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पानी तो रोज़ पी रहे हैं आप लेकिन वाटर फुट प्रिंट के बारे में कुछ पता है?

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Prashansa Gupta | Banda (UP)

पानी! कभी झरनों से बहता कलकल, कभी नदियों से बहता जल, जीवन के लिए अमृत और जिंदगी का अभिन्न अंग। ‘जल है तो कल है’ यही वजह है हमें बचपन से ही पानी की उपयोगिता के बारे में सिखाया जाता रहा है। आप सबको याद होगा कि जब हम स्कूल में पढ़ा करते थे कि हमारी पृथ्वी पर 71 प्रतिशत पानी है। उसमें से 97.5 प्रतिशत पानी महासागरों में है, जो कि खारा है और पीने योग्य नहीं है। सिर्फ 2.5 प्रतिशत पानी ही ऐसा है, जिसे पीने के लिए उपयोग करते हैं।

आप सोच रहे होंगे कि इसमें क्या नई बात है। पानी का प्रतिशत तो तब से अब तक उतना ही है और जिस तरह पानी की उपयोगिता पर काम किया जा रहा है, लोग इसके लिए जागरुक हो रहे हैं। आप सही हो सकते हैं, लेकिन आज हम उस पानी के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, जिसकी व्यर्थता हमें दिखाई देती है। आज हम उस पानी की बात कर रहे हैं, जिसकी व्यर्थता हमें दिखाई नहीं देती। आज हम बात कर रहे हैं ‘वाटर फुट प्रिंट’ की। आप सोच रहे होंगे कि यह क्या होता है? तो दिमाग पर जोर थोड़ा कम लगाएं जनाब… और हमारी आगे की बात को ध्यान से पढ़े।

दरअसल, वाटर फुट प्रिन्ट किसी भी व्यक्ति, समुदाय या व्यवसाय के जल पद चिन्ह को ताजे पानी की कुल मात्रा के रुप में परिभाषित किया जाता है। इसका उपयोग व्यक्ति, समुदाय द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के लिए किया जाता है। आसान भाषा में कहा जाए तो वॉटर पद् चिन्ह से ताप्पर्य उस पानी से है, जो पीने, नहाने, धोने में उपयोग नहीं आता। ​बल्कि इसका उपयोग व्यक्ति किसी उत्पाद के ​निर्माण में करता है। जैसे घरों में आटा गूंदने के लिए पानी का उपयोग होना, किसी सब्जी को बनाने के लिए पानी का उपयोग होना। उसी तरह कारखानों में भी किसी उत्पाद को तैयार करने में पानी का उपयोग होता है। जब किसी उत्पाद का उपयोग किए बिना उसे फेंक देते हैं तो भी यह भी एक तरह से पानी की बर्बादी है।

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बता दें वॉटर फुट प्रिंट तीन तरह का होता है: ग्रीन वॉटर फुट प्रिंट, ब्लू वॉटर फुट प्रिंट और ग्रे वॉटर फुटप्रिंट। इनका विवरण कुछ इस प्रकार है।

ग्रीन वॉटर फुट प्रिंट— वैश्विक ग्रीन वाटर रिसोर्सेज जैसे भूमि नमी, मिट्टी, खेतों आदि में सुखाया जाता है। व्यक्तिगत या समुदाय द्वारा उपयोग की गई वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में कृषि, बागवानी आदि जैसे उत्पाद विशेष रुप से आते है।

ब्लू वॉटर फुट प्रिंट— यह ताजे पानी की मात्रा को सन्दर्भित करता है, जो नीले जल संसाधनों जैसे झीलों, नदियों, तालाबों और कुएं से उत्पन्न वस्तुओं के उपयोग द्वारा किया जाता है।

ग्रे वॉटर फुट प्रिंट— यह वह ताजे पानी को सन्दर्भित करता है, जो व्यक्ति या समुदाय द्वारा उपयोग की गई वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में प्रदूषित हुआ।

यह तो हो गए वॉटर फुट प्रिंट के प्रकार। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि हमारे द्वारा उपयोग की जाने में वस्तुओं में कितना भारी मात्रा में पानी का उपयोग होता है। अगर नहीं! तो हम आपको बता रहे हैं कुछ उदाहरण।

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जैसे-
1 किलो मक्खन में 940 लीटर वाटर फुट प्रिन्ट
1 किलो ब्रेड में 1600 लीटर वाटर फुट प्रिन्ट
1 किलो शक्कर में 1800 लीटर वाटर फुट प्रिन्ट
1 किलो आलू में 287 लीटर वाटर फुट प्रिन्ट
1 लीटर दूध में 1000 लीटर वाटर फुट प्रिन्ट,
1 किलो चिकन में 4330 लीटर वाटर फुट प्रिन्ट
1 जोड़ी जींस व टी शर्ट में 10000 लीटर वाटर फुट प्रिन्ट

इन आकड़ों को देखकर आप जान सकते हैं कि इन उत्पादों के निर्माण में कितना पानी व्यय होता है। इस जल दिवस के अवसर पर हमें यह सोचना होगा कि हम अपने वाटर फुट प्रिन्ट को कैसे कम क्या करें? साथ ही हमें जल के उपयोग के साथ इसके संरक्षण के बारे में भी सोचना होगा। क्योंकि प्रदूषित जल के उपयोग से आप पर कैसी आपदा आ सकती है, यह आप बखूबी जानते होंगे।

(लेखक माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा हैं एंव वर्तमान में बुंदेलखंड के बांदा ज़िले में बतौर प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर ‘सेव वाटर अभियान’ के साथ जुड़ीं हैं।)