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भारत की घटिया ग्लोबल हंगर इंडेक्स रैंक और आगरा में दलित बच्ची की भूख से मौत

Globel Hunger Index Report a Dalit Family hit by lockdown, 5-year-old child dies by hunger Agra
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बात अक्टूबर महीने की है जब वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2020 (Global Hunger Index 2020) जारी हुआ जिसमें भारत 107 देशों की लिस्ट 94वें नंबर रहा और उसे गंभीर भुखमरी (Serious Hunger) की श्रेणी में रखा गया। उसी हफ्ते उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में एक बच्ची ने भूख से दमतोड़ दिया। दिल को झकझोर देने वाला यह मामला ताज़ नगरी आगरा के नगला विधिचंद का है जहां पर एक दलित परिवार की 5 साल की बेटी सोनिया कुमारी पुत्री शीला (40) और पप्पू (50) ने भूख से तड़प-तड़प कर दमतोड़ दिया। दलित दंपति के मुताबिक सोनिया को मौत के 15 दिन पहले से वो उसे खाना नही खिला सकते थे क्योंकि उनके पास खाने के लिए कुछ नही था और जिस दिन उनकी बच्ची की मौत हुई उस दिन चैरिटी के रूप में उन्हें खाने के लिए सिर्फ पारले जी बिस्कुट मिले थे। (storiesasia.org के लिए इस खबर को पत्रकार सृष्टी जायसवाल ने कवर किया है, जिसे ग्राउंड रिपोर्ट की सहयोगी शशि तिवारी ने हिन्दी में ट्रांसलेट किया है।)

नगला विधिचंद में मुख्यत: दलित परिवार ही रहते है बिजली ,पानी छोड़िये इनके पास अपना राशन कार्ड तक नहीं है। 25 फीसदी लोगों के पास आधार कार्ड नही है सरकार मुफ्त गैस कनेक्शन के लाखों दावे कर ले लेकिन इन दलित परिवारों के पास गैस कनेक्शन नही है ,बाल विवाह दर अधिक है। इन परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ नही मिल पा रहा है और यही सिस्टम की सबसे बड़ी विफलता है।

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भूख को मापना जटिल है
2012 के बाद से भारत सरकार ने भुखमरी और गरीबी का कोई आधिकारिक डेटा नही जारी किया है ,जो भूख सूचकांक को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। एक ऐसा अंतिम सर्वेक्षण राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से किया गया था। केन्द्र सरकार ने बाद में 2017-18 के उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण को जारी करने के लिए योजना को आश्रय दिया, हालांकि एक लीक मसौदे में ग्रामीण भारत में उपभोक्ता के खर्च में 8.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI) कंसर्न वर्ल्डवाइड और वेल्ट हंगर हिल्फे संयुक्त रूप से प्रतिवर्ष जारी करता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 14 प्रतिशत जनसंख्या अल्पोषित है और यहां के बच्चों का उम्र के अनुपात से कम लंबाई(Stunting Rate) 37.4 प्रतिशत है। GHI यानी ग्लोबर हंगर इंडेक्स में 4 मानकों के आधार पर स्कोर दिया जाता है।
• Child Wasting (लंबाई के अनुपात में कम वजन होना)
• Child Stunting (उम्र के अनुपात से कम लंबाई)
• Child Mortality (बालमृत्यु)
• Undernourishment (अल्पोषण)

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स इन्हीं पर आधरित है हालांकि न्यूनतम आहार की आवश्यकता हर देश की भिन्न होती है यह औसतन 1,650 किलोकैलरीज से 2,000 किलोकैलरीज प्रतिदिन होती है । भारत के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम मई 2020 में लिखा था “ हम कई लोग भुखमरी से मर जाएंगे क्योंकि कोई राज्य सरकार यह नही जान पाएगी कि भुखमरी से होने वाली मौतों को स्वीकार कैसे किया जाता है । “ भूख से मौतें शायद ही कभी होती है । ऐसा ही एक जवाब सुप्रीम कोर्ट ने 2002 राज्य के मुख्य सचिवों से मांगा था और कहा था की राजनीतिक और प्रशासनिक कमी के कारण को भूख और बीमारी को नज़रांदाज करने की अनुमति नही दी जानी चाहिए । आखिरकार भोजन का अधिकार जीवन के अधिकार से प्राप्त मौलिक अधिकार है।

2017 में जब झारखंड में 11 संतोषी नाम की एक बच्ची की मृत्यु हो गई तो राज्य सरकार ने दावा किया की बच्ची की मौत बीमारी से हुई है लेकिन परिवार का कहना था कि उन्हें 6 महीने से राशन नही मिला है। 2018 में लोकसभा में एक सवाल का उत्तर देते हुए उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री सी आर चौधरी भारत में भुखमरी से होने वाली मौतों का स्पष्ट रूप से खंडन किया।

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सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अंतर
नीति आयोग के अनुसार भारत सरकार की थिंक टैंक पॉलिसी है 400,000 से अधिक उचित मूल्य की दुकानों के नेटवर्क के साथ भारत अपने प्रकार से सबसे बड़ी वितरण मशीनरी है। देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश 80,000 राशन की दुकानें है जो 75 जिलों के 826 ब्लाकों में फैली है जिसमें 143.8 मिलियन लाभार्थी हैं । आगरा के डिवीजनल कमिश्र्नर अनिल कुमार के अनुसार 12,900 या 3,698 परिवारों की आबादी के साथ नगला विधिचंद गाँव नैना जाट ग्राम पंचायत का हिस्सा है। पंचायत में 8,400 लाभार्थियों को कवर करते हुए 1,918 राशन कार्ड जारी किए गए है। डॉ दीपा सिन्हा जो भोजन अभियान की सदस्य है ने राइट टू फूड अभियान से संकेत दिया की लाभार्थियों की पहचान सबसे जरुरी है। ये उस पीड़ित परिवार का दुर्भाग्य है या सिस्टम की विफलता सोनिया की मौत के बाद परिवार के राशन कार्ड तो बनाए गए लेकिन आधार कार्ड से लिंक ना होने की वजह से आज भी लाभ से वंचित है,जबकि उत्तर प्रदेश सरकार के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार स्पष्ट रूप से कह चुके है कि राशन के वितरण के दौरान राशन कार्ड की उपलब्धता अनिवार्य नहीं है।

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