मानसून में पेड़ लगाने और उनकी देखरेख से हरदम रहेगी हरियाली: पीपल बाबा

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देश में हर साल पौधा रोपण होता रहता है, पौधा रोपण के मामले में अपना देश अग्रणी देशो में से एक है लेकिन पेड़ों की सर्वाइवल दर (Survival Rate) काफी कम है ऐसा क्यों है? इसका मुख्य वजह है पौधों की देखभाल में कमी और उचित जरूरतों की लोगों के बीच कम जानकारी का न होना है। जिस प्रकार से बच्चे के पैदा होने के बाद कम से कम 5 साल तक उसकी देखभाल की जाती है ठीक वैसे भी पौधों को भी 3 से 4 साल तक देखभाल करने की जरूरत है जो कि नहीं होता है क्यों कि लोग पेड़ लगाकर भूल जाते हैं।

बरसात के मौशम में हरियाली खूब आती है। ये हरियाली बारहो महीनें और सालों साल रहे, इसके लिए पेड़ पौधों का हमें बड़े ही लगन और नियम से देखरेख करनें की जरूरत होती है।सावन-भादो (जुलाई -अगस्त) के महीनें में बारिश के जल से नहाए पेड़-पौधे हम सभी को काफी आकर्षित करते हैं, पर ऐसी हरियाली को सजोकर रखनें के लिए हम मनुष्यों की भी जिम्मेदारी अहम् होती है।

बात अगर गर्मियों की, की जाय तो प्रचंड गर्मी की वजह से इंसान ही नहींं बरन पेड़ पौधों को भी दिक्कत होती है।इंसान तो अपने कृत्रिम संसाधनों फ्रीज, ए सी, कूलर आदि के बल पर खुद को बचा लेता है लेकिन पेड़ पौधे बुरी तरह से झुलस जाते हैं अब तो औधोगीकरण के दौर में ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ढेर सारी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है।ऐसे में पौधों के सूखनें की सम्भावना भी काफी होती है इसी वजह से पेड़ पौधों को बचानें के लिए निरंतर पानी देनें की जरूरत होती है।लेकिन बरसात का मौसम पेड़ पौधों के विकास के लिए काफी अनुकूल होता है।

इस समय जहाँ पौधों को कम पानी देनें की जरूरत होती है वहीं बारिश का पानी मिट्टी के अन्दर तक जाता है इससे निराई गुड़ाई (सोहनी ) आदि काफी आसान हो जाती है ।इसीलिए ज्यादेतर पौधों को बरसात के समय में ही लगाया जाता है।बरसात के मौशम में पेड़ लगाने का कार्य इसीलिए किया जाना चाहिए क्यों कि इस मौसम में पौधों के जड़ों के उचित विकास के लिए पर्याप्त नमी होती है।आकाशीय जल शुद्ध।

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तापमान भी मध्यम होता है। बरसात के पानी में खनिज लवण भी उचित मात्रा में मिलता है।जड़ों के विकास के लिए भी उचित समय होता है।मिट्टी में नमी और केचुवों के आनें से मिटटी और मुलायम हो जाता है। पौधों को बड़े ही प्यार से रखने की जरूरत होती है अगर मानसून के मौसम में पौधों के अधिकतम (Maximum) विकास को सुनिश्चित करनें के लिए निम्न महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखी जायं को काफी लाभदायक नतीजे मिलते है।

पेड़ पौधों के लिए अनुकूल वातावरण के उपलब्धता की वजह से झाड़ियाँ और पत्तेदार पौधे भी बड़ी तेजी से बढ़ते हैं।इस वजह से पेड़ों के बेढंगे बढ़ोत्तरी के आसार भी बढ़ जाते हैं।पेड़ों की वृद्धि उचित दिशा में हो इसके लिए कीड़े मकोड़े होते हैं घास जम जाता है मृदा क्षरण होता है।मानसून का मौसम जहाँ पेड़ पौधों के विकास के लिए उचित होता है वहीं कीड़े-मकोड़ों के विकास करने के लिए भी उचित होता है।पेड़ के जड़ों में पानी के इक्कट्ठे होंने से पेड़ों के समाप्त होनें का खतरा होता है।मिटटी में नमी होनें की वजह से पेड़ों की जड़ों की जमीन से जुड़ाव कम हो जाता है, इस वजह से आंधी तूफ़ान आने पर पेड़ों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है।

पेड़ लगाना बड़ा ही शुभ कार्य होता है। अगर मनुष्य पेड़ लगायें और उनका समय समय पर उचित ध्यान रखे तो निश्चित तौर पर हरियाली क्रांति का मार्ग प्रसस्त किया जा सकता है। केवल पेड़ लगानें से ही नहीं बल्कि पेड़ पौधों को मजबूत बनानें के लिए उनके उचित देखरेख की भी जरूरत होती है ये छोटी-छोटी जानकारियां इस प्रकार हैं –

