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GOOD NEWS: इंजीनियरिंग फीस स्ट्रक्चर पर सरकार की सर्जिकल स्ट्राईक

Engineering fees structure India

भारत में तकनीकि शिक्षा प्रदान करने वाले इंजीनियरिंग कॉलेज पहले मनमानी फीस वसूलते थे। लेकिन अब AICTE (All India council for technical education ने पहली बार इंजीनियरिंग, डिज़ाईन आर्ट एंड क्राफ्ट फ्रोग्राम्स में ग्रैजुएशन और पोस्ट ग्रैजुएशन कोर्सेस में मिनिमम और मैक्सीमम फीस निर्धारित कर दी है। इससे इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्रों को लाभ मिलेगा। उन्हें पहले से पता होगा कि कितनी फीस उन्हें साल में देना है।

पहले कॉलेजेस मनमाने ढंग से फीस बढ़ा सकते थे, लेकिन अब इस पर कैप लगा दिया गया है।

यह निर्णय (एआईसीटीई) ने जस्टिस श्रीकृष्णन कमेटी और प्रो. मनोज कुमार तिवारी कमेटी की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए लिया है। हालांकि अभी यह प्रस्ताव शिक्षा मंत्रालय के पास रिव्यू के लिए गया है, वहां से पास होने के बाद ही यह देश भर में लागू हो पाएगा। राज्यों के पास इसे लागू न करने का भी अधिकार होगा। यानि राज्य चाहें तो इस प्रस्ताव को अपने यहां लागू होने से रोक सकते हैं।

कैसे होगा फायदा?

क्यो लिया गया यह फैसला?

इंजीनियरिंग कॉलेज खास तौर पर प्राईवेट कॉलेज अभी मनमाने ढंग से फीस वसूल रहे हैं। यह 50 हजार रुपये से लेकर दस से 15 लाख रुपये सालाना तक है। कई छात्र तकनीकि शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं लेकिन फिस ज्यादा होने की वजह से वो अन्य कोर्स में दाखिला ले लेते हैं।

हर राज्य में अपना खुद का फीस स्ट्रक्चर है। बड़े शहरों में कॉलेजेस के अपने नखरे हैं। वो ट्यूशन फीस के अलावा कई अन्य चार्जेज़ छात्रों से वसूल रहे हैं। इंजीनियरिंग की डिग्री भारत में व्यापार बन गई है। जहां निजी कॉलेजेज़ का उद्देश्य केवल फीस वसूलना रह गया है। इससे इन कॉलेजेस पर नकेल कसेगी।

कितनी होगी अब फीस?

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