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गाय की आत्मा की शांति के लिए गांव वालों ने कराया 4 हज़ार लोगों को भोजन.

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एक तरफ़ देश में गाय को लेकर सियासत और धमासान मचा हुआ है. गाय के नाम पर कथित तौर पर लोगों को पीट-पीट कर मारे जाने के मामलें रोज़ाना सुनने को मिल रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ़ एक गाय की मौत ने पूरे गांव को एक जुट कर दिया. हिंदू-मुस्लिम सब ने एकजुट हो कर गाय की आत्मा की शांति के लिए पूरे गांव को भोजन कराया.  

पंडितों और 101 कन्याओं को भी भोज करवाया

यूपी के मथुरा ज़िले के कुड़वारा गांव में एक गाय की मौत के बाद 4 हज़ार लोगों को भर पेट भोजन कराया गया. खुले में धूमने वाली एक गाय के मरने पर न सिर्फ़ उसे हिंदू रीति-रीवाजों के अनुसार समाधि दी, बल्कि 12 दिन बाद उस गाय कि आत्मा की शांति के लिए पंडितों और 101 कन्याओं को भोज करवाया और 7 गांवों का भंडारा भी कराया.

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गांव के मुस्लिम परिवार ने दिया पूरा सहयोग

गाय के अंतिम संस्कार से लेकर भंड़ारे तक जो भी आयोजन हुआ उसमें गांव के मुस्लिम युवक हाकिम खान और उसके परिवार ने पूरा सहयोग दिया. गावं वालों का कहना है कि हाकिम खान का परिवार यूं तो आर्धिक रूप से ज़्यादा सक्षम नहीं है. लेकिन इस नेक काम में उनके परिवार ने तन-मन और धन से साथ सभी कामों में सहयोग दिया.   

इस पूरे क्रिया-कर्म और भंडारें में एक मुस्लिम युवक और उसके परिवार ने भी अपना विशेष सहयोग दिया. गाय के नाम पर इस भोजन में पूरे गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली. गांव वालों ने बताया कि बीते 3 सितंबर बूढ़ी गाय की मृत्यु हो गई थी. गांव के लोग बताते हैं कि गाय गांव की गलियों में धूम-घूमकर किसी तरह अपना पेट भरा करती थी.

गांव में भंड़ारे के लिए एक लाख का चंदा किया गया जमा.

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क्योंकि कर्मकांड़ के अनुसार भंड़ारे के लिए काफ़ी पैसा चाहिए था तो सबने आपस में चंदा किया और 7 गांव को भंड़ारे के लिए न्योता भेजा गया. शनिवार को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार सबसे पहले 12 पंडितों को और उसके बाद 101 कन्याओं को भोज कराया गया.