• बरसात के समय सभी जीवों के विकास के लिए काफी अच्छा होता है जिसमें पौधे बड़ी तेजी से बढ़ते हैं नमी अच्छी होती है ठंढी हवा चलती है। ये मौसम जहाँ पौधों के लिए काफी अच्छा होता है वहीँ फंजाई, पेस्ट, कीड़े मकोड़ों सभी के लिए भी काफी अच्छा होता है।पौधों में जब पानी ज्यादे आये तो ड्रेनेज होल ऐसा रखें की पानी न ठहरे।2 इंच तक गमला खाली रखें जिसमें पानी ठहरे।इन गमलों में मिट्टी ज्यादे भरें सड़ी गोबर की खाद और काटन की खली भी डालें।गैर जरूरी पत्तियों और तनों को काट दें तो नई पत्तियां और शाखाएं व तनें निकलेंगे।

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बरसात में घास को ज्यादे न बढने दे कटिंग करते रहें नहींं तो घास बढ़ेगी और जड़ों में पानी ठहरेगा तथा पौधों के सूखनें का खतरा बना रहेगा।बरसात में पानी न दें।बारिस का पानी पौधों के लिए स्वास्थ्यवर्धक होता है खनिज और पर्यावरण के नाइट्रोजन भी घुला होता है।यहाँ इस मौसम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बारिस में बिजली चमकने से नाईट्रोजन निकलता है और बारिस के जल से मिलकर काफी ग्रीन और स्वास्थ्यवर्धक हो जाता है, सच कहें तो सोने पे सुहागे जैसा काम करता है ।पौधों के कटिंग के बाद जो नए सूट होते हैं उन्हें कीड़े भी खूब नुकसान करते हैं।

बरसात में बारिस के पानी से पत्तियों के रंध्र (Stometa) खुले रहते हैं इन पत्तियों पर नीम के तेल का छिडकाव कर सकते हैं इससे पेस्ट के आने का खतरा नहींं रहेगा।गीली मिटटी की वजह से फंगस के आने से बचाने के लिए छोटे गमले (मिट्टी में ) में आधा चम्मच और बड़े गमले में 1 चम्मच बेकिंग सोडा डालें।पत्ते का पिला होना आयरन के कमी से होता है इनमे सूक्ष्म पोषक तत्व या सरसो की खली का पत्तो व जड़ों में छिडकाव कंरें।इसके अलावा बारिस में आनें वाले खरपतवार को समय-समय पर हटाते रहें नहीं तो पौधों के काम आने वाले पोषक तत्व को ये छोटे खर पतवार भी लेते रहते हैं फलतः पौधों का विकास अवरूद्ध होता है।

• अगर पेड़ की पत्तियां पीली पड़े तो साबुन के पानी का स्प्रे करना भी एक कारगर उपाय है।

• पौधों पर कीटों का आक्रमण न हो सके, इसके लिए आवश्यक रासायनिक का छिड़काव करें। पर कोशिश करें कि घरेलू कीटनाशक बना लें कुछ पौधों की पत्तियाँ जैसे कि बकाईन, तुलसी, मदार, धतुरा, रेड, गेंदा,नीम, कनेर, करंच, सहजन , काफी कारगर होती हैं इन पौधों में जितने भी पौधे हों उनकी पत्तियां बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसकर या कूटकर रखें अगर जरूरी हो तो मिक्सर में पीसकर उसमें इसकी पूरी मात्रा का 10 गुना पानी मिलाएं और उपयोग करें ऐसी खाद का उपयोग आप 10 महीनें तक कर सकते हैं।

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• अगर कोई पौधा कई दिनों से घर के अंदर हो तो इसे अचानक तेज धूप में न रखें। एक दो दिन के लिए इसे छांव में ही रखें फिर धूप में ले जाएँ। पौधों को नए गमलों में डालते समय यह जरूर ध्यान रखें की मिट्टी में अनिवार्य पोषक तत्व हों और दूषित भी न हो।

• घरों में रखे जाने वाले पौधों को सूर्य की रोशनी की आवश्यकता होती है। इसलिए इसका स्थान खिड़की के पास हो ताकि इन्हें पर्याप्त मात्रा में धूप मिले ।

• घर के बाहर के पौधों की तरह ही अंदर के पौधों को पानी की आवश्कता होती है। इसलिए गमलों में पानी की मात्रा जरूरत भर ही हो। पानी की अधिक मात्रा भी पौधों में सड़न पैदा करती है। इससे पौधे मर भी सकते हैं। बरसात के मौसम में पौधों में डीहाइड्रेशन गर्मियों की अपेक्षा काफी कम होती है इसीलिए पानी की जरूरत काफी कम या नहींं पड़ती है।

• पौधों के जड़, फूल, पत्तियों और फलों के विकास के लिए गोबर की खाद का उचित मात्रा में जरूर प्रयोग किया जाना चाहिए।

(लेखक देश के मशहूर पर्यावरणकर्मी और हरियाली क्रांति के प्रतिपादक हैं)

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