जानिये: क्या है बैंकों का विलय करने की सरकार की रणनीति?

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

स्पेशल रिपोर्ट ।  केंद्र सरकार ने तीन सार्वजानिक बैंकों का विलय करने का निर्णय लिया है। तीन बैंकों में शामिल हैं देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ़ बड़ोदा। यानि तीनो बैंकों को मिलाकर एक बड़ा बैंक बनेगा। लेकिन सरकार के इस फैसले के बाद एक नई डिबेट शुरू हो गयी है कि बैंकों का विलय आखिर कितना सही है? सरकार का तर्क है कि ये निर्णय एनपीए की समस्या से निपटने के लिए लिया गया है।  कुछ हद तक सरकार का तर्क सही भी है। लेकिन विलय से पहले सरकार को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन बैंकों का विलय किया जा रहा है उनकी स्थिति एक जैसी है।

यह भी पढ़े: बाबा रामदेव को है महंगाई की कसक, न जता सकते हैं न छुपा सकते हैं

अभी तीनो में से केवल देना बैंक घाटे में चल रहा है, यानि एनपीए की समस्या से जूझ रहा है। देना बैंक पिछले कुछ महीनो से रिज़र्व बैंक की निगरानी में काम कर रहा था। लेकिन बैंक ऑफ़ बड़ोदा और विजया बैंक की हालत देना बैंक के मुकाबले बेहतर है। इस विलय से देना बैंक को फायदा हुआ है, क्योकि विलय के बाद बनने वाले बैंक की हालत देना बैंक से तो बेहतर ही होगी। और बैंक ऑफ़ बड़ोदा और विजया बैंक को नुकसान हुआ है, क्योकि उनके ऊपर एक ऐसे बैंक को लादा जा रहा है जिसकी हालत बेहद खराब है। सरकार के इस निर्णय के बाद शेयर मार्केट में भारी बदलाव देखने को मिला। देना बैंक के शेयर्स तो पहले के मुकाबले बढ़ गए, लेकिन विजया बैंक और बैंक ऑफ़ बड़ोदा के शेयर्स काफी कम हो गए।

READ:  सुप्रीम कोर्ट ने दिया था फ्लोर टेस्ट का आदेश, लेकिन CM कमलनाथ ने दिया इस्तीफा

यह भी पढ़ें: बहुत हुई महंगाई की मार, 30 रुपये प्रति लीटर वाला पेट्रोल-डीजल कैसे पहुंचा 80 के पार, यहां समझें

विलय कितना सही?
अगर छोटे छोटे बैंकों का विलय किया जाता है, तो उस बैंक को चलाने में काफी कम खर्चा आएगा यानि कास्ट कटिंग होगी. और काम में बढ़ोतरी होगी। बड़ा बैंक होगा तो उसके पास पूँजी की समस्या नहीं होगी।
अगर कोई बड़ा नुकसान भी होता है तो बड़ा बैंक उसे आसानी से झेल पायेगा. संसाधनों को ज़रूरी क्षेत्रों में भेजा जा सकेगा। क्योकि छोटे छोटे बैंक ज्यादा रिस्क नहीं ले सकते। वो उसी क्षेत्र में लोन देते हैं जहाँ उन्हें लगता है कि रिस्क नहीं है। आमतौर पर छोटे बांको द्वारा किसानों और ग्रामीण क्षेत्रो में लोन नहीं दिया जाता। लेकिन अगर बड़ा बैंक होगा तो अपने रिस्क को संभाल पायेगा। क्योकि छोटे बैंकों को मिलाकर एक बड़ा बैंक बनता है तो उसकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं ज्यादा बेहतर होगी. आर्थिक स्थिति की वजह से क्रेडिट रेटिंग में परिणाम अच्छा रहेगा।

READ:  Madhya Pradesh By-Elections 2020: मध्य प्रदेश में कब होंगे उपचुनाव?

यह भी पढ़ें: पेट्रोल’ की बढ़ती कीमतों की वजह से छोड़ना पड़ा था ‘गांधी’ जी को घर!

विलय से नुकसान क्या है?

सरकार इस निर्णय को तभी ले पायी है जब उसके शेयर्स इन तीनो बैंकों में और शेयरहोल्डर्स के मुकाबले ज्यादा हैं। ऐसे में अगर जिनके शेयर्स सरकार के मुकाबले कम हैं, वो चाहकर भी विलय नहीं करा सकते थे और न ही अब विलय का विरोध कर सकते हैं. सरकार की ये एक मनमानी सी है. यानी माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के हितों को नज़रंदाज़ किया जाता है।
अगर बैंकों का विलय होता है तो शहरी जगहों पर कई जगह ब्रांच बंद हो जाती हैं। यानी लोगो को बैंक की सुविधा के लिए दूर दूर जाना पड़ेगा। और ब्रांच बंद होने से उन बैंकों में काम कर रहे कर्मचारियों की नौकरी भी जायेगी। ये बात साफ़ है कि तीनो बैंकों का काम करने का तरीका अलग ही होगा। इसे एक जैसा बनाने में समय लगेगा।

READ:  India-Pakistan atmosphere created serious conflict over Gilgit-Baltistan