किसान आंदोलन से जुड़ी ज़रुरी बातें

किसान आंदोलन के बारे में कुछ ऐसी बातें जो कम ही लोग जानते हैं

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किसान आंदोलन को आज 24 दिन हो चुके हैं। हरियाणा और पंजाब के किसान दिल्ली की सीमा पर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। इनका मानना है कि ये कानून किसान को उन्हीं के खेत में मज़दूर बनाने का काम करेंगे और इससे किसान की बजाए उद्योगपतियों को फायदा पहुंचेगा। किसानों को आशंका है कि मोदी सरकार के यह कानून एमएसपी और मंडियों को खत्म कर देंगे जबकि सरकार इन कानूनों को ऐतिहासिक बदलाव और सुधार की तरह देखती है। जिसकी मदद से कृषि क्षेत्र में आधुनिकता के रास्ते खुलेंगे और किसान बेहतर आमदनी पा सकेंगे।

आंदोलन को लेकर कई तरह की अफवाहें समय-समय पर फैलाई जा रही हैं। लेकिन इस आंदोलन के प्रति कुछ भी सोच अपने मन में बनाने से पहले आपको कुछ बातें ज़रुर जान लेना चाहिए। जो शायद आपको मीडिया से न पता चले।

बड़ी बातें-

  1. 26 नवंबर से अब तक किसान आंदोलन में 20 से ज़्यादा किसान अपनी जान गंवा चुके हैं। अधिकतर किसान पंजाब के हैं। मरने वाले किसानों में 11 किसानों की मौत ठंड की वजह से हुई है। तो वहीं कुछ किसानों की मौत एक्सीडेंट की वजह से हुई है।
  2. पंजाब के किसानों को आमूमन काफी अमीर माना जाता है लेकिन आपको बता दें कि पंजाब के 96 फीसदी किसान गरीबी रेखा के नीचे गुज़र बसर करते हैं। आंदोलन में शामिल हुए ज़्यादातर किसान उसी वर्ग से आते हैं।
  3. एसोचैम के अनुसार आंदोलन की वजह से पंजाब, हरियाणा और पंजाब की अर्थव्यवस्था को हर रोज़ करीब 3000 से 3500 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
  4. कंफेड्रेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के अनुसार दिल्ली के आसपास के राज्यों में पिछले 20 दिनों में 5 हज़ार करोड़ तक की आर्थिक गतिविधियां आंदोलन की वजह से प्रभावित हुई हैं।
  5. किसानों के विरोध प्रदर्शन पर यह आरोप है कि विपक्षी पार्टियां इसमें में शामिल हैं। आपको बता दें कि आंदोलन में शामिल 31 में से 18 किसान यूनियन किसी राजनीतिक पार्टी से संबंध नहीं रखती। इसमें शामिल ज़्यादातर किसान किसी राजनीतिक पार्टी से संबंध नहीं रखते।
  6. कृषि कानून केवल कृषि क्षेत्र को प्रभावित करते हैं ऐसा नहीं है। इससे कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्र जैसे ट्रांस्पोर्ट, फूड प्रोसेसिंग, खाद बीज और कीटनाशक इंडस्ट्री भी प्रभावित होगी।
  7. आंदोलन में शामिल ज़्यादातर किसान वरिष्ठ नागरिग, महिलाएं और बच्चे हैं। इनकी संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। पंजाब और हरियाणा से लगातार ट्रैक्टर और ट्रॉलियों में बैठकर आ रहे हैं। आपको बता दें कि सिंघू और टिकरी बॉर्डर पर किसानों का एक अलग से पूरा गांव बस गया है। कई किलोमीटर पर केवल किसान ही किसान दिखाई देंगे। यह आंदोलन भारत के इतिहास का सबसे बड़ा किसान आंदोलन बन चुका है।
  8. मीडिया की ओर से इन किसानों को नकली, आतंकवादी और खालिस्तानी बताया जा रहा है। इसी के चलते आंदोलन में ट्रॉली टाईम्स नाम का एक अखबार निकाला जा रहा है। इसमें किसानों को दैनिक खबरें दी जा रही हैं। किसानों का देश की राष्ट्रीय मीडिया के उपर से विश्वास उठ गया है। यह हमें अग्रेज़ों के गुलामी के दौर की याद दिलाता है जब भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को अपने खुद के अखबार निकालने पड़ते थे क्योंकि बाकी का मीडिया अंग्रेज़ो का गुलाम था।
  9. किसानों की मदद के लिए कई समाजसेवी संगठन काम कर रहे हैं। खालसा एड जैसी संस्था जो दुनियाभर में समाज सेवा के लिए जानी जाती है। किसानों को हर संभव मदद प्रदान कर रही है।
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