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पर्यावरण दिवस विशेष: ‘कोरोना काल’ में भी लगाते रहे पेड़, पिछले 43 वर्षों से जारी है पीपल बाबा का सफर!

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रोहित शिवहरे | नई दिल्ली

पीपल बाबा के नाम से मशहूर प्रेम 1977 से हर रोज पेड़ लगाने का सिलसिला आज तक बदस्तूर जारी है। कोरोना का यह भीषण दौर पीपल बाबा और उनकी टीम को पेड़ लगाने से नहीं रोक पा रहा हैं। सामाजिक दूरी के साथ पीपल बाबा और उनकी टीम आज भी पेड़ लगा रही है।

कारवां बढ़ता गया

1977 मे पीपल बाबा ने जो पेड़ लगाओ अभियान अकेले चालू किया था अब तक उनके साथ 14500 स्वयंसेवक इस अभियान के साथी बन चुके हैं। देश के 18 प्रदेशों के 202 जिलों तक यह अभियान पहुंच चुका है। पीपल बाबा और उनकी टीम ने अब तक 1 करोड़ 27 लाख 30 हजार पीपल के पेड़ लगाये हैं। पीपल बाबा और उनकी टीम ने पिछले 43 सालों में 2 करोड से भी ज्यादा पेड़ लगाये हैं।

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दुनिया भर के लोग लेते हैं पीपल बाबा से सीख

अब तक दुनिया के 63 देशों के लोग और स्वयंसेवक पीपल बाबा के प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा ले चुके हैं। इन प्रशिक्षण शिविरों में आने वाले लोग लगभग 6 सप्ताह तक रहकर पर्यावरण विज्ञान, बागवानी, वानिकी और कृषि उन्नयन की तकनीकी सीखते हैं। वापस अपने देशों में लौट कर दुनिया भर की जमीन हरी करने के लिए संकल्पित होते है।

पीपल बाबा का ज्यादातर काम सरकारी और सामाजिक क्षेत्र की जमीनों पर होता है और अगर उन्हें कोई पेड़ लगाने के लिए बुलावा भेजता है तो वह और उनकी टीम वहां जाकर पेड़ में लगती है। स्कूल, कॉलेज, प्रशासनिक भवन, सैनिक, अर्धसैनिक बल और धार्मिक संस्थानों मंदिर आश्रम गुरुद्वारे आदि के साथ मिलकर वृक्षारोपण का काम करते हैं।

15 एकड़ जमीन को जंगल बनाने का कारनामा

गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी बी एन सिंह ने पीपल बाबा को जब 15 एकड़ की जमीन में चारों पढ़ कर लेती है तो देखते ही देखते पीपल बाबा और उनकी टीम में पूरे 15 एकड़ की जमीन को एक घने जंगल में तब्दील कर दिया। प्रशासनिक भागीदारी के साथ यह काम और भी लाभदायक हो गया।