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कहीं कोई कैमरा शवों की गिनती न कर ले इसलिए शवों से चुनरी और लकड़ियां हटा रही योगी सरकार: Srinivas

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Ground Report | News Desk |Srinivas BV says govt hiding truth | Srinivas shares on twitter | कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने स्वस्थ्य व्यवस्था को तो झकझोर कर रख ही दिया था, इसके साथ साथ हालत इतने ख़राब हो गए थे की लोगों ने शवों को गंगा किनारे दफन करना शुरू कर दिया था क्योकि शमशान घाटों में जगह ही नहीं बची थी। एक रिपोर्ट के अनुसार 2000 से भी ज़्यादा शवों को गंगा किनारे अलग अलग शहरों में दफनाया गया था। तटों पर सफाई के लिए अब प्रशाशन ने शवों के पास लगे बम्बू व् चुनरी हटाना शुरू कर दिया है। अखबार में छपी इन खबरों को युथ कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास (Srinivas BV) ने ट्विटर पर शेयर भी किया।

क्या है मामला ?

प्रयागराज जिले के फाफामऊ और श्रृंग्वेरपुर घाट में प्रशासन ने रात में पूरे दल के साथ निरिक्षण किया और सुबह ही सफाई का काम शुरू करवा दिया। उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के किनारे दफन पाए गए कई शवों के बाद जिला प्राधिकरण के निर्देश को क्षति नियंत्रण (damage control) उपाय के रूप में देखा गया था, जो कोविड -19 रोगियों के होने का संदेह था। कुछ शव नदी में तैरते हुए भी मिले हैं। ऐसा माना जा रहा है की कैमरे की नज़र से बचने के लिए ये काम जल्दी जल्दी रात में करने की कोशिश की गयी। नगर निगम के जोनल अधिकारी नीरज सिंह की देखरेख में फाफामऊ घाट पर 100 से अधिक सफाईकर्मी लगाए गए थे। साफ़ सफाई के दौरान कई अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।

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रेत से बाहर आते शवों का दाह संस्कार करने का भी प्रयास किया गया, अलग अलग जगह पर इसके लिए चिताएं भी सजाई गयी। एसडीएम सोरांव अनिल चतुर्वेदी ने ये जानकारी भी दी की ये लकड़ियां ज़रूरत मंद लोगों को दे दी जाएँगी जो दाहसंस्कार करने में असमर्थ है। कुंडा इलाके के बेंती गाँव से आये कुछ लोगों ढाई साल के बच्चे का शव लाये थे दफ़नाने के लिए पर अफसरों ने उन्हें रोक दिया और दाह संस्कार करने में मदद का आश्वाशन भी दिया पर परिजन शव लेकर वापिस चले गए।

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श्रृंगवेरपुर घाट के एक पुजारी ने जानकारी देते हुए बताया कि रविवार रात दो खुदाई करने वाले और करीब दो दर्जन मजदूरों ने कवर और बांस के डंडे हटा दिए। पुजारी ने कहा कि उन्हें एक ट्रॉली में ले जाया गया और बाद में जला दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक अकेले कानपुर और उन्नाव के घाटों पर 1300 से ज़्यादा शव थे। 15 मई को, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी केंद्र सरकार और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें घटनाओं को देखते हुए मृतकों की गरिमा को बनाए रखने के लिए एक विशेष कानून बनाने की मांग की गई है।

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