असुरक्षित गर्भपात की वजह से भारत में होती है हर दिन 10 मौत

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न्यूज़ डेस्क।। भारत में कई वर्षों पहले गर्भपात को कानूनी मान्यता दे दी गयी थी। लेकिन आजतक महिलाओं में इसे लेकर जागरूकता नहीं है। लोग अभी भी गर्भपात को गैरकानूनी समझते हैं और छुप कर असुरक्षित और गंदी जगहों पर गर्भपात करवाते हैं। जिससे हर साल 3520 महिलाएं अपनी जान खो बैठती हैं।

भारत में 1971 में Medical Termination of Pregnancy Act पास हुआ था। जिसके अनुसार 20 हफ्ते के अंदर गर्भपात करवाना कानून के दायरे में आता है। यानी यह कानूनी रूप से वैध प्रक्रिया है। किसी भी मान्यता प्राप्त स्वास्थ केंद्र पर जाकर गर्भपात करवाया जा सकता है। लेकिन भारत में 78% फीसदी गर्भपात स्वास्थ केंद्र के बाहर असुरक्षित जगहों पर करवाये जाते हैं। जिसके पीछे इस कानून से अनभिज्ञता एक बड़ा कारण है। भारत में वो स्वास्थ केंद्र जहां गर्भपात की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो की संख्या भी बहुत कम है। या ऐसे स्वास्थ केंद्र लोगों की पहुंच से बहुत दूर हैं। भारतीय कानून के हिसाब से जिन डॉक्टर को गर्भपात करवाने की इजाज़त है वो भी बहुत कम है।

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भारत के गर्भपात कानून में कई वर्षों से संशोधन की मांग उठ रही है, जिसके अनुसार गर्भपात के समय का दायरा 20 हफ़्तों से बढ़ाकर 24 हफ्ते करना। नर्स, आशा और गैर एलोपैथिक डॉक्टर्स को गर्भपात की ट्रेनिंग देना शामिल है। इससे ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएं सुरक्षित गर्भपात करवा सकेंगी। लेकिन सरकार को डर है कि इस कानून का दुरुपयोग होने लगेगा क्योंकि 24 हफ़्तों में लिंग की जांच संभव होगी। और लिंग के आधार पर गर्भपात के केस बढ़ जाएंगे। गैर एलोपैथिक डॉक्टर्स को गर्भपात करवाने का अधिकार देने से कानून की पकड़ कमज़ोर हो जाएगी। लेकिन अगर आंकड़ों पर नज़र डालें तो लिंग के आधार पर गर्भपात की संख्या मात्र 9 फीसदी है।

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Medical Termnation Of Pregnancy Act और POCSO( protection of child sexual abuse act) कई मौकों पर एक दूसरे के विरोधी बन जाते हैं। कई केस में जब लड़की की उम्र 18 साल से कम होती है तो डॉक्टर्स गर्भपात करवाने से डरते हैं क्योंकि तब POCSO की धाराएं लगने का भी खतरा रहता है। ऐसे में समय पर उपचार उपलब्ध नहीं हो पाता और महिलाओं की जान पर बन आती है। ऐसे में दोनों कानून का अंतर्विरोधी होना घातक बन जाता है।

सुरक्षित गर्भपात महिलाओं का अधिकार है। सरकार को महिलाओं को जागरूक करना चाहिए और सभी कानूनी अंतर्विरोधों को दूर कर इस कानून को लागू करवाना चाहिए। अज्ञानता के अंधकार में हर रोज़ कई महिलाएं अपनी जान गवा रही हैं।