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ऐसी राखियां जिन्हें गमले में डालने पर निकल आएंगे नन्हें पौधे

Eco-Friendly Rakhi byb Phool

Eco-Friendly Rakhi: रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्यार और सबसे प्यारे रिश्ते का त्यौहार है। इस वर्ष बंधनों का यह त्यौहार 11 अगस्त को मनाया जाएगा। राखियों के इस त्यौहार में बहने अपने भाइयों के लिये तरह-तरह की सुंदर राखियां ख़रीदती हैं।

आज हम आपको कुछ ऐसी राखियों के बारे में बताते हैं जो वर्तमान समय में सूर्खियां बटोर रही हैं। लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं। इनको इको फेंडली राखी के नाम से जाना जाता है। पर्यावरण के प्रति जागरुकता और इससे प्रेम करने वालों में Eco-Friendly Rakhi को लेकर डिमांड भी काफी बढ़ गई है।

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में Eco-Friendly Rakhi से जुड़ी कुछ ऐसी ख़ूबियां आपको बताते हैं। जिनको सुनकर आप ज़रूर इन राखियों को ख़रीदना पसंद करेंगे। ‘Phool’ नाम से एक वेबसाइट है। जो तमाम तरह की इको फ्रेंडली राखियों को बनाकर बेचती है।

Eco-Friendly Rakhi: प्रतिदिन 8.4 टन वेस्ट फूल गंगा में जाने से बचाया

ये लोग इन Eco-Friendly Rakhi को बनाने के लिय बिल्कुल आनोखा तरीखा अपना रहे हैं। ये लोग मंदिर में चढ़ाए गए फूलों का इस्तेमाल कर उनसे राखी तैयार कर रहे हैं। भगवान पर चढ़ने वाले फूल जब हटा कर कहीं फेंक दिए जाते हैं। वे इन फूलों को राखी बनाने के लिय इस्तेमाल कर रहे हैं।

इनकी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, ये लोग उत्तर प्रदेश में मंदिर पर चढ़ने वाले 8.4 टन फूल रोज़ जमा करते हैं। इन फूलों के इस्तेमाल से ये लोग कई तरह के इको फ्रेंडली प्रोडक्ट बनाने में कर रहे हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इनके इस कारोबार से अधिकतर महिलाओं को रोज़गार मिला हुआ है। 73 महिलाओं को फुलटाइम काम कर अपना परिवार चला रही हैं। इसके साथ ही गंगा को साफ रखने में बड़ा योगदान मिल रहा है।

https://phool.co/ नाम से चलने वाली ये वेबसाइट फूलों की मदद से Eco-Friendly Rakhi के अलावा कई तरह के इको फ्रेंडली प्रोडक्ट बना रही है। एक प्रोडक्ड पर कम से कम 1.5 किलो फूल का इस्तेमाल किया जाता है। इस हिसाब से हज़ारों किलो वेस्ट फूल गंगा में फेंकने से बचाया जा रहा है। गंगा को दूषित होने से बचाने में भी इनका योगदान दिन-प्रतिदन बढ़ता जा रहा है।

कैसे और कब शुरू हुई ये कंपनी

यह कंपनी को कानपुर में रहने वाले अंकित अग्रवाल और प्रीत अग्रवाल ने 2015 में शुरू किया था। गंगा घाट पर बैठकर जब इन्होंने गंगा में जमा गंदगी और फूलों से होने वाली गंदगी को देखा। तब ये लोग गंगा को इस गंदगी से बचाने के लिय सोचने लगे। फिर यहीं से जन्म हुआ वेस्ट फूलों को गंगा में फेंकने से रोककर उनके इस्तेमाल का।

एक रीसर्च करने पर इनको पता चला कि मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों पर कई तरह के कीटनाशकों का इस्तेमाल होता है जो बाद में नदी में फेंक दिए जाते हैं। जिससे ये टॉक्सिक केमिकल नदी के पानी में मिल जाता है और पानी के ऑक्सीज़न लेवल को कम करने लगता है। हमने इसी वेस्ट को रिसायकल करने के बारे में सोचा और इसी आईडिया के साथ जन्म हुआ हमारे स्टार्टअप फूल का।

महिलाओं को मिल रहा फुलटाइम रोज़गार

कंपनी ने अपने इस कारोबार में अधिकतर महिलाओं को जोड़कर शुरू किया है। 73 महिलाओं को फुलटाइम रोज़गार मिला हुआ है। मंदिर में चढ़ाए जाने वाले फूलों को ये महिलाएं जमाकर के एक स्थान पर पहुंचाती हैं। फिर उन वेस्ट फूलों की मदद से Eco-Friendly Rakhi जैसे प्रोडक्ट बनाकर तैयार करती हैं।

पार्यावरण को दूषित होने से बचाने में इनका बड़ा योगदान जारी है। पूरे यूपी से प्रतिदिन 8.4 टन वेस्ट फूलों को गंगा में फेंकने से बचाकर ये लोग अपने पास ले जाते हैं। ये लोग पूरे देश में अपने आईडिया के साथ काम करना चाहते हैं।

पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर लोगों में किस तेज़ी से जागरुकता बढ़ी है, इसकी एक बानगी इस बार इको फ्रेंडली प्रोडक्ट्स की खरीदी के चलते भी दिखाई दे रही है। दुनियाभर में तेजी से पर्यावरण में हो रहे बदलाव के दुष्प्रभाव सामने आने लगे हैं। ऐसे में अब यह हमारी जिम्मेदारी बनती है कि इसे बचाने के लिए हम आगे आएं।

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