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किसान आंदोलन: जो काम संसद में नहीं हुआ वो करवाएगा सुप्रीम कोर्ट

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किसान आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। आज सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कृषि कानूनों को होल्ड पर डालने की संभावना तलाशने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि क्या सरकार अदालत को यह आश्वासन दे सकती है कि जब तक इस मामले पर कोर्ट सुनवाई न करे, केंद्र कानून को लागू न करें। साथ ही किसान और सरकार के बीच बातचीत का रास्ता निकालने के लिए एक कमेटी बनाने के लिए भी कहा गया है जिसमें कृषि विशेषज्ञ और किसान संघों के निष्पक्ष और स्वतंत्र लोग शामिल हों। इस कमेटी में पी. साईनाथ, भारतीय किसान यूनियन और अन्य सदस्य हो सकते हैं।

बड़ी बातें-

बातचीत के लिए बनेगी कमेटी

सुप्रीम कोर्ट कृषि कानूनों पर किसानों के विरोध और सरकार के पक्ष पर बातचीत के लिए एक पैनल गठित करेगा जो सभी मतभेदों की बीच से रास्ता निकाल सके। आपको बता दें की किसानों का कहना है कि सरकार किसान के हित में कानून लाई लेकिन किसानों से ही इसपर बात नहीं की गई। संसद में भी बिना चर्चा के कानून पारित कर दिया गया। अगर सरकार ने पहले ही बातचीत करके यह कानून बनाया होता तो शायद सुप्रीम कोर्ट को इसमें न आना पड़ता। चर्चा के लिए संसद होती है, लेकिन देश में जब कानून जबरन थोपे जाते हैं तो न्यायपालिका को बीच में आना ही पड़ता है।

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कानून की वैधता पर कोई फैसला नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कानूनों की वैधता तय करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर किसान और सरकार वार्ता करें तो विरोध-प्रदर्शन का उद्देश्य पूरा हो सकता है और हम इसकी व्यवस्था कराना चाहते हैं। प्रदर्शन अहिंसक रहे, दिल्ली के रास्ते ब्लॉक न हो क्योंकि इस समयस्या का समाधान केवल बातचीत से ही निकल सकता है।

आंदोलन का किसानों को हक़

दिल्ली बॉर्डर पर पिछले 22 दिन से चल रहे किसान आंदोलन को खत्म करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसानों को प्रदर्शन करने का हक है लेकिन यह कैसे किया जाए इस पर चर्चा की जा सकती है। हम प्रदर्शन के अधिकार में कटौती नहीं कर सकते हैं। केवल एक चीज जिस पर हम गौर कर सकते हैं, वह यह है कि इससे किसी के जीवन को नुकसान नहीं होना चाहिए। इस तरह से शहर को ब्लॉक नहीं कर सकते और न ही हिंसा भड़का सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि हम किसानों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को सही ठहराते हैं, लेकिन विरोध अहिंसक होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई फिल्हाल के लिए टाल दी गई है। कोर्ट ने कहा कि वह किसानों से बात करने के बाद ही अपना फैसला सुनाएगा। आज अदालत में किसान संगठन के प्रतिनिधी नहीं थे इसी के चलते कमेटी के गठन पर भी फैसला नहीं हो सका।

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