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पर्यावरण के लिए बदली गई रावण जलाने की परंपरा

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ग्राउंड रिपोर्ट | मध्यप्रदेश

पर्यावरण संरक्षण के प्रति देश भर में जो सजगता का वातावरण बना है उसका असर देश के महानगरों से लेकर गांवों तक दिखाई दे रहा है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से महज़ 40 किमी की दूरी पर बसे सीहोर शहर में दशहरे पर होने वाले रावण दहन के कार्यक्रम को एक दिन के लिए टाल दिया गया क्योंकि रावण का पुतला इको फ्रेंडली नहीं था।

रावण का पुतला बनाने में प्लास्टिक का प्रयोग किया गया था जो दशहरा समिति के अध्यक्ष शशांक सक्सेना को रास नहीं आया। उन्होंने तुरंत पुतले पर से प्लास्टिक हटाकर दूसरा विकल्प ढूंढने का सुझाव दिया। दोबारा रावण बनाने में समय लग रहा था जिसके चलते रावण दहन का कार्यक्रम एक दिन के लिए आगे भी बढ़ा दिया गया। एक युवा नेता की सूझबूझ ने पर्यावरण को प्लास्टिक जलने के बाद होने वाले नुकसान से बचा लिया। लेकिन रावण प्लास्टिक का बने या कागज़ का पर्यावरण को नुकसान तो होना ही है। लेकिन परंपराएं निभाना भी ज़रूरी है और अगर प्रदूषण में कमी लाने के लिए छोटा सा भी प्रयास होता है, तो वह सराहनीय है। इस बार गणेश चतुर्थी के मौके पर भी हमने तरह तरह के इको फ्रेंडली प्रतिमाएं देखी। एक छोटा सा बदलाव समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। इसी सोच के साथ हमें आगे बढ़ना चाहिए।

शहर में कई जगह पर बारिश की वजह से भी रावण दहन का कार्यक्रम एक दिन आगे बढ़ाया गया है। 40 साल बाद ऐसा होगा कि रावण दहन दशहरे पर न होकर उसके अगले दिन होगा।

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