औद्योगिक उत्पादन में आठ साल की सबसे बड़ी गिरावट

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Ground Report । Nehal Rizvi

मैन्युफैक्चरिंग और खनन क्षेत्र में सुस्ती रहने के कारण सितंबर महीने में देश के औद्योगिक उत्पादन में 4.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। अगस्त महीने में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 1.1 फीसदी की गिरावट आई थी। यह पिछले आठ साल की सबसे बड़ी गिरावट है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 20.7 प्रतिशत घटा जबकि एक साल पहले इसी महीने में इसमें 6.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। वहीं, विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 3.9 प्रतिशत, बिजली क्षेत्र का उत्पादन 2.6 प्रतिशत घट गया।

यह लगातार दूसरा महीना है जब आईआईपी में गिरावत दर्ज की गई है। इससे पहले अगस्त 2019 में इसमें 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई थी। सितंबर महीने में आईआईपी में आई यह कमी अक्टूबर 2011 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। उस दौरान इसमें 5 प्रतिशत की गिरावट आई थी।

तिमाही आधार पर 2019-20 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में आईआईपी में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि पहली तिमाही में इसमें 3 प्रतिशत तथा वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में 5.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। निवेश का आईना माने जाने वाले पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन सितंबर 2019 में 20.7 प्रतिशत घटा जबकि एक साल पहले इसी महीने में इसमें 6.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं में इस अवधि में क्रमश: 9.9 प्रतिशत और निर्माण वस्तुओं के उत्पादन में 6.4 प्रतिशत की गिरावट आई। हालांकि मध्यवर्ती वस्तुओं के उत्पादन में सितंबर महीने में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सितंबर महीने में आईआईपी में गिरावट से आर्थिक वृद्धि में निकट भविष्य में तेजी की उम्मीद को झटका लगा है।

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आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में 5 प्रतिशत रही जो छह साल का न्यूनतम स्तर है। जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) आंकड़ा 29 नवंबर को आना है।

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