ambedkar jayanti 2019 : dr. babasaheb bhimrao ramji ambedkar The Father of Indian Constitution

भीम राव अंबेडकर परिनिर्वाण दिवस : इस देश में कुछ ऐसे भी मुस्लिम हैं जिनके लिए बाबा ही ‘साहेब’ हैं

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

नई दिल्ली | कोमल बड़ोदेकर

देश-दुनिया आज डॉ. भीमराव अंबेडकर को उनकी 63वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। 14 अप्रेल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में जन्में बाबा साहेब यूं तो दलितों के मसीहा समझे जाते हैं लेकिन सभी धर्मों में उनकी एक अलग ही छाप है। बौद्धिज़्म के चलते उनके लाखों-करोड़ो अनुयायी बौद्धिस्ट हैं लेकिन उनके चाहने वालों में न सिर्फ हिन्दू, सिख हैं बल्कि मुस्लिमों में भी खासा लोकप्रिय हैं।

दिल्ली के सीमापुरी के रहने वाले 65 वर्षीय शम्सुद्दीन भी उन्हीं मुस्लिमों से एक हैं जो दलितों की ही तरह बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर को अपना मसीहा मानते हैं। शम्सुद्दीन पेशे से पलंबर हैं। घर का गुजारा हो जाए इतना कमा लेते हैं। वे कहते हैं कि देश को संविधान और अन्य नागरिकों की तरह हमे भी मौलिक अधिकार देने वाले बाबा साहेब हमारे लिए मसीहा से कम नहीं हैं।

ALSO READ:  #BoycottFrenchProducts trends globally as President Emmanuel Macron stokes new Controversy

डॉ. भीम राव अंबेडकर की तस्वीर पकड़े शम्सुद्दीन की यह तस्वीर दिल्ली के रामलीला मैदान की है जहां बीती 3 दिसंबर को सांसद उदित राज के नेतृत्व में परिसंघ की विशाल रैली का आयोजन किया गया था। यह रैली अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्य तबकों के लिए आयोजित की गई थी।

आरक्षण बचाने और उच्च न्यायालय और अन्य निजि क्षेत्रों में आरक्षण लागू करने के साथ ही दलितों और अल्पसंख्यकों के तमाम मुद्दें इस रैली का मुख्य उद्देश्य थे। शम्सुद्दीन भी इस रैली में अंबेडकर की तस्वीर लिए लिए नज़र आएं।

यह भी पढ़ें: भीम राव अंबेडकर परिनिर्वाण दिवस : समाज को नई दिशा देने वाले बाबा साहेब के 11 अनमोल विचार

बता दें कि संविधान निर्माता डॉ. भीम राव अंबेडकर जन्म से हिंदू थे पर वे एक हिंदू के रूप में मरना नहीं चाहते थे। यही कारण था कि उन्होंने धर्म परिवर्तन करने का फैसला किया। इसके लिए बाबा साहेब ने कई धर्मों को अपनाने पर विचार किया जिसमें से इस्लाम भी एक था।

ALSO READ:  गुजरात में दलित लड़की का गैंगरेप, हत्या कर लाश को पेड़ से लटकाया

धर्मान्तरण से पहले उन्होंने सभी धर्मों सहित इस्लाम का भी गहन अध्ययन किया। वे इस्लाम को हिन्दू धर्म से अलग नहीं समझते थे। उनका मानना था कि जातिवाद का जहर इस्लाम में बैठे उच्च तबके के लोगों में भी वैसा ही है जैसा हिन्दू धर्म में ब्राह्मणों का। यहां भी निचले तबके के मुस्लिमों की स्थिति दलितों से कम न थी।

इस्लाम में भी महिलाओं की स्थिति लगभग-लगभग हिन्दू धर्म की तरह ही थी। वे बहु विवाह और दास प्रथा के खिलाफ थे। बाबा साहेब मानते थे कि बुह विवाह और दास प्रथाएं ऐसी कुरितीयां हैं जिनसे मुस्लिम महिलाओं को कष्ट होता है। यह प्रथाएं सिर्फ मुस्लिमों के एक खास वर्ग के शोषण और दमन का कारण है।

ALSO READ:  दलितों के बाल काटने पर सैलून मालिक को सुनाया गांव से निकालने का फरमान, 50,000 का जुर्माना भी ठोका

डॉ. अंबेडकर के नेतृत्व में बने संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू किया जिसमें देश के हर एक नागरिक मौलिक अधिकारों के रूप में समानता का अधिकार भी मिला। इससे हर धर्म में सदियों  पुरानी गुलामी की बेढ़ियां टूट गई और देश का हर नागरिक समान अधिकारों से जीने लगा। शायद यही कारण है कि अन्य धर्मों और दलितों के अलावा मुस्लिमों के बड़े तबके के लिए डॉ. भीम राव अंबेडकर यानी बाबा ही ‘साहेब’ हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट से जुड़ी तमाम खबरों के लिए हमारे यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/groundreportvideos पर क्लिक कर सब्सक्राइब करें और घंटी के आइकन पर क्लिक करें। आपको यह वीडियो न्यूज़ कैसी लगी अपना फीडबैक, सुझाव या शिकायत आप कमेंट में बता सकते हैं।