Uttar Pradesh : अंतिम वर्ष के छात्रों की होंगी छोटी परीक्षाएं; 13 सितम्बर से शुरू होगा नया सत्र !

Uttar Pradesh: अंतिम वर्ष के छात्रों की होंगी छोटी परीक्षाएं, इस दिन से शुरू होगा नया सत्र!

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Ground Report | News Desk | Uttar Pradesh | Colleges in Uttar Pradesh | उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को कोविड -19 स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में पढ़ रहे प्रथम वर्ष के छात्रों को बिना परीक्षाओं के पास करने का फैसला किया है। निर्दश भी दिया गया है 31 अगस्त तक परिणाम घोषित किया जाये और नया शैक्षणिक (session) सत्र (2021-22) 13 सितंबर से शुरू हो।

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केवल अंतिम वर्ष, अंतिम सेमेस्टर या वह द्वितीय वर्ष के छात्र जिन्हें पिछले वर्ष प्रमोट किया गया था बिना परीक्षा के (जब वे प्रथम वर्ष में थे) उन्हें इस बार छोटी परीक्षाओं में शामिल होना होगा, जिसमे 50 % काम प्रश्न होंगे और अवधि 3 घंटे से घटाकर 90 मिनट की होगी।दिनेश शर्मा ने कहा कि यूपी के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में 41 लाख से अधिक छात्र हैं और छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रथम वर्ष के जिन छात्रों को पिछले वर्ष बिना परीक्षा के द्वितीय वर्ष में प्रमोट किया गया था, उन्हें इस वर्ष परीक्षा में शामिल होना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को 18 जून तक ये बताना होगा की वह किस प्रकार छात्रों को प्रमोट करेंगे।

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सरकार के अनुसार, प्रथम वर्ष के छात्र जिन्हें बिना परीक्षा के दूसरे वर्ष में प्रमोट किया जाएगा, वह 2022 में अपने द्वितीय वर्ष की परीक्षा में जो अंक मिलेंगे उसी हिसाब से उन्हें इस वर्ष के अंक भविष्य में दिए जायँगे। शर्मा ने कहा कि अंतिम सेमेस्टर या अंतिम वर्ष को छोड़कर, छात्रों के अंक या तो उनके पिछले वर्ष के परिणामों के आधार पर या आगामी परीक्षाओं में उनके प्रदर्शन के आधार पर दिए जाएंगे।

उन्होंने एक बयान में कहा, दूसरे वर्ष में छात्रों के लिए, जो 2020 में प्रथम वर्ष की परीक्षा में उपस्थित हुए हैं, उनके अंक प्रथम वर्ष के अंकों के आधार पर तय किए जा सकते हैं और उसी अनुसार उन्हें तीसरे वर्ष में प्रमोट किया जा सकता है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कोई प्रैक्टिकल परीक्षा नहीं होगी और वाइवा ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। थ्योरी एग्जाम में मिले अंको को ही प्रैक्टिकल में गिन लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को यह सुझाव दिया जा रहा है कि सभी विषयों के प्रश्नों का एक ही प्रश्न पात्र बनाया जाए जो बहुविकल्पीय (mcq) या ओएमआर (optical marks recorder) पर आधारित हो।

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