ashok gehlot brother raided ED

राजनीतिक संकट के बीच ED, इनकम टैक्स और CBI की छापेमारी क्या महज़ इत्तेफाक है?

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

राजस्थान का राजनीतिक संकट जारी है, सचिन पायलट की बगावत के बाद अशोक गहलोत अपनी सरकार बचाने में लगे हुए हैं। गहलोत बार-बार इसे बीजेपी का षडयंत्र बता रहे हैं तो बीजेपी इसे कांग्रेस के अपने घर की कलह करार दे रही है। वसुंधरा राजे इस घमासान से दूरी बनाए हुए हैं उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि कांग्रेस इस संकट के लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार न ठहराए। अशोक गहलोत सरकारने राजस्थान की जनता को महामारी और टिड्डी संकट के बीच बेसहारा छोड़ दिया है। बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अब तक इस मामले में चुप ही दिखाई दे रहा था। लेकिन अचानक से राज्य में ED, इनकम टैक्स और CBI की छापेमारी शुरु होने से सुगबुगाहट तेज़ हो गई है और कई सवाल खड़े हो गए हैं।

READ:  राजस्थान में गिरने को है कांग्रेस की सरकार, सचिन-सिंधिया की फोन पर 40 मिनट हुई बातचीत

आपको बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी फर्टिलाइजर (उर्वरक) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हो रही है। ईडी यह छापेमारी देशभर के कई स्थानों पर कर रही है। केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली में कम से कम 13 स्थानों पर तलाशी ली जा रही है। जोधपुर में अग्रसेन गहलोत के ठिकानों पर भी तलाशी ली जा रही है। इस कथित उर्वरक घोटाले के मामले में 7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है। ईडी ने कथित उर्वरक घोटाला मामले में सीमा शुल्क विभाग की शिकायत और आरोपपत्र के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया है।

READ:  मध्य प्रदेश उपचुनाव: बीजेपी के पूर्व मंत्री की खुली धमकी, पार्टी ने नाइंसाफी की तो अन्य विकल्प पर विचार

अशोक गहलोत ने मीडिया के सामने आकर कहा कि देश में गुंडागर्दी शुरु हो गई है। सीबीआई और ईडी का इस्तेमाल कर उनकी सरकार को गिराने की कोशिश बीजेपी कर रही है। लेकिन उनकी सरकार इस षडयंत्र से गिरने वाली नहीं है।

ईडी, इनकम टैक्स और सीबीआई द्वारा की जाने वाली कार्रवाई की टाईमिंग पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। मध्यप्रदेश में राजनीतिक संकट के दौरान भी कमलनाथ के भांजे नकुल नाथ के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी और ऐसी ही छापेमारी महाराष्ट्र के सत्ता संग्राम के दौरान देखी गई थी। केंद्र की सरकार पर इन एजेंसियों के हथियार के रुप में इस्तेमाल के आरोप विपक्ष लगाता रहा है। कहने को यह एजेंसियां स्वायत्त हैं लेकिन इनका राजनीतिक हथियार के रुप में इस्तेमाल इनकी विश्वस्नीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

READ:  माल्या हो या मोदी-चोक्सी.. देश जब-जब भावुक हुआ, फाइलें गायब हुईं : राहुल गांधी

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।

%d bloggers like this: