राजनीतिक दुश्मनी के बावजूद एम. करुणानिधि और जयललिता में था ये कॉमन कनेक्शन

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चेन्नई, 8 अगस्त। तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि का राष्ट्रीय सम्मान के साथ मरीना बीच पर अंतिम संस्कार कर दिया गया है। बुधवार को करुणानिधि की अंतिम यात्रा के दौरान लोगों का हुजुम उमड़ पड़ा। मंगलवार शाम चेन्नई के कावेरी अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था। उनके निधन की खबर से न सिर्फ तमिलनाडु बल्की देश में शोक की लहर है।

तमिलनाडु में एक दिन के अवकाश के साथ ही सात दिनों का शोक घोषित किया गया है। निधन की खबर सामनेआते ही डीएमके समर्थक सड़कों पर रोते और बिलखते नजर आए। 94वें वर्षीय दक्षिण के कद्दावर नेताओं के रूप में अपनी पहचान बना चुके करुणानिधि की राजनीति में एक विशेष साख थी।

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1991 में राजीव गांधी की मौत का आरोप करुणानिधि पर लगा था। ये गम्भीर आरोप केन्द्र में मंत्री रहे अर्जुन सिंह ने लगाया था। परिणामस्वरुप डीएमके लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई।

वहीं बीते साल पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की चेन्नई के अपोलो अस्पताल में हुई मौत के बाद करुणानिधि ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा था कि अपने समर्थकों के बीच में वह अमर रहेंगी।

तमिलनाडु की राजनीति में गहरी समझ रखने वाले जानकारों के मुताबिक, जयललिता और करुणानिधि के बीच कट्टर राजनीतिक दुश्मनी थी, लेकिन बावजूद इसके दोनों में जो खास और कॉमन बात थी वो ये कि, जयललिता जहां फिल्म इंडस्ट्री से होते हुए राजनीति में आई थी, तो वहीं करुणानिधि पटकथा लेखक के साथ साथ एक कवि भी थे।

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करुणानिधि के समर्थक उन्हें प्यार और सम्मान से ‘कलैनर ‘नाम से भी बुलाते थे। तमिल फिल्म जगत में उन्होंने कई नामी फिल्में भी लिखी। पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके करुणानिधि ने अपना अधिकतर समय व्हीलचेयर पर ही बिताया।

सात दशक पहले पेरियार से प्रभावित होकर ब्राह्मण विरोधी आंदोलन के साथ अपना राजनीतिक करियर शुरु करने वाले करुणानिधि बहुत तेजी से राजनीति के शिखर पर पहुंचकर अन्ना दुर्रै जैसे नेताओं के उत्तराधिकारी के रूप में उभरे थे।