gender equality in 2020

साल 2020 की वो ख़बरें जिनसे समाज में बदलाव की उम्मीद कायम हुई है

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साल 2020 ने हमारी ज़िंदगी में उथल-पुथल मचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कोरोना महामारी ने जहां एक तरफ हमें मेडिकल इमरजेंसी के दौर में पहुंचा दिया तो वहीं लॉकडाउन ने कई लोगों की रोज़ी रोटी छीन ली जिससे उन्हें पलायन का दर्द झेलना पड़ा। लेकिन मायूसी भरे इस साल में कुछ ऐसे बदलाव भी हुए जिनसे सुनहरे भविष्य की उम्मीद जगी है। आपको बताते हैं ऐसी ही पांच अच्छी खबरें-

ओडिशा सरकार ने इंटर कास्ट मैरिज को बढ़ावा देने के लिए जारी किया एक पोर्टल

जहां एक ओर कई राज्य सरकारें लव जिहाद जैसा कानून बनाकर प्यार को मज़हबी आईने में तोल रही हैं तो वहीं ओडिशा की पटनायक सरकार इंटर कास्ट शादियों को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इंटर कास्ट शादी करने वाले जोड़ों के लिए सुमंगल पोर्टल लॉंच किया जिसके ज़रिए अंतर जातीय विवाह करने वाले लोगों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही ऐसी शादियों में राज्य सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशी बढ़ाकर 1 लाख से ढाई लाख कर दी गई है।

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असम में सिविल सेवा परीक्षा में अब ट्रांस्जेंडर का ऑपशन जोड़ा गया

देश में ट्रंस्जेडर समुदाय के लिए स्थितियां सामान्य करने के उद्देश्य से कई कार्य किये जा रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद ट्रांस्जेंडर समुदाय कई तरह की परेशानियों से जूझ रहा है। सिविल सेवा परीक्षा में पहले अभ्यार्थियों के पास अपना जेंडर बताने को केवल दो ही विक्लप होते थे। या तो मेल या फीमेल लेकिन असम ने अब तीसरा विकल्प भी जोड़ दिया है। ऐसा करने वाला असम पहला राज्य है। आपको बता दें कि असम पब्लिक कमीशन की प्रारंभिक परीक्षा में कुल 42 ट्रांस्जेंडर अभ्यार्थियों ने भाग लिया है।

ओडिशा हाई कोर्ट ने समलैंगिक जोड़े को लिव इन में रहने की दी इजाज़त

भारत में समलैंगिकता को अपराध बताने वाली धारा 377 के हटने के बाद भी समाज में समलैंगिकता को लेकर सहजता नहीं आई है। आज भी समलैंगिक लोगों को समाज में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ओडिशा हाई कोर्ट ने एक 24 साल के ट्रांस्जेंडर के मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हर मनुष्य को बराबरी के अधिकारों के साथ जीने का हक़ है इसमें उसकी सेक्सुअल पहचान आड़े नहीं आना चाहिए। कोर्ट ने आदेश दिया की इस जोड़े को किसी भी तरह परेशाान नहीं किया जाए। राज्य इन्हें पूरी सरक्षा मुहैया कराए।

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सभी हिंदू महिलाओं को मिला पिता की संपत्ति में हिस्से का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में लड़कियों को अपने पिता की संपत्ती में बराबर का हक दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लड़कियों को भी लड़कों की तरह अपने पिता की संपत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए। लड़कियां अपने पिता की जीवन भर लाड़ली बनी रहती हैं। आपको बता दें कि इससे पहले लड़कियों को पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलता था केवल बेटों में ही संपत्ति का विभाजन किया जाता था। इस फैसले से जेंडर इक्वालिटी को और शक्ति मिलेगी।

नोएडा सेक्टर 50 मेट्रो स्टेशन ट्रांस्जेंडर समुदाय को किया गया समर्पित, स्टेशन का नाम रखा गया प्राईड स्टेशन

Pride Staion sector 50 Noida (UP)

ट्रांस्जेंडर समुदाय के उत्थान और प्रोत्साहन के लिए नॉएडा मेट्रो रेल कॉर्पोऱेशन ने अपने एक स्टेशन को पूरी तरह ट्रांस्जेड़र समुदाय को समर्पित किया है। इस स्टेशन का नाम प्राईड स्टेशन रखा गया है साथ ही 6 ट्रांस्जेंडर कर्मचारियों को भी यहां नियुक्त किया गया है।

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भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को मिला स्थाई कमीशन

Representational Image

भारतीय सेना में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष कई काम हुए इसमें महिलाओं की स्थाई कमीशन में नियुक्ति एक बड़ा फैसला रहा । शॉर्ट सर्विस कमीशन के ज़रिए जिन महिला अधिकारियों की सेना में नियुक्ति हुई थी उन्हें स्थाई कमीशन में नियुक्त किया जाएगा। पहले यह केवल पुरुषों के लिए मान्य था।

इन खबरों को पढ़ने के बाद आपको अहसास होगा कि इस साल कई ऐसे भी काम हुए हैं जिनके लिए वर्षों से लड़ाई लड़ी जा रही थी। यह बदलाव अचानक नहीं हुए इन अधिकारों के लिए समाज ने बहुत संघर्ष किया है।

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