धनतेरस पूजा विधि

Diwali 2020: दिवाली पर क्या है लक्ष्मी पूजा का महत्व और कौन सी कथा है प्रचलित?

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दिवाली रोशनी और असत्य पर सत्य की जीत का त्योहार है। इस त्योहार को हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। वहीं इस वर्ष दिवाली 14 नवंबर यानी बच्चों का दिवस के दिन मनाई जाएगी। दिवाली के दिन लोग दीये और लाइट्स से अपने घरों और व्यवसायिक दुकानों को रोशनी से भर देते है और देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

दरअसल यह मान्यता है कि दिवाली की रात लक्ष्मी माता धरती पर भ्रमण करते हुए अपने भक्तों के घर जाती है। ‌शाम को लक्ष्मी जी और गणेश जी की पूजा भी की जाती है। दिवाली का पांच दिवसीय उत्सव धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक मनाया जाता है। यह तो हार आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर के महीने में पड़ता है।

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दिवाली के प्रदोष काल में माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी धरती पर विचरण करने आती हैं। और जो कोई उनकी इस दिन सच्चे मन से अराधना करता है। वह उस पर अपनी कृपा बरसाती हैं। दिवाली वाले दिन कई लोग व्रत भी रखते हैं और फिर शाम के समय विधि से विधान पूजा करने के बाद व्रत खोलते हैं।

Diwali की पौराणिक कथा-

एक गांव में एक साहूकार था, उसकी बेटी प्रतिदिन पीपल पर जल चढ़ाने जाती थी। जिस पीपल के पेड़ पर वह जल चढ़ाती थी, उस पेड़ पर लक्ष्मी जी का वास था। एक दिन लक्ष्मी जी ने साहूकार की बेटी से कहा ‘मैं तुम्हारी मित्र बनना चाहती हूँ’। लड़की ने कहा की ‘मैं अपने पिता से पूछ कर आऊंगी’। यह बात उसने अपने पिता को बताई, तो पिता ने ‘हां’ कर दी। दूसरे दिन से साहूकार की बेटी ने सहेली बनना स्वीकार कर लिया।