अंतर्वेद प्रवर : गणेश शंकर विद्यार्थी से जुड़े इतिहास का वो संग्रह जो अब तक कहीं प्रकाशित नहीं हुआ

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Ground Report News Desk| New Delhi

‘मैं हिन्दू-मुसलमान झगड़े की मूल वजह चुनाव को समझता हूं। चुने जाने के बाद आदमी देश और जनता के काम का नहीं रहता।’ वर्तमान राजनीति पर ये लाइन बिल्कुल फिट बैठती हैं जहां चंद वोटों की खातिर हमारे नेता धार्मिक उन्माद फैलाने से बाज नहीं आते।

आपको जानकर हैरानी होगी कि ये लाइन आज नहीं बल्कि साल 1925 में देश के अद्वितीय पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी ने लिखी थीं। उत्तर प्रदेश के जनपद फ़तेहपुर के रहने वाले गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म इलाहाबाद के अतरसुइया मोहल्ले में अपने ननिहाल में 26 अक्टूबर 1890 को हुआ। बाद में इन्होंने अपने गृह जनपद के पड़ोसी ज़िले कानपुर को अपनी कर्मभूमि बनाया।

आजीवन धार्मिक कट्टरता के खिलाफ लोगों को सतर्क करने वाले विद्यार्थी दंगों में बीच बचाव के दौरान अपने ही शहर में शहीद हो गए थे। विद्यार्थी के संपूर्ण जीवन से जुड़े ऐसे तमाम किस्सों को बेहद आसान और सरल भाषा में समझाती है ‘अंतर्वेद प्रवर’।

भारतीय जन संचार संस्थान के 2014-15 बैच के छात्र रहे इस पुस्तक के लेखक अमित राजपूत कहते हैं कि उनकी क़िताब ‘अंतर्वेद प्रवर’ गणेश शंकर विद्यार्थी का पुनरावलोकन है, जिसमें विद्यार्थीजी से जुड़ी इतिहास की उन जानकारियों का संग्रह किया गया है जो अब तक प्रकाश में नहीं आई है।

बता दें कि, पुस्तक ‘अंतर्वेद प्रवरः गणेश शंकर विद्यार्थी’ का लोकार्पण बीते सप्ताह नई दिल्ली में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा किया गया। इस मौके पर दिल्ली स्टाफ़ सेलेक्शन बोर्ड के सचिव शैलेन्द्र भदौरिया, वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मी शंकर बाजपेयी और भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश मुख्य रूप से मौजूद रहें।