मोदी सरकार की वित्त मंत्री के पास नहीं अर्थव्यवस्था का ज्ञान : सुब्रह्मण्यम स्वामी

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अपने तीख़े भाषणों के लिए प्रख्यात भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा से सांसद डॉ.सुब्रह्मण्यम स्वामी ने वित्त मंत्री और मोदी सरकार पर एक बार फ़िर से अर्थव्यवस्था की ख़राब हालात को लेकर हमला बोला है.

सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ‘रीसेट–रिगेनिंग इंडियन्स इकोनॉमिक लीगेसी’ नाम से एक किताब लांच की है. जिसका विमोचन पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से करवा. उस किताब में स्वामी ने भारत की अर्थव्यवस्था के आधारभूत ढ़ांचे पर बात की है और अर्थव्यवस्था तो गति देने के तरीक़ो का सुझाव दिया है.

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सुब्रह्मण्यम स्वामी का कहना है कि बीते पांच सालों में सरकार ने वहीं काम किए जो मैक्रो-इकोनॉमी की सेहत के लिय करना उचित नहीं था. पीएम मोदी ने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को उज्जला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन की सुविधा दी जो मैक्रो- इकोनॉमी के लिय ठीक था.

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लेकिन मैक्रो-इकोनॉमिक्स एक पूरी प्रणाली है और पूरी प्रणाली को गड़बड़ कर दिया गया है, जिसे जल्द पटरी पर लाने की आवश्यकता है और इसे कॉरपोरेट सेक्टर के लिए कर घटाने जैसे किसी एक उपाय से नहीं पटरी पर लाना संभव नहीं है.

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स्वामी ने आगे बोलते हुए कहा कि अगर आयकर घटाना एक बहुत ही प्रशंसनीय क़दम होता तो मध्य वर्ग बहुत खुश होता और पैसे की बचत करता. कॉरपोरेट सेक्टर के साथ समस्या यह है कि मांग कम है. मांग तभी बढ़ती है, जब आम जनता सशक्त होती है.

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स्वामी ने कहा कि आम जनता को सशक्त करने का मतलब आयकर को खत्म किया जाना चाहिए था. कॉरपोरेट कर घटाना निर्थक है. क्योंकि वे सिर्फ आपूर्ति बढ़ा सकते हैं, लेकिन जब उसका कोई खरीदार नहीं है, फिर आपूर्ति बढ़ाने का कोई परिणाम नहीं मिलने वाला है.

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स्वामी ने आगे कहा कि असल समस्या यह है कि हमारी मोदी सरकार में जो मौजूदा वित्तमंत्री हैं, उन्हें अर्थव्यवस्था का ज्ञान ही नहीं है.

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