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स्वामी अग्निवेश की मौत पर पूर्व CBI चीफ़ राव की घटिया टिप्पणी शर्मसार करने वाली

स्वामी अग्निवेश की मौत पर पूर्व CBI चीफ़ राव की घटिया टिप्पणी ने पूरे देश की पुलिस को शर्मशार कर दिया
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‘स्वामी अग्निवेश ने हिंदू धर्म को बहुत नुक़सान पहुंचाया था। मुझे इस बात का दुख है कि वह एक तेलुगू ब्राह्मण के रूप में पैदा हुए।’

इस देश में नफरत और पूर्वाग्रहों का पैमाना नापना हो तो आप देश की प्रतिष्ठित जांच एजेंसी सीबीआई के निदेशक के पद पर रहे एम. नागेश्वर राव ने के ट्वीट से नाप सकते हैं। देश के इतने प्रतिष्ठित पद पर बैठ चुका शख्स जब इतनी घटिया बात लिख सकता है तब देश में नफरत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है।

बीते शुक्रवार को बंधुआ मुक्ति मोर्चा के संस्थापक रहे स्वामी अग्निवेश का निधन हो गया था। स्वामी अग्निवेश भगवा कपड़े पहनते थे और आम लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते थे। लेकिन पूर्व आईपीएस अफ़सर नागेश्वर राव को न जाने उनसे ऐसी क्या नफरत रही होगी कि उन्होंने स्वामी अग्निवेश की मौत पर ट्वीट कर कहा, ‘अच्छा हुआ, छुटकारा मिला।’

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राव ने लिखा कि वह भगवा कपड़े पहनने वाले एक हिंदू विरोधी शख़्स थे। राव ने लिखा, ‘स्वामी अग्निवेश ने हिंदू धर्म को बहुत नुक़सान पहुंचाया था। मुझे इस बात का दुख है कि वह एक तेलुगू ब्राह्मण के रूप में पैदा हुए।’

आगे उन्होंने और ख़राब कमेंट करते हुए लिखा कि उन्हें यमराज से इस बात की शिकायत है कि उन्होंने इस काम में इतना ज़्यादा वक्त क्यों लिया। 80 साल के स्वामी अग्निवेश दिल्ली के आईएलबीएस अस्पताल में भर्ती थे लेकिन शुक्रवार को कई अंग फ़ेल हो जाने और दिल का दौरा पड़ने के कारण उनकी मौत हो गई।

ख़ैर, नागेश्वर राव को जो कहना था, वो उन्होंने कह दिया। लेकिन इसके बाद ट्विटर यूजर्स ने उन्हें जमकर कोसा। हाई कोर्ट के वकील नवदीप सिंह ने ट्वीट कर कहा कि राव का यह ट्वीट धर्म और मानवता के बुनियादी सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है।

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पत्रकार उत्कर्ष सिंह ने भी राव के इस बयान पर बेहद तीखी टिप्पणी की।

इंडियन पुलिस फ़ाउंडेशन ने ट्वीट कर कहा, ‘एक पूर्व आईपीएस अफ़सर के इस तरह के नफ़रती मैसेज ने पुलिस की वर्दी को अपमानित किया है।’ 

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स्वामी अग्निवेश हरियाणा के पूर्व विधायक भी रह चुके हैं। वे 80 वर्ष के थे। उन्होंने आर्य समाज के सिद्धांतों पर 1970 में एक राजनीतिक पार्टी आर्य सभा की स्थापना भी की थी। वे धर्मों के मामलों पर होने वाली चर्चाओं में खास तौर पर शामिल होते रहे। इतना ही नहीं उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या और महिलाओं की मुक्ति जैसे कई समाज सुधार आंदोलन भी चलाए थे। वे जन लोकपाल विधेयक को लागू करने के लिए 2011 में अन्ना हजारे के आंदोलन के प्रमुख सहयोगियों में से एक थे।

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