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लॉकडाउन में पंडितों ने बदले नियम, शादी से लेकर अंतिम संस्कार तक सब ऑनलाइन

Everything online for marriage to funeral, Pandit changed the rules in lockdown
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online marriage funeral Pandit: हमने बहुत लोगों को ऑनलाइन पढ़ाई करते पाया, ऑनलाइन गेम खेलते पाया या ऑनलाइन लोगों से दोस्ती बढ़ाते हुए पाया लेकिन क्या हो अगर ऑनलाइन शादी (online marriage funeral Pandit) भी होने लगे ? और अधिक गौर फरमाएं तो बताइए कि क्या हो अगर ऑनलाइन अंतिम संस्कार (online marriage funeral Pandit) भी होने लगे? जी हां! कुछ ऐसा ही माहौल चल रहा है राजस्थान में! कोरोना के चलते सभी के कारोबार की चपत लगी पड़ी है। इनमें से कुछ अनलॉक में काम करना शुरू कर देते हैं तो वहीं कुछ को जमीनी स्तर से खोज शुरू करनी पड़ती है। ऐसे में पंडित  व महंतों की रोजी पर भी ग्रहण सा लग गया है।

कोरोना की वजह से लोगों ने बाहरी जनों को घर लाने के नियम को थोड़ा साइड किया है। ऐसे में पंडितों के ऊपर अजीब ही गाज गिरी है। कोरोना के चलते लोग अपने अटके काम जैसे हवन, पूजन, तेरहवीं व त्रेता आदि करा रहे हैं, लेकिन पंडितों को बुलाकर इसे संपूर्ण करने से डर रहे हैं। लोगों का डर कहीं हद तक सही भी है। कौन कब अपने साथ कौन सी बीमारी के साथ कौन सा वायरस ले आए पता नहीं। ऐसे में पंडितों ने अपने और अपने जजमानों के लिए एक रास्ता निकाला है।

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पंडितों ने क्या किए बदलाव

  • कोविड-19 के चलते लोग ना तो पंडितों से सलाह ले रहे थे और ना ही उन्हें घर बुला रहे थे। ऐसे में राजस्थान के पंडितों ने भी काफी माथापच्ची के बाद एक बीच का रास्ता निकाला है। इससे पंडित भी सुरक्षित रहेंगे और जजमान भी संतुष्ट रह सकेंगे।
  • राजस्थान के पंडितों की एक पहल कारगर होती नजर आ रही है। इसके जरिए पंडितों ने पूजन, हवन कराने का एक अनूठा तरीका ढूंढ निकाला है। ऐसे में पंडित पूजन हवन शादी यहां तक कि दाह संस्कार भी ऑनलाइन कराने लगे हैं।
  • इसके लिए पंडितों के समूह ने ऑनलाइन दो एरिया बनाकर तैयार किए हैं। एक में अच्छे कामों जैसे शादी कामकाज मुंडन हवन आदि का काम देखने वाले पंडित हैं, और दूसरे एरिया में त्रेता तेरहवी आदि वाले पंडितों का खाका तैयार किया गया है।

पंडित समूह ने कैसे किया प्रबंध

हर तरफ रोजगार में बंदी चलने के कारण हर कोई बीच का रास्ता ढूंढ़ रहा है। इसी तरीके से राजस्थान के पंडितों ने भी आपसी तौर पर सलाह मशवरा करके खुद को दो गुटों में बांट कर काम करने का निर्णय लिया है।

पंडितों ने अपने काम के लिए एक लिस्ट तैयार करके ऑनलाइन डाल दिए। इसमें उनके द्वारा लिए जाने वाले मुंडन संस्कार से लेकर त्रेता देर में तक का भी ब्यौरा मौजूद है। पंडितों ने इसकी लिस्ट जारी करते हुए कुछ जानकारी शेयर की और बताया कि वह ऑनलाइन ही अलग-अलग कामकाज पैकेज के साथ अपने दुश्मनों के लिए काम करते हैं। यह पैकेज कार्यक्रम पर निर्भर करता है जैसे कि यज्ञोपवीत संस्कार के लिए 8 से 11 हज़ार वही अंतिम संस्कार व तेरहवीं के लिए 25 से 31हजार रुपए तय किए गए हैं।

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