क्या भारत से ख़त्म होने जा रहा वोडाफ़ोन का व्यापार ?

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Ground Report । Newsdesk

घाटा घाटा और सिर्फ घाटा सरकारी हो या प्राइवेट कंपनियां हर कोई इस समय घाटे में है। बैंक, इंडस्ट्री, टेलीकॉम, एयरवेज, पेट्रोलियम, एफएमसीजी, रिटेल, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, मीडिया कोई भी सेक्टर उठा कर देख लिया जाए तो पिछली तिमाही में कई नामी कंपनियों ने घाटा दर्ज किया है। 

भारत की जीडीपी की रेटिंग में भी भारी गिरावट देखी जा रही है। मूडीज हो या SBI जीडीपी के आंकड़ों में गिरावट की भविष्यवाणी कर रही हैं। हमने यहां सेक्टर वार हो रहे कंपनियों के घाटों के आंकड़े जुटाए हैं जिन्हें देखकर आप समझ जाएंगे कि बाज़ार का रूख भारत की महत्वकांक्षाओं के विपरीत है।

74,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ

दूरसंचार उद्योग की स्थिति पर आशंकाओं को और बढ़ाते हुए भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शामिल वोडाफ़ोन-इंडिया को दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड 74,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। एक अरब से अधिक मोबाइल ग्राहकों के साथ भारत दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार बाज़ारों में से एक है

इस हफ़्ते की शुरुआत में वोडाफ़ोन के सीईओ निक रीड ने चेतावनी दी थी कि अगर सरकार दूरसंचार ऑपरेटरों पर भारी भरकम टैक्स और शुल्क का बोझ डालना बंद नहीं करती है तो भारत में कंपनी के भविष्य पर संकट आ सकता है।

देश की छवि पर भी असर पड़ सकता है।

बीते मंगलवार को निक रीड ने कहा था, “असहयोगी रेग्युलेशन और बहुत ज़्यादा टैक्स की वजह से हम पर बहुत बड़ा वित्त बोझ है, और अब इससे भी ऊपर सुप्रीम कोर्ट से हमारे लिए नकारात्मक फ़ैसला आया है।” अगर वोडाफ़ोन जैसी बड़ी कंपनी देश छोड़ने का फ़ैसला करती है तो इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी असर पड़ सकता है।

ALSO READ:  तेज़ी से गिरती देश की अर्थव्यवस्था को एक और झटका, मूडीज़ ने घटाई रेटिंग

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.