किसान अध्यादेशों का विरोध

देश के किसान कर रहे हैं केंद्र सरकार के जारी अध्यादेशों का विरोध जानिए क्यों ?

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हाल के कुछ दिन में पंजाब, हरियाणा मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित अन्य राज्यों में 5 जून के बाद से लगातार धरने प्रदर्शन चल रहे हैं। राज्यों के किसान संगठन सक्रियता से काम कर रहे हैं। इसकी वजह है केंद्र सरकार ने पाँच जून को आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, किसानों के व्यापार और वाणिज्य अध्यादेश 2020 और मूल्य आश्वासन और फार्म सेवा अध्यादेश जारी किया गया। जिसके बाद से लगातार तीनों राज्यों के किसान लगातार माँग कर रहे हैं कि इन अध्यादेशों को वापिस लिया जाए। अलग-अलग किसान संगठनों से बात करने पर पता चला ।

अखिल भारतीय किसान सभा से जुड़े किसान से राजकुमार से बात करने पर उन्होंने बताया, “मूल्य आश्वासन और फार्म सेवा अध्यादेश, 2020 पर किसानों (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौते को 5 जून, 2020 को लागू किया गया था। सरकार के अनुसार कृषि उत्पादों की बिक्री और खरीद के संदर्भ में किसानों के संरक्षण और सशक्तिकरण काम करता है। लेकिन अध्यादेश के प्रावधान सभी राज्य एपीएमसी कानूनों को खत्म कर देंगे।” जब कांट्रेक्ट फार्मिंग की जायेगी तो बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने मुनाफ़ों की नज़र से ही किसानों से खेती करवाई जाएगी। कंट्रेक्ट फार्मिंग के अंदर शर्त यह है कि खेती के लिये बीज और दवाइयां कंट्रेक्टर देगा।। कांट्रेक्टर अपनी शर्तों में ऐसी ही शर्तें रखेंगे जैसे कि वे एक निश्चित साईज, निश्चित रंग, निश्चित गुणवत्ता वाले उत्पादों को ही खरीदेंगे।

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इसके अलावा, अगर मौसम की खराबी या किसी अन्य कारण से फ़सल की गुणवत्ता में परिवर्तन आता है तो सारा का सारा नुकसान किसानों को भरना होगा। इस स्थिति में कांट्रेक्टर ने जो पैसा बीज और दवा पर लगाया है वह सारा का सारा खर्च किसानों से वसूला जायेगा।

स्वामीनाथन संघर्ष के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकल पचार ने हाल ही में सरकार ने “कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश-2020 जिसके अनुसार, अंतर-राज्यीय कृषि व्यापार की रुकावटें हटा दी जायेंगी। क्या इससे किसानों को अपने उत्पादों के लिए सही दाम न मिलने की समस्या हल कर दिया। कृषि व्यापार को निजी कंपनियों के लिए और ज्यादा खोलने की तैयारी तो सरकार द्वारा फरवरी में ही कर दी गयी थी, जब बजट पेश हुआ था। सरकार कृषि क्षेत्र को कॉर्पोरेट हाउसेस को सौंपना चाहती है।’’

कृषि उपज बाजार समिति (APMC) को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) के लिए हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों में गेहूं और धान की खरीद करनी पड़ती है। ए.पी.एम.सी. उस खरीद से पीछे हटना चाहती है। सरकार ने भारतीय खाद्य निगम का बजट घटा दिया है। मंडी एक्ट में बदलाव होने से सरकारी मंडियों की जगह पर प्राइवेट मंडियां आएंगी। जब सरकार किसानों को खुद के द्वारा घोषित किया गया न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं दे पा रही है, कॉर्पोरेट हाउसेस की मंडियां किसानों को उनके उत्पादों का उचित भाव देंगी।

आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020 किया गया है। इसमें आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन किया गया है। अध्यादेश में संशोधन करते हुए केंद्र सरकार अनाज, दाल, आलू, प्याज, खाद्य तिलहन और तेल सहित कुछ खाद्य पदार्थों की आपूर्ति को केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही नियंत्रित कर सकती है। जबकि इससे पहले इनके स्टोक पर सीमा होती थी जिसे अब हटा दिया गया है। किसान संगठनों का कहना है कि इससे किसानों को किसी भी तरह का कोई लाभ नहीं होगा। देश में बड़ा लगभग 86  प्रतिशत किसान सीमांत हैं इसलिए वे स्टोक नहीं कर सकते। देखा जाए तो इसका लाभ बड़े व्यापारी को  होगा जो इसमें सामर्थ हैं। उन्हे स्टॉक करने का एक तरह का  लाइसेस मिले जाएगा। जिससे काला- बाजारी की संभावनाऐं ओर बढ़ेंगी। 

संबंधित राज्यों के किसान संगठन इसे लेकर मीटिंग और सभाओं के माध्यम से आपस में जुड़ रहे हैं। छोटे और बड़े किसान संगठन एक मंच पर आने की कवायद शुरू कर चुके हैं।तमाम राज्यों के किसान अब बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं ताकि इन अध्यादेशों को वापिस करवाया जा सके ।

Written by Sajan Kumar, He is journalism graduate from Indian Institute of Mass Communication.

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