‘पहले मैंने अपने परिवार को मलबे से निकाला, फिर उनकी मय्यत पर रोई’.

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अफ़गानिस्तान में रोज़ाना हो रहे ताज़ा हमलों से आम लोगों की जाने लगातार जा रही हैं. बीबीसी उर्दू की जारी ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान के नियंत्रण वाले उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के फ़रयाब प्रांत हिंसा की भयानक चपेट में हैं.

बीबीसी उर्दू ने अपनी वेबसाईट पर एक वीडियो जारी कर वहां के मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा की है. अफ़गानिस्तान के बाशिंदों के लिए जिंदगी और मौत के मायने धुंधले से हो गए हैं. रोज़ाना होने वालों हमलों के कारण लाशों का ढ़ेर सा लग जाता है. अलजज़ीरा की जारी एक रिपोर्ट बताती है कि अगस्त के महीने में अफ़ग़ानिस्तान में रोज़ औसतन 74 लोगों की मौत हुई.

एक बुजुर्ग अफगान महिला जिसके दो बेटे, बहू, तीन पोते और पोते एक हवाई हमले में मारे गए थे. महिला उन लोगों के जूतों को चूमकर रोती दिखाई दे रही है.

बीबीसी हिंदी

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान चरमपंथियों ने विस्फ़ोटकों से भरे एक ट्रक में एक अस्पताल के बाहर धमाका कर दिया जिसमें कम से कम 20 लोग मारे गए. यह भी ख़बर है कि पूर्वी हिस्से में इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों को निशाना बनाने वाले एक हवाई हमले में 15 नागरिकों की मौत हो गई है.

REUTERS

गुरुवार सुबह हुए हमले में मारे गये लोगों की संख्या अभी पूरी तरह नहीं पता चल सकी है. ज़ाबुल के डिप्टी गवर्नर ने कहा कि 20 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है और करीब 90 लोग घायल हुए हैं. घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने देखा कि मलबे से महिलाओं और बच्चों को बाहर निकाला जा रहा है. न्यूज एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक, विश्वविद्यालय के छात्र आतीफ़ बलोच ने कहा, “ये भयानक था.”

तालिबान रोज़ाना हमला करना जारी रखे हुए है. इस महीने के आख़िर में आम चुनाव होना है. जिसको लेकर एक भयानक स्थिति बनी हुई है. अब बड़ा सवाल यह है कि इस तरह के हालात में क्या आम चुनाव करा पाना आसान होगा? बीते छ​ह सितंबर को क़ाबुल में तालिबान के एक हमले में एक अमरिकी सैनिक और 11 अन्य के मारे जाने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने शांति वार्ता से क़दम पीछे खींच लिए थे.

विस्तृत रिपोर्ट को बीबीसी उर्दू-हिंदी और अलजज़ीरा की वेबसाइट पर पढ़ा जा सकता है.