डिजिटल इंडिया की नाकामी ने छीना 8 आदिवासी लड़कियों से डॉक्टर बनने का सपना

जहां एक तरफ़ देशभर में सरकार डिजिटल इंडिया का ढोल पीटती है तो वहीं दूसरी तरफ़ डिजिटल इंडिया की ज़मीनी हक़ीकत कुछ और ही नज़र आती है। ‘’बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ जैसे नारे देने वाली इस सरकार में बेटियों की क्या स्थिति है, इस बात का जीता जागता सबूत छत्तीसगढ़ दंतेवाड़ा में 8 आदिवासी लड़कियों ( 8 Tribal Girls of Dantewada) के साथ घटी इस घटना से लगाया जा सकता है। जहां डॉक्टर बनने का सपना लिए अपनी कड़ी मेहनत से नीट की परीक्षा (NEET EXAM) क्वालीफाई करने वाली 8 आदिवासी छात्राओं को लापारवाही के चलते मेडिकल कॉलेज में दाखिले से वंचित होना पड़ा।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, नीट की परीक्षा क्वालीफाई करने के बाद इन सभी छात्राओं का रजिस्ट्रेशन संचालक चिकित्सा शिक्षा की वेबसाइट पर होना था। वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन के बाद इन सभी की कांउसिलिंग होती और उसके बाद इनका मेडिकल कॉलेज में पढ़ने का सपना पूरा हो जाता, मगर लापारवाही के चलते इनका रजिस्ट्रेशन नही हो सका और सभी दाखिले से वंचित हो गईं। वहीं, छात्रों के परिजन ने कलेक्ट्रेट को लिखित शिकायत देते हुए ‘छू लो आसमान’ नामक एक संस्था पर लापारवाही का आरोप लागाया है ।

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परिजनों द्वारा दी गई शिकायत में बताया गया है कि इन शिक्षकों ने सभी छात्रों का रजिस्ट्रेशन अपनी संस्था के माध्यम से करने की बात कही थी और बाद में छात्रों को लगातार गुमराह करते रहे, जिसके चलते रजिस्ट्रेशन का समय निकल गया और छात्राएं मेडिकल कॉलेज में दाखिले से वंचित रह गई।

इन छात्राओं का कहना है कि संस्था की लापरवाही के चलते उनके भविष्य का एक साल बर्बाद हो गया और दिन-रात मेहनत से पढ़ाई करने का उन्हें सिला नहीं मिल सका। सभी छात्राएं नाराज़ है और अपनी शिकायत लेकर हर जगह जा रही हैं। कलेक्टर से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक और साथ ही साथ छत्तीसगढ़ आदिवासी सभा को भी इन लोगों ने लिखित शिकायत की है। सभी छात्राओं को उम्मीद है कि उनकी शिकायत सुनी जाएगी और उनकी मेहनत को बर्बाद होने से बचा लिया जाएगा।

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ज़िला शिक्षा अधिकारी ने कही ये बात

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िलें में स्थित छू लो आसमान नाम से चल रही संस्था की आवासीय कोचिंग से इस वर्ष 27 परीक्षार्थियों ने नीट की परीक्षा में क्वालीफाई किया था। 27 छात्रों में से 8 छात्रों ( 8 Tribal Girls of Dantewada) की बेहतर रैंक आने से उनके मेडिकल में दाखिले की पूरी संभावना थी, मगर वेबसाइट के सर्वर में तकनीकि समस्या और कोचिंग संस्थान की लापरवाही के कारण यह संभव नहीं हो पाया।

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ज़िला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि सवर्र की दिक्कत के चलते लगातार प्रयास के बाद भी इन छात्राओं का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया। इसके बाद संचालनालय को छात्रों के फार्म की पीडीएफ फाइल भेजी गई। मगर उन सबको स्वीकार नहीं किया गया। इन सब में सबसे बड़ी लापारवाही संस्था की है जिसने एक बार भी कन्फर्मेशन नहीं दिया। ज़िला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि इस मामले को लेकर उच्च स्तर पर बातचीत जारी है।

बसपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत पोयम ने ग्राउंड रिपोर्ट से हुई बातचीत में बताया कि, ”ग़रीब आदिवासी छात्राएं बड़ी मेहनत से यहां तक पहुंचती हैं। ये सभी छात्राएं भी ग़रीबी से निकल कर अपने भविष्य को उज्जलव बना कर आदिवासी समुदाय और देश का नाम रौशन करना चाहती हैं। हेमंत पोयम आगे कहते हैं कि वैसे भी देश में आदिवासी समाज की क्या स्थिति है ये सभी जानते हैं। ऐसे में अगर आगे निकल रहे आदिवासियों को भी बढ़ने का मौक़ा नहीं दिया जाएगा तो फिर क्या ही कहा जाए।

यह लेख ग्राउंड रिपोर्ट के संस्थापक ललित कुमार सिंह द्वारा लिखा गया है।

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