CAG से जुड़ी हर एक बात जानें

गिरीश मुर्मू होंगे देश के अगले CAG, जानें कैग से जुड़ी हर बात

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गुजरात कैडर में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी रहे गिरीश चंद्र मुर्मू भारत के नए नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) बनाये गए हैं। केंद्र सरकार ने जीसी मुर्मू को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल पद से त्यागपत्र देने के एक दिन बाद देश का नया नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) नियुक्त किया है।

मुर्मू मौजूदा सीएजी राजीव महर्षि का स्थान लेंगे जो कि आगामी 8 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। मुर्मू ने बुधवार को जम्‍मू-कश्‍मीर के उपराज्‍यपाल पद से इस्‍तीफा दिया था। 1978 बैच के राजस्थान कैडर के आइएएस अधिकारी महर्षि का कार्यकाल सात अगस्त को पूरा हो रहा है। महर्षि को साल 2017 में सीएजी नियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल तीन साल का रहा।

  • भारत तथा प्रत्येक राज्य तथा प्रत्येक संघ राज्य क्षेत्र की संचित निधि से किए गए सभी व्यय विधि के अधीन ही हुए हैं, यह इस बात की संपरीक्षा करता है
  • नियंत्रक महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। किन्तु उसे पद से संसद के दोनों सदनों के समावेदन पर ही हटाया जा सकेगा और उसके आधार (i) साबित कदाचार या (ii) असमर्थता हो सकेंगें
  • इसकी पदावधि पद ग्रहण करने की तिथि से 6 वर्ष तक होगी, लेकिन यदि इससे पूर्व 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेता है तो अवकाश ग्रहण कर लेता है
  • यह सेवा-निवृत्ति के पश्चात भारत सरकार के अधीन कोई पद धारण नहीं कर सकता
  • नियंत्रक महालेखा परीक्षक सार्वजनिक धन का संरक्षक होता है

देश के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी (CAG) एक संवैधानिक पद है। सीएजी का काम सरकारी खातों और उसके द्वारा खर्च किये जा रहे धन की जांच करना है। दरअसल, सरकार जो भी धन खर्च करती है, सीएजी (CAG) उस खर्च की गहराई से जांच पड़ताल करता है और पता लगाता है कि धन सही तरीके से खर्च हुआ है या नहीं। यह केंद्र और राज्य सरकार दोनों के सार्वजनिक खातों और आकस्मिक निधि का भी परीक्षण करता है।

सीएजी के कार्य और शुरुआत

सीएजी (CAG) की शुरुआत 1858 में हुई थी, तब भारत अंग्रेजों के अधीन था। आजादी तक इसमें कई बदलाव हुए और बाद में संविधान के अनुच्छेद 148 में सीएजी की नियुक्ति का प्रावधान किया गया। सीएजी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। फिर, साल 1971 में सीएजी अधिनियम लागू हुआ, जिसमें सीएजी के कर्तव्य, शक्तियों और सेवा की शर्तों का उल्लेख था।

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संसद ने 1971 में सीएजी के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम नामक एक विस्तृत विधान को अधिनियमित किया जो उनके अधिदेश का वर्णन करता है और सरकार (केंद्र और राज्य) के लगभग प्रत्येक व्यय राजस्व संग्रहण या सहायता/अनुदान प्राप्त करने वाली इकाई उनकी लेखापरीक्षा के अंतर्गत आती हैं। उनका कर्तव्य सरकारी विभागों, सरकार के निकायों, स्वायत्त संगठनों आदि की लेखापरीक्षा करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना है।

सीएजी की शक्तियां


सीएजी का काम असानी से हो सके, इसके लिए उसे ढेरों शक्ति प्रदान की गई है। इनमें उनके लेखापरीक्षा के अधीन किसी कार्यालय या संगठन के निरीक्षण करने की शक्ति, सभी लेन-देनों की जांच और कार्यकारी से प्रश्नष करने की शक्ति, किसी भी लेखापरीक्षित सत्त्व से कोई भी रिकार्ड, पेपर, दस्तावेज मांगने की शक्ति, लेखापरीक्षा की सीमा और स्व रूप पर निर्णय लेने की शक्ति, आदि शामिल हैं।

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सीएजी को हटानासीएजी के काम और शक्तियों को देखते हुए उन्हें हटाने यानि पदमुक्त करने की प्रक्रिया भी निर्धारित है। सीएजी को हटाने के लिए संविधान में दर्ज प्रक्रिया का ही पालन करना होगा। यह ठीक वैसी प्रक्रिया है, जैसी सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश को हटाने की प्रक्रिया है।

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