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MP : किसानों को नहीं दिया जा रहा मोदी सरकार द्वारा तय किया गया न्यूनतम समर्थन मूल्य

किसानों को नहीं मिल रहा उचित msp रेट
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देश के कई राज्यों में मोदी सरकार द्वारा तय किया गया मक्के का न्यूनतम रेट MSP मिलना तो दूर उन्हें लागत से भी कम दाम मिल रहा है। भंडारण की सुविधा है नहीं इसलिए किसान मजबूरी में औने-पौन दाम पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं।

केंद्र ने 2020-21 के लिए मक्के का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 1760 रुपये से बढ़ाकर 1850 रुपये घोषित किया है। लेकिन, क्या धरातल पर किसानों को इस घोषणा का कोई लाभ मिल पा रहा है? इसका जवाब आपको नहीं में मिलेगा। किसान हमेशा न्यूनतम रेट की मांग करता है तब उसका ये हाल है।

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मक्का पैदा करने की लागत प्रति क्विंटल 1213 रुपये आती है, दाम मिल रहा सिर्फ 1020 रुपये । मध्य प्रदेश में किसानों को नहीं दिया जा रहा मोदी सरकार द्वारा तय किया गया 1850 रुपये क्विंटल का रेट । इस समय मध्य प्रदेश का मक्का किसान परेशान हैं। उन्हें 1020 से लेकर 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक का ही रेट मिल रहा है।

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सरकार कागजों में 1850 रुपये MSP देने का दावा जरूर कर सकती है। यहां तक कि खुलेआम सरकारी ई-मंडी और पारंपरिक मंडियों में मंडी अधिकारियों के सामने भी यही रेट दिया जा रहा है। जहां पर पूरी खरीद व्यवस्था बाजार के हवाले है वहां तो किसानों का और शोषण हो रहा है।

मध्य प्रदेश में चल रहा है आंदोलन

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मध्य प्रदेश से आते हैं। किसानों को लेकर संजीदा व्यक्ति हैं। लेकिन, उनके अपने प्रदेश के हाल बहुत खराब हैं। किसान जागृति संगठन के नेता इरफान जाफरी बताते हैं कि सिवनी, छिंदवाड़ा और बैतूल आदि जिलों में बड़े पैमाने पर मक्के की खेती होती है। सरकारी मंडी में ही रजिस्टर्ड व्यापारी खुलेआम 1850 की जगह 900 से 1200 रुपये क्विंटल के रेट पर मक्का खरीद रहे हैं।

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अलग-अलग क्षेत्र के किसानों ने अपने घर के आगे ही मक्के का हवन करके अपना विरोध जताया है। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी मांगें भी सरकार के सामने रखी हैं। इनमें मक्के की सरकारी खरीद सुनिश्चित करना, न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP को कानून के दायरे में लाना, भावांतर योजना लागू करना, मक्का आधारित उद्योग की स्थापना और मक्का प्राधिकरण का गठन शामिल है।

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राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन में एमपी इकाई के अध्यक्ष राहुल राज का कहना है कि जब सहकारी समिति खुद खरीद करती है तभी किसान को एमएसपी मिलता है। वरना सरकारी मंडी में मंडी सचिव के सामने ही व्यापारी एमएसपी से कम दाम पर बोली लगाते हैं और उनका कुछ बिगड़ता भी नहीं।

15 फीसदी की काफी कम आयात शुल्क पर

मक्के की खरीद MSP रेट पर करने की मांग को लेकर सिवनी जिले में ऑनलाइन आंदोलन चल रहा है। किसानों का कहना है जब केंद्र सरकार ने रेट 1850 रुपये तय कर दिया है तो राज्य सरकार को उसी पर खरीद सुनिश्चित करनी चाहिए लेकिन वो ऐसा नहीं कर रही है। सिर्फ कागजों में घोषणा हो रही है, जमीन पर किसानों को सही दाम नहीं मिल रहा।

वहीं, केंद्र सरकार ने मक्का किसानों की इन चिंताओं को बढ़ाने का एक और काम किया है। बीते मंगलवार को सरकार ने 15 फीसदी की काफी कम आयात शुल्क पर पांच लाख टन मक्का दूसरे देशों से खरीदने का फैसला किया। इससे पहले आयात शुल्क 50 फीसदी थी। सरकार ने इस फैसले के पीछे की वजह पॉल्ट्री और स्टार्च सेक्टर की जरूरतों को पूरा करना बताया है।

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