसरे दाल को बढ़ने नहीं देती। भाजपा की छांव से निकलकर एक बार शिवसेना सत्ता में आजाए तो इतना तो तय है कि 5 सालों में शिवसेना का विकास ज़्यादा होगा और अगले चुनावों में भाजपा के लिए महाराष्ट्र में सबसे बड़ी चुनौती शिवसेना बन जाएगी।





  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